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नकली मावा फैक्ट्री की सूचना पर मारा छापा, गांववासियों में मचा हड़कंप
Updated Thu, 25 Jan 2018 12:18 AM IST
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नकली मावा फैक्ट्री की सूचना पर मारा छापा
बिजनौर। नकली मावा फैक्ट्री की सूचना पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने गांव ज्ञानपुर में छापा मारकर मावा बनाने की तीन भट्टियां पकड़ीं। टीम ने मावे का नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया। हालांकि मौके पर कोई नकली मावा फैक्ट्री नहीं मिली।
नगीना के गांव ज्ञानपुर निवासी एक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री के पोर्टल पर शिकायत कर बताया कि गांव में नकली मावा बनाने की फैक्ट्री लगी हुई है। रोजाना रात के समय भट्टियों पर कई-कई क्विंटल मावा तैयार किया जाता है, और सुबह को बाजार में बेच दिया जाता है। खाद्य विभाग ने दो-तीन दिन तक गांव की रैकी कराई, इसके बाद पुलिस के साथ मंगलवार रात 09:00 बजे गांव में छापामारी की। टीम को मौके पर गांव निवासी भोलू, सईद, भगीरथ की मावा बनाने की भट्टियां मिलीं।
रात में पुलिस को देखकर गांव में हड़कंप मच गया। खाद्य विभाग की टीम ने तीनों के मावे का एक-एक नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया। अभिहित अधिकारी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि गुप्त तरीके से कार्रवाई की गई थी, ताकि छापामारी की सूचना लीक न हो सके। उन्होंने बताया कि मौके पर कोई नकली मावा तैयार करने की फैक्ट्री नहीं मिली। सिर्फ कुछ ग्रामीण दूध से मावा तैयार कर बाजार में बेचकर अपने परिवार का लालन-पालन करते हैं। टीम में सीएफएसओ जेपी सिंह, एफएसओ मौजूद रहे।
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बिजनौर। नकली मावा फैक्ट्री की सूचना पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने गांव ज्ञानपुर में छापा मारकर मावा बनाने की तीन भट्टियां पकड़ीं। टीम ने मावे का नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया। हालांकि मौके पर कोई नकली मावा फैक्ट्री नहीं मिली।
नगीना के गांव ज्ञानपुर निवासी एक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री के पोर्टल पर शिकायत कर बताया कि गांव में नकली मावा बनाने की फैक्ट्री लगी हुई है। रोजाना रात के समय भट्टियों पर कई-कई क्विंटल मावा तैयार किया जाता है, और सुबह को बाजार में बेच दिया जाता है। खाद्य विभाग ने दो-तीन दिन तक गांव की रैकी कराई, इसके बाद पुलिस के साथ मंगलवार रात 09:00 बजे गांव में छापामारी की। टीम को मौके पर गांव निवासी भोलू, सईद, भगीरथ की मावा बनाने की भट्टियां मिलीं।
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रात में पुलिस को देखकर गांव में हड़कंप मच गया। खाद्य विभाग की टीम ने तीनों के मावे का एक-एक नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया। अभिहित अधिकारी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि गुप्त तरीके से कार्रवाई की गई थी, ताकि छापामारी की सूचना लीक न हो सके। उन्होंने बताया कि मौके पर कोई नकली मावा तैयार करने की फैक्ट्री नहीं मिली। सिर्फ कुछ ग्रामीण दूध से मावा तैयार कर बाजार में बेचकर अपने परिवार का लालन-पालन करते हैं। टीम में सीएफएसओ जेपी सिंह, एफएसओ मौजूद रहे।
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