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जुर्माना भरकर कैदियों को दिलाई आजादी
Updated Tue, 26 Dec 2017 12:30 AM IST
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बिजनौर। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर जिला कारागार में जुर्माना न भरा जाने पर सजा काटने को मजबूर सात कैदियों को जेल से सोमवार को रिहा कर दिया गया।
बिजनौर के जिला कारागार में नगीना देहात थाने के गांव जोगीरंपुरी निवासी रहमान का पुत्र शमशाद 23 अक्तूबर से चाकू रखने में, नांगल थाने के गांव दहीरपुर निवासी शमशाद पुत्र मोहम्मद अली 2011 से जानलेवा हमले व चाकू रखने में, बिहार के मोतीहारी निवासी सुरेश सिंह का पुत्र मुनेश 27 अक्तूबर से जीआरपी नजीबाबाद द्वारा चाकू रखने में, नजीबाबाद के गांव जलालाबाद निवासी मसूद का पुत्र मियां जान 12 अक्तूबर से जीआरपी नजीबाबाद द्वारा चाकू रखने, नेपाल निवासी लक्ष्मण सिंह के पुत्र भरत बहादुर को 17 सितंबर को नजीबाबाद पुलिस ने चाकू रखने, नजीबाबाद निवासी मुन्ना के पुत्र फिरोज को 26 सितंबर को पुलिस ने चाकू रखने, स्योहारा थाने के गांव गंगा खेड़ी निवासी सीताराम के पुत्र भोपाल को 11 सितंबर को चोरी के मामले में पुलिस ने चालान किया था। तभी से ये जेल में बंद थे। ये सभी कैदी अपने जुर्म की सजा तो काट चुके थे, पर जुर्माना नहीं भर पा रहे थे। जेल में उनकी मदद करने वाला भी कोई नहीं था। जुर्माने की रकम के लिए सलाखों के पीछे तरस रहे थे। पर कोई मददगार इन्हें नहीं मिल रहा था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर ऐसे बंदियों को रिहा करने का फैसला लिया गया। बिजनौर की किरतपुर रोड स्थित सामाजिक संस्था द दीनियत ट्रस्ट ऑफ एजुकेशन ने इनकी रिहाई के दस हजार 825 रुपये जेल में जमा किए। इन सभी कैदियों को सोमवार को रिहा कर दिया गया। रिहा होने पर ये सब कैदी बेहद खुश थे।
नहीं जुट रहे थे रिहाई के लिए 100 रुपये
जिला कारागार में बंद मोहम्मद अली के पुत्र शमशाद पर जानलेवा हमले का मामला चल रहा था। 23 अक्तूबर को शमशाद इस मामले में रिहा हो गया। चाकू रखने में तीन दिन की सजा व 100 रुपये का जुर्माना लगाया गया। पर यह रकम जमा करने में भी शमशाद बेबस था। तीन दिन की सजा सोमवार को शमशाद की पूरी हो रही थी। उसे भी आज इन बंदियों के साथ रिहा किया गया। रहमान के पुत्र शमशाद पर 700 रुपये, मुनेश पर 700, मियां जान पर 700, भरत बहादुर पर 500, फिरोज पर 500 व भोपाल पर तीन हजार रुपये का जुर्माना था। जुर्माने की रकम यह जमा नहीं कर पा रहे थे। जेल अधीक्षक आर के मिश्रा ने इनके रिहा होने की पुष्ठी की है
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बिजनौर के जिला कारागार में नगीना देहात थाने के गांव जोगीरंपुरी निवासी रहमान का पुत्र शमशाद 23 अक्तूबर से चाकू रखने में, नांगल थाने के गांव दहीरपुर निवासी शमशाद पुत्र मोहम्मद अली 2011 से जानलेवा हमले व चाकू रखने में, बिहार के मोतीहारी निवासी सुरेश सिंह का पुत्र मुनेश 27 अक्तूबर से जीआरपी नजीबाबाद द्वारा चाकू रखने में, नजीबाबाद के गांव जलालाबाद निवासी मसूद का पुत्र मियां जान 12 अक्तूबर से जीआरपी नजीबाबाद द्वारा चाकू रखने, नेपाल निवासी लक्ष्मण सिंह के पुत्र भरत बहादुर को 17 सितंबर को नजीबाबाद पुलिस ने चाकू रखने, नजीबाबाद निवासी मुन्ना के पुत्र फिरोज को 26 सितंबर को पुलिस ने चाकू रखने, स्योहारा थाने के गांव गंगा खेड़ी निवासी सीताराम के पुत्र भोपाल को 11 सितंबर को चोरी के मामले में पुलिस ने चालान किया था। तभी से ये जेल में बंद थे। ये सभी कैदी अपने जुर्म की सजा तो काट चुके थे, पर जुर्माना नहीं भर पा रहे थे। जेल में उनकी मदद करने वाला भी कोई नहीं था। जुर्माने की रकम के लिए सलाखों के पीछे तरस रहे थे। पर कोई मददगार इन्हें नहीं मिल रहा था। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर ऐसे बंदियों को रिहा करने का फैसला लिया गया। बिजनौर की किरतपुर रोड स्थित सामाजिक संस्था द दीनियत ट्रस्ट ऑफ एजुकेशन ने इनकी रिहाई के दस हजार 825 रुपये जेल में जमा किए। इन सभी कैदियों को सोमवार को रिहा कर दिया गया। रिहा होने पर ये सब कैदी बेहद खुश थे।
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नहीं जुट रहे थे रिहाई के लिए 100 रुपये
जिला कारागार में बंद मोहम्मद अली के पुत्र शमशाद पर जानलेवा हमले का मामला चल रहा था। 23 अक्तूबर को शमशाद इस मामले में रिहा हो गया। चाकू रखने में तीन दिन की सजा व 100 रुपये का जुर्माना लगाया गया। पर यह रकम जमा करने में भी शमशाद बेबस था। तीन दिन की सजा सोमवार को शमशाद की पूरी हो रही थी। उसे भी आज इन बंदियों के साथ रिहा किया गया। रहमान के पुत्र शमशाद पर 700 रुपये, मुनेश पर 700, मियां जान पर 700, भरत बहादुर पर 500, फिरोज पर 500 व भोपाल पर तीन हजार रुपये का जुर्माना था। जुर्माने की रकम यह जमा नहीं कर पा रहे थे। जेल अधीक्षक आर के मिश्रा ने इनके रिहा होने की पुष्ठी की है
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