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संक्रामक बीमारियों की रोकथाम को पशुपालन विभाग ने बाढ़ क्षेत्र में डाला डेरा
Updated Sun, 09 Sep 2018 01:00 AM IST
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अमरोहा। बाढ़ क्षेत्र में पशुओं को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए पशुपालन विभाग ने डेरा डाल दिया है। धनौरा, हसनपुर और गजरौला ब्लाक के बाढ़ प्रभावित गांवों में अधिकारियों ने पशुओं को दवाई मुहैया कराने और टीकाकरण के निर्देश दिए हैं। विभाग ने कर्मचारियों की टीमें गठित कर पोंका, गलाघोंटू, बुखार और पेट के कीड़े मारने की दवाई देने के निर्देश जारी किए हैं।
बाढ़ क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका के बीच पशुपालन विभाग ने पशुओं के इलाज के लिए कर्मचारियों की टीमें गठित कर दी हैं। खादर में कैंप लगाकर रोजाना पशुओं को दवाई दी जा रही है। जाटों वाली, शीशो वाली और देवीपुरा में पशुपालन विभाग के कर्मचारी पोंका, गलाघोंटू, बुखार और पेट के कीड़े मारने की दवाई दे रहे हैं। कैंप में गाय, बकरी, भैंस और बैलों के लिए विभाग ने दवाई के इंतजाम कराए हैं। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित दूसरे गांवों में जाकर भी कर्मचारी पशुओं की देखभाल की जानकारी देकर जरूरी दवाइयां मुहैया करा रहे हैं। उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. एमआर यादव ने बताया कि खादर सहित जिले में गलाघोंटू का 80 फीसदी टीकाकरण किया जा चुका है। इसके बाद भी पशुओं में गलाघोंटू की समस्या होने पर तुरंत इलाज की व्यवस्था कराई गई है। बाढ़ क्षेत्र में पशुओं के पेट में कीड़े होने की शिकायत मिली है। कर्मचारियों को भेजकर पेट के कीड़े मारने की दवाई के साथ ही पोंका रोग और बुखार की दवाई दिलाने के इंतजाम किए गए हैं। पशुओं के इलाज में कोताही न बरतने के कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं।
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बाढ़ क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका के बीच पशुपालन विभाग ने पशुओं के इलाज के लिए कर्मचारियों की टीमें गठित कर दी हैं। खादर में कैंप लगाकर रोजाना पशुओं को दवाई दी जा रही है। जाटों वाली, शीशो वाली और देवीपुरा में पशुपालन विभाग के कर्मचारी पोंका, गलाघोंटू, बुखार और पेट के कीड़े मारने की दवाई दे रहे हैं। कैंप में गाय, बकरी, भैंस और बैलों के लिए विभाग ने दवाई के इंतजाम कराए हैं। इसके अलावा बाढ़ प्रभावित दूसरे गांवों में जाकर भी कर्मचारी पशुओं की देखभाल की जानकारी देकर जरूरी दवाइयां मुहैया करा रहे हैं। उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डॉ. एमआर यादव ने बताया कि खादर सहित जिले में गलाघोंटू का 80 फीसदी टीकाकरण किया जा चुका है। इसके बाद भी पशुओं में गलाघोंटू की समस्या होने पर तुरंत इलाज की व्यवस्था कराई गई है। बाढ़ क्षेत्र में पशुओं के पेट में कीड़े होने की शिकायत मिली है। कर्मचारियों को भेजकर पेट के कीड़े मारने की दवाई के साथ ही पोंका रोग और बुखार की दवाई दिलाने के इंतजाम किए गए हैं। पशुओं के इलाज में कोताही न बरतने के कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं।
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