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अब तक 24 हजार 874 लोगों को मिला आयुष्मान का सहारा
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जिले में 24874 को मिला आयुष्मान का सहारा
बिजनौर। जिले में अब तक लगभग 24 हजार 874 लोगों ने जनपद और बाहर के अस्पतालों में गोल्डन कार्ड से अपना इलाज कराया है। कोरोना काल में जरूरतमंदों के लिए यह कार्ड संजीवनी बना। विभिन्न बीमारियों से पीड़ित मरीजों को इस कार्ड से जीवनदान मिला है।
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड राज्य की राजधानी रांची से की थी। इसके अंतर्गत वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार इस योजना में शामिल हुए परिवार को पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। परिवार के हर सदस्य का अलग गोल्डन कार्ड बनाया जाता है। व्यक्तिगत कार्ड के आधार पर ही संबंधित मरीज का सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचार किया जाता है।
जनपद में सरकारी अस्पतालों से लेकर लगभग दो दर्जन निजी अस्पतालों को भी आयुष्यमान कार्ड योजना के तहत गरीब लोगों को इलाज देने की सुविधा की गई है। मार्च से पहले तक जिला अस्पताल में इस सुविधा का लोग काफी लाभ ले रहे थे, लेकिन इस कोरोना काल में ऐसे मरीजों की अचानक कमी पड़ गई है। यहां तक मरीजों की संख्या काफी कम हो गई।
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14 लाख 8733 सदस्य हैं योजना में शामिल
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की जिला कोअर्डिनेटर डा. नताशा सिंह के अनुसार जनपद में इस योजना के अंतर्गत दो लाख 90 हजार 396 परिवारों को जोड़ा गया है। जिनमें 14 लाख 8733 सदस्य हैं। सरकार के मानकों के अनुसार एक परिवार के पांच लोगों को लिया गया है। उन्होंने बताया कि सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में अब तक लगभग 24 हजार 874 मरीज इलाज करा चुके हैं। कोरोना काल में भी उनकी टीम द्वारा जनपद में लोगों को गोल्डन कार्ड बना कर दिया गए हैं।
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बिजनौर। जिले में अब तक लगभग 24 हजार 874 लोगों ने जनपद और बाहर के अस्पतालों में गोल्डन कार्ड से अपना इलाज कराया है। कोरोना काल में जरूरतमंदों के लिए यह कार्ड संजीवनी बना। विभिन्न बीमारियों से पीड़ित मरीजों को इस कार्ड से जीवनदान मिला है।
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत योजना की शुरुआत 23 सितंबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड राज्य की राजधानी रांची से की थी। इसके अंतर्गत वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार इस योजना में शामिल हुए परिवार को पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिलती है। परिवार के हर सदस्य का अलग गोल्डन कार्ड बनाया जाता है। व्यक्तिगत कार्ड के आधार पर ही संबंधित मरीज का सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचार किया जाता है।
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जनपद में सरकारी अस्पतालों से लेकर लगभग दो दर्जन निजी अस्पतालों को भी आयुष्यमान कार्ड योजना के तहत गरीब लोगों को इलाज देने की सुविधा की गई है। मार्च से पहले तक जिला अस्पताल में इस सुविधा का लोग काफी लाभ ले रहे थे, लेकिन इस कोरोना काल में ऐसे मरीजों की अचानक कमी पड़ गई है। यहां तक मरीजों की संख्या काफी कम हो गई।
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14 लाख 8733 सदस्य हैं योजना में शामिल
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना की जिला कोअर्डिनेटर डा. नताशा सिंह के अनुसार जनपद में इस योजना के अंतर्गत दो लाख 90 हजार 396 परिवारों को जोड़ा गया है। जिनमें 14 लाख 8733 सदस्य हैं। सरकार के मानकों के अनुसार एक परिवार के पांच लोगों को लिया गया है। उन्होंने बताया कि सरकारी और प्राइवेट संस्थानों में अब तक लगभग 24 हजार 874 मरीज इलाज करा चुके हैं। कोरोना काल में भी उनकी टीम द्वारा जनपद में लोगों को गोल्डन कार्ड बना कर दिया गए हैं।