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जिले की चीनी मिलों पर 47 करोड़ रुपये ब्याज बकाया
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बिजनौर। पिछले साल का शतप्रतिशत गन्ना भुगतान करने वाली जिले की आठ चीनी मिलों ने किसानों को विलंब भुगतान पर ब्याज की फूटी कौड़ी भी नहीं दी है। बिलाई चीनी मिल पर अब भी पिछले साल का 45 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। हाईकोर्ट के दो सप्ताह में विलंब गन्ना भुगतान पर ब्याज देने के आदेश के बाद अगर सरकार यह भुगतान करा देती है तो किसानों के खातों में करीब 47 करोड़ रुपये जाएंगे।
जिले में नौ चीनी मिलों को साढ़े तीन लाख से अधिक किसान गन्ना आपूर्ति करते हैं। पिछले साल मिलों ने किसानों को 3674 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। जिले की आठ चीनी मिलों ने तो सारा भुगतान कर दिया है लेकिन बिलाई चीनी मिल पर किसानों का अब भी 45 करोड़ से अधिक रुपये बकाया है। नियम के अनुसार अगर चीनी मिल किसानों से खरीद के 14 दिन के अंदर भुगतान नहीं करती हैं तो उन्हें दस प्रतिशत की दर से ब्याज देना होता है। इस तरह जिले की चीनी मिलों पर किसानों का करीब 47 करोड़ रुपया ब्याज बनता है। इस ब्याज के भुगतान के रूप में मिलों ने किसानों को फूटी कौड़ी नहीं दी है। अब हाईकोर्ट ने ब्याज के भुगतान पर सख्त रवैया अपनाया है।
चीनी मिल ब्याज (करोड़ रु. में)
धामपुर 3.62
स्योहारा 7.36
बिलाई 14.41
बहादरपुर 1.93
बरकातपुर 5.75
बुंदकी 2.22
चांदपुर 3.32
बिजनौर 5.78
नजरबाबाद 2.79
कुल 47.24
नोट:आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं।
ब्याज है किसानों का हक
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार के अनुसार विलंब भुगतान पर ब्याज किसानों का हक है। भुगतान किसानों को विलंब भुगतान पर ब्याज मिलना ही चाहिए। ब्याज नहीं देने वाली मिलों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
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निर्देशों का होगा पालन
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार विलंब भुगतान पर ब्याज के संबंध में शासन के निर्देशों का पालन कराया जाएगा। वर्तमान पेराई सत्र का भुगतान समय से कराया जा रहा रहा है।
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जिले में नौ चीनी मिलों को साढ़े तीन लाख से अधिक किसान गन्ना आपूर्ति करते हैं। पिछले साल मिलों ने किसानों को 3674 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। जिले की आठ चीनी मिलों ने तो सारा भुगतान कर दिया है लेकिन बिलाई चीनी मिल पर किसानों का अब भी 45 करोड़ से अधिक रुपये बकाया है। नियम के अनुसार अगर चीनी मिल किसानों से खरीद के 14 दिन के अंदर भुगतान नहीं करती हैं तो उन्हें दस प्रतिशत की दर से ब्याज देना होता है। इस तरह जिले की चीनी मिलों पर किसानों का करीब 47 करोड़ रुपया ब्याज बनता है। इस ब्याज के भुगतान के रूप में मिलों ने किसानों को फूटी कौड़ी नहीं दी है। अब हाईकोर्ट ने ब्याज के भुगतान पर सख्त रवैया अपनाया है।
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चीनी मिल ब्याज (करोड़ रु. में)
धामपुर 3.62
स्योहारा 7.36
बिलाई 14.41
बहादरपुर 1.93
बरकातपुर 5.75
बुंदकी 2.22
चांदपुर 3.32
बिजनौर 5.78
नजरबाबाद 2.79
कुल 47.24
नोट:आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं।
ब्याज है किसानों का हक
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार के अनुसार विलंब भुगतान पर ब्याज किसानों का हक है। भुगतान किसानों को विलंब भुगतान पर ब्याज मिलना ही चाहिए। ब्याज नहीं देने वाली मिलों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
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निर्देशों का होगा पालन
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार विलंब भुगतान पर ब्याज के संबंध में शासन के निर्देशों का पालन कराया जाएगा। वर्तमान पेराई सत्र का भुगतान समय से कराया जा रहा रहा है।