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40 डिग्री पारा... गोद में बच्चा और धरने पर बैठीं आशा
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40 डिग्री पारा... गोद में बच्चा और धरने पर बैठीं आशा
बिजनौर। जिले में करीब तीन हजार आशा हैं, लेकिन पांच महीने से मानदेय न मिलने से निराश है। स्वास्थ्य विभाग ने डाटा ऑनलाइन के बहाने इन आशाओं को मानदेय ही जारी नहीं किया। इस मानदेय को पाने के लिए बच्चों को साथ लेकर 40 डिग्री तापमान में ये आशाएं कलक्ट्रेट पहुंचीं। वहां प्रदर्शन किया और मानदेय की मांग की। स्वास्थ्य अधिकारी पहुंचे और फिर इन्हें आश्वासन की आस दे दी गई। एक आशा का करीब चार हजार रुपये मानदेय प्रतिमाह का चल रहा है। ऐसे में आशाओं ने 12 जून तक मानदेय न मिलने पर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दे दी।
जिले में 3039 आशाएं हैं। इन आशाओं का पांच महीने से मानदेय नहीं है। मानदेय के लिए आशाएं कई बार सीएमओ ऑफिस के चक्कर काट चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है, जिसके बाद आशा और आशा संगिनियों ने धरना-प्रदर्शन का रास्ता चुना। एक तरफ जहां बढ़ते तापमान के बीच लोगों का बुरा हाल है, वहीं दूसरी ओर आशाओं के साथ कड़कड़ाती धूप में उनके बच्चे भी उनके साथ दिखाई दिए। काम करने के बाद भी आशाओं को उनका मानदेय नहीं मिला है। सीएमओ के नाम ज्ञापन में आशाओं ने लिखा कि उनका दो वर्ष से कुष्ठ रोग का पैसा नहीं मिला है। एचबीएनसी विजिट और परिवार नियोजन का पैसा नहीं मिला है। इसके साथ ही दो वर्ष का कोविड का पैसा नहीं मिला है। धरना-प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद कलक्ट्रेट में एसीएमओ डॉ. पीआर नायर मौके पर पहुंचे और आशाओं से बात की। जिसके बाद एसीएमओ डॉ. पीआर नायर ने आशाओं को 12 जून तक सभी का मानदेय खाते में पहुंचने का आश्वासन दिया। साथ ही कहा कि अगर 12 जून तक खातों में पैसा नहीं जाता है तो सभी आशा सीएमओ ऑफिस में आकर धरना दें, जिसके बाद धरना प्रदर्शन खत्म हुआ।
जिले में आशाओं का 4,86,24,000 रुपये बकाया
जिले में 3039 आशा हैं। प्रत्येक आशा को औसतन चार हजार रुपये हर महीने मानदेय मिलता है। लेकिन पांच महीने से कोई मानदेय नहीं मिला है। जिसके चलते जिले आशाओं का 4,86,24,000 रुपये बकाया है। जनवरी से मई तक का मानदेय आशाओं के खाते में नहीं पहुंचा है।
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पोर्टल की वजह से पैसा पहुंचने में हो रही देरी : डीसीपीएम
डीसीपीएम पूनम रानी ने बताया कि अब आशाओं के खातों को पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। जिसके चलते उनके मानदेय में देरी हुई है। पोर्टल पर आशाओं का नाम चढ़ते ही उनके खातों में पैसा पहुंच जाएगा।
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बिजनौर। जिले में करीब तीन हजार आशा हैं, लेकिन पांच महीने से मानदेय न मिलने से निराश है। स्वास्थ्य विभाग ने डाटा ऑनलाइन के बहाने इन आशाओं को मानदेय ही जारी नहीं किया। इस मानदेय को पाने के लिए बच्चों को साथ लेकर 40 डिग्री तापमान में ये आशाएं कलक्ट्रेट पहुंचीं। वहां प्रदर्शन किया और मानदेय की मांग की। स्वास्थ्य अधिकारी पहुंचे और फिर इन्हें आश्वासन की आस दे दी गई। एक आशा का करीब चार हजार रुपये मानदेय प्रतिमाह का चल रहा है। ऐसे में आशाओं ने 12 जून तक मानदेय न मिलने पर अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दे दी।
जिले में 3039 आशाएं हैं। इन आशाओं का पांच महीने से मानदेय नहीं है। मानदेय के लिए आशाएं कई बार सीएमओ ऑफिस के चक्कर काट चुकी हैं, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है, जिसके बाद आशा और आशा संगिनियों ने धरना-प्रदर्शन का रास्ता चुना। एक तरफ जहां बढ़ते तापमान के बीच लोगों का बुरा हाल है, वहीं दूसरी ओर आशाओं के साथ कड़कड़ाती धूप में उनके बच्चे भी उनके साथ दिखाई दिए। काम करने के बाद भी आशाओं को उनका मानदेय नहीं मिला है। सीएमओ के नाम ज्ञापन में आशाओं ने लिखा कि उनका दो वर्ष से कुष्ठ रोग का पैसा नहीं मिला है। एचबीएनसी विजिट और परिवार नियोजन का पैसा नहीं मिला है। इसके साथ ही दो वर्ष का कोविड का पैसा नहीं मिला है। धरना-प्रदर्शन की जानकारी मिलने के बाद कलक्ट्रेट में एसीएमओ डॉ. पीआर नायर मौके पर पहुंचे और आशाओं से बात की। जिसके बाद एसीएमओ डॉ. पीआर नायर ने आशाओं को 12 जून तक सभी का मानदेय खाते में पहुंचने का आश्वासन दिया। साथ ही कहा कि अगर 12 जून तक खातों में पैसा नहीं जाता है तो सभी आशा सीएमओ ऑफिस में आकर धरना दें, जिसके बाद धरना प्रदर्शन खत्म हुआ।
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जिले में आशाओं का 4,86,24,000 रुपये बकाया
जिले में 3039 आशा हैं। प्रत्येक आशा को औसतन चार हजार रुपये हर महीने मानदेय मिलता है। लेकिन पांच महीने से कोई मानदेय नहीं मिला है। जिसके चलते जिले आशाओं का 4,86,24,000 रुपये बकाया है। जनवरी से मई तक का मानदेय आशाओं के खाते में नहीं पहुंचा है।
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पोर्टल की वजह से पैसा पहुंचने में हो रही देरी : डीसीपीएम
डीसीपीएम पूनम रानी ने बताया कि अब आशाओं के खातों को पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। जिसके चलते उनके मानदेय में देरी हुई है। पोर्टल पर आशाओं का नाम चढ़ते ही उनके खातों में पैसा पहुंच जाएगा।

बिजनौर कलक्ट्रेट में एसीएमओ डॉ. पीआर नायर का घेराव करती आशा कार्यकत्री।- फोटो : BIJNOR