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तन पर मावस का पहरा है, मन तो पूर्णमासी है : हुक्का बिजनौरी
Updated Mon, 18 Jun 2018 12:13 AM IST
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बिजनौर। तन पर मावस का पहरा है, मन तो पूर्णमासी है। तन तो बंदी राजमहल में, मन लेकिन बनवासी है। ये पंक्तियां प्रसिद्ध हास्य व्यंग्य कवि हुक्का बिजनौरी ने सुनाकर सबको गुदगुदाया।
हुक्का बिजनौरी अखिल भारतीय साहित्य संघ के तत्वावधान में वर्धमान कॉलेज के भूगोल विभाग के प्रोफेसर डा. अजय राणा के सिविल लाइन स्थित आवास पर आयोजित गोष्ठी में काव्य पाठ कर रहे थे। शुभारंभ कवयित्री सुमन चौधरी सुमन ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित करके किया। उन्होंने कहा कि ‘पानी बिका, मिट्टी बिकी, अब हवा की बारी है। ऐसे हुआ विकास अब आसमां की बारी है’। हिंदी विभागाध्यक्ष डा. ओपी सिंह ने कहा कि ‘जब आप सही को सही नहीं कह सकते, गलत को गलत नहीं कह सकते तो समझिए कि आपका वजूद खतरे में है’। ओमप्रकाश परमार ने अपनी कविता कुछ इस अंदाज में रखी ‘मद में अंधे लोग जब करते पत्थर प्रयोग, बन जाता हथियार यह, जब आपा खोते लोग’। जगदीश चंद्र वर्मा निरपेक्ष यूं बोले ‘बन जाएगी अशुद्ध आत्मा, जिस हर इंसान की मोहब्बत ही दिखेगी तब, हर दिल में हिंदुस्तान की’। इसी श्रृंखला में डा. गजेंद्र बटोही ने जल के दुरुपयोग से सावधान किया कि ‘रंग, गंध न स्वाद है, जल को अमृत मान, अगर जल प्रदूषित हो गया तो बचे न फिर यह जान’। बुलंदशहर से आए मुख्य अतिथि कवि अक्षय प्रताप सिंह ने कहा कि ‘मेरे देश की माता को लोहा मानता विश्व, हम मां है एक संस्थान तो सीता बन जाए। वे अक्षय हम जननी की पूजा नित्य करें, हम जो भी गीत लिखें, गीता बन जाए’। गोष्ठी के अंत में साहित्यिक गतिविधियों पर भी चर्चा की गई।
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हुक्का बिजनौरी अखिल भारतीय साहित्य संघ के तत्वावधान में वर्धमान कॉलेज के भूगोल विभाग के प्रोफेसर डा. अजय राणा के सिविल लाइन स्थित आवास पर आयोजित गोष्ठी में काव्य पाठ कर रहे थे। शुभारंभ कवयित्री सुमन चौधरी सुमन ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित करके किया। उन्होंने कहा कि ‘पानी बिका, मिट्टी बिकी, अब हवा की बारी है। ऐसे हुआ विकास अब आसमां की बारी है’। हिंदी विभागाध्यक्ष डा. ओपी सिंह ने कहा कि ‘जब आप सही को सही नहीं कह सकते, गलत को गलत नहीं कह सकते तो समझिए कि आपका वजूद खतरे में है’। ओमप्रकाश परमार ने अपनी कविता कुछ इस अंदाज में रखी ‘मद में अंधे लोग जब करते पत्थर प्रयोग, बन जाता हथियार यह, जब आपा खोते लोग’। जगदीश चंद्र वर्मा निरपेक्ष यूं बोले ‘बन जाएगी अशुद्ध आत्मा, जिस हर इंसान की मोहब्बत ही दिखेगी तब, हर दिल में हिंदुस्तान की’। इसी श्रृंखला में डा. गजेंद्र बटोही ने जल के दुरुपयोग से सावधान किया कि ‘रंग, गंध न स्वाद है, जल को अमृत मान, अगर जल प्रदूषित हो गया तो बचे न फिर यह जान’। बुलंदशहर से आए मुख्य अतिथि कवि अक्षय प्रताप सिंह ने कहा कि ‘मेरे देश की माता को लोहा मानता विश्व, हम मां है एक संस्थान तो सीता बन जाए। वे अक्षय हम जननी की पूजा नित्य करें, हम जो भी गीत लिखें, गीता बन जाए’। गोष्ठी के अंत में साहित्यिक गतिविधियों पर भी चर्चा की गई।
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