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साल में दो बार होगी कर्मचारियों की टीबी जांच
Updated Mon, 17 Dec 2018 12:22 AM IST
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साल में दो बार होगी कर्मचारियों की टीबी जांच
बिजनौर। जिला टीबी अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी पर कार्यरत कर्मचारियों की साल में दो बार टीबी की जांच हुआ करेगी। प्रतिदिन टीबी रोगियों के संपर्क में आने के कारण कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर शासन ने यह निर्णय लिया है। यह जांच हर साल जनवरी व जून में हुआ करेगी। इसमें एक बार बलगम और दूसरी एक्सरे जांच से कर्मचारियों टीबी की जांच की जाएगी।
टीबी एक भयानक बीमारी है। रोगी के संपर्क में रहने वालों को इसके होने की प्रबल संभावना रहती है। केंद्र सरकार टीबी को समूल नष्ट करने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंशा है कि देश को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त कर दिया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ी को यह बीमारी न हो। शासन ने राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर में लगे लाखों कर्मचारियों को टीबी रोग से बचाने के लिए यह निर्णय लिया है। जिला टीबी अस्पताल, 11 सीएचसी, 11 पीएचसी आदि पर काम करने वाले करीब 250 कर्मचारी टीबी का इलाज करने में लगे हैं। प्रतिदिन कर्मचारी अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बिना सैकड़ों रोगियों के बलगम की जांच कर उन्हें टीबी होने या न होने की पुष्टि करते हैं। हालांकि कर्मचारी इस दौरान सुरक्षित तरीका अपनाकर मास्क और दस्ताने आदि का प्रयोग करते हैं। इसके बावजूद उन्हें टीबी रोग होने का खतरा बना रहता है। लोगों को स्वास्थ्य की सौगात देने वाले कर्मचारियों की अभी तक टीबी जांच करने का प्रावधान नहीं था। इस कारण कई कर्मचारियों की मौत हो जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। प्राइवेट खर्च पर ही कुछ कर्मचारी अपनी जांच करा लेते थे। लेकिन अब जांच सरकारी खर्च पर होगी। इसके अंतर्गत साल में दो बार अफसरों से लेकर चपरासी तक की टीबी जांच होगी। जनवरी में बलगम और जून में एक्सरे से जांच की जाएगी। जिससे कर्मचारी सुरक्षित रहकर रोगियों का इलाज कर सकें। जिला क्षय रोग अधिकारी बीएस रावत ने बताया कि ये शासन की अच्छी पहल है। कर्मचारी स्वास्थ्य हित को ध्यान में रखकर लिया गया शासन का यह निर्णय सराहना योग्य है। जिले में जनवरी 2019 से इसकी शुरुआत हो जाएगी।
एक कर्मचारी की हो गई थी मौत
नजीबाबाद में टीबी यूनिट में काम करने वाले एक कर्मचारी की करीब दो साल पहले मौत हो गई थी। अफसरों के अनुसार रूटीन में होने वाली जांच के बाद ऐसा नहीं हो पाएगा। इससे कर्मचारी स्वस्थ रहकर रोगियों और अच्छे तरीके से उपचार कर सकेंगे।
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बिजनौर। जिला टीबी अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी पर कार्यरत कर्मचारियों की साल में दो बार टीबी की जांच हुआ करेगी। प्रतिदिन टीबी रोगियों के संपर्क में आने के कारण कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर शासन ने यह निर्णय लिया है। यह जांच हर साल जनवरी व जून में हुआ करेगी। इसमें एक बार बलगम और दूसरी एक्सरे जांच से कर्मचारियों टीबी की जांच की जाएगी।
टीबी एक भयानक बीमारी है। रोगी के संपर्क में रहने वालों को इसके होने की प्रबल संभावना रहती है। केंद्र सरकार टीबी को समूल नष्ट करने के लिए तमाम प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंशा है कि देश को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त कर दिया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ी को यह बीमारी न हो। शासन ने राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत देशभर में लगे लाखों कर्मचारियों को टीबी रोग से बचाने के लिए यह निर्णय लिया है। जिला टीबी अस्पताल, 11 सीएचसी, 11 पीएचसी आदि पर काम करने वाले करीब 250 कर्मचारी टीबी का इलाज करने में लगे हैं। प्रतिदिन कर्मचारी अपने स्वास्थ्य की परवाह किए बिना सैकड़ों रोगियों के बलगम की जांच कर उन्हें टीबी होने या न होने की पुष्टि करते हैं। हालांकि कर्मचारी इस दौरान सुरक्षित तरीका अपनाकर मास्क और दस्ताने आदि का प्रयोग करते हैं। इसके बावजूद उन्हें टीबी रोग होने का खतरा बना रहता है। लोगों को स्वास्थ्य की सौगात देने वाले कर्मचारियों की अभी तक टीबी जांच करने का प्रावधान नहीं था। इस कारण कई कर्मचारियों की मौत हो जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। प्राइवेट खर्च पर ही कुछ कर्मचारी अपनी जांच करा लेते थे। लेकिन अब जांच सरकारी खर्च पर होगी। इसके अंतर्गत साल में दो बार अफसरों से लेकर चपरासी तक की टीबी जांच होगी। जनवरी में बलगम और जून में एक्सरे से जांच की जाएगी। जिससे कर्मचारी सुरक्षित रहकर रोगियों का इलाज कर सकें। जिला क्षय रोग अधिकारी बीएस रावत ने बताया कि ये शासन की अच्छी पहल है। कर्मचारी स्वास्थ्य हित को ध्यान में रखकर लिया गया शासन का यह निर्णय सराहना योग्य है। जिले में जनवरी 2019 से इसकी शुरुआत हो जाएगी।
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एक कर्मचारी की हो गई थी मौत
नजीबाबाद में टीबी यूनिट में काम करने वाले एक कर्मचारी की करीब दो साल पहले मौत हो गई थी। अफसरों के अनुसार रूटीन में होने वाली जांच के बाद ऐसा नहीं हो पाएगा। इससे कर्मचारी स्वस्थ रहकर रोगियों और अच्छे तरीके से उपचार कर सकेंगे।
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