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ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव की जमानत याचिका निरस्त
Updated Fri, 05 Jan 2018 11:53 PM IST
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ग्रामप्रधान, सचिव की जमानत याचिका निरस्त
बिजनौर। प्रथम अपर जिला जज एवं सत्र न्यायाधीश राजीव शर्मा ने गबन के आरोपी ग्राम प्रधान और ग्रामपंचायत सचिव की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता हजूर मेंहदी जैदी के अनुसार ब्लाक नजीबाबाद के गांव नारायणपुर रतन के ग्राम प्रधान इफ्तेखार, सचिव ऋषिपाल ने गांव में 135 शौचालय बनाने के लिए 18 लाख 60 हजार रुपये विकास निधि से निकाले थे। ग्राम वालों की शिकायत पर जब सीडीओ की देखरेख में जांच हुई तो तो 55 शौचालय ही बने मिले। 80 शौचालय अधूरे पाए गए। किसी में सीट, किसी में टंकी तो किसी में किवाड़ नहीं थे। इस मामले में जांच में पाया गया कि शौचालय निर्माण में 11 लाख 56 हजार 728 रुपये का गबन प्रधान, सचिव ने मिलकर किया। जांच में यह भी पता चला कि तीन सीसी रोड भी मानक के अनुसार नहीं बनी थीं, उनमें भी गबन किया गया। एडीजीसी इसरार अली के मुताबिक इस घटना की ग्राम पंचायत अधिकारी प्रमोद कुमार ने दर्ज कराई थी। अदालत ने विकास के लिए आई धनराशि के गबन को गंभीर अपराध मानते हुए ग्राम प्रधान इफ्तेखार व पंचायत सचिव ऋषिपाल की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
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बिजनौर। प्रथम अपर जिला जज एवं सत्र न्यायाधीश राजीव शर्मा ने गबन के आरोपी ग्राम प्रधान और ग्रामपंचायत सचिव की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।
पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता हजूर मेंहदी जैदी के अनुसार ब्लाक नजीबाबाद के गांव नारायणपुर रतन के ग्राम प्रधान इफ्तेखार, सचिव ऋषिपाल ने गांव में 135 शौचालय बनाने के लिए 18 लाख 60 हजार रुपये विकास निधि से निकाले थे। ग्राम वालों की शिकायत पर जब सीडीओ की देखरेख में जांच हुई तो तो 55 शौचालय ही बने मिले। 80 शौचालय अधूरे पाए गए। किसी में सीट, किसी में टंकी तो किसी में किवाड़ नहीं थे। इस मामले में जांच में पाया गया कि शौचालय निर्माण में 11 लाख 56 हजार 728 रुपये का गबन प्रधान, सचिव ने मिलकर किया। जांच में यह भी पता चला कि तीन सीसी रोड भी मानक के अनुसार नहीं बनी थीं, उनमें भी गबन किया गया। एडीजीसी इसरार अली के मुताबिक इस घटना की ग्राम पंचायत अधिकारी प्रमोद कुमार ने दर्ज कराई थी। अदालत ने विकास के लिए आई धनराशि के गबन को गंभीर अपराध मानते हुए ग्राम प्रधान इफ्तेखार व पंचायत सचिव ऋषिपाल की जमानत याचिका निरस्त कर दी है।