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Bijnor News: जिले में खुलेंगे 22 फार्मर स्कूल, खेत ही बनेंगे क्लासरूम
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- वैज्ञानिकों और कृषि अधिकारियों से सीखेंगे आधुनिक खेती के गुर
- धान की फसल के 440 प्रदर्शन प्लॉटों पर मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। धान उत्पादन बढ़ाने और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए कृषि विभाग इस खरीफ सीजन में जिले में 22 धान फार्मर स्कूल शुरू करेगा। इन स्कूलों में किसान विद्यार्थी होंगे, जबकि कृषि वैज्ञानिक और विभागीय अधिकारी शिक्षक की भूमिका निभाएंगे। प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती की ऐसी जानकारी दी जाएगी, जिससे उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत भी कम की जा सके।
जिले के सभी 11 विकास खंडों में दो-दो फार्मर स्कूल स्थापित किए जाएंगे। इन स्कूलों की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि किसानों को केवल कक्षा में बैठाकर जानकारी नहीं दी जाएगी, बल्कि खेतों में ले जाकर खेती की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी कराया जाएगा। बीज चयन से लेकर नर्सरी तैयार करने, रोपाई, पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा कटाई तक की सभी तकनीकों को चरणबद्ध तरीके से समझाया जाएगा।
- 30 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल होगी धान रोपाई
कृषि विभाग के अनुसार बिजनौर गन्ना उत्पादन के लिए प्रदेश के प्रमुख जनपदों में शामिल हैं, जहां करीब 2.55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है। इसके अलावा लगभग 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है। इस वर्ष धान का रकबा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है और विभाग ने करीब 88 हजार मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
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- 440 प्रदर्शन प्लॉट बनेंगे किसानों के लिए मॉडल
फार्मर स्कूलों के साथ जिले में 440 धान प्रदर्शन प्लॉट भी तैयार किए जाएंगे। प्रत्येक विकास खंड में 44-44 प्लॉट विकसित होंगे। इन प्लॉटों पर वैज्ञानिकों की निगरानी में उन्नत तकनीकों से धान की खेती की जाएगी। आसपास के गांवों के किसानों को नियमित रूप से यहां भ्रमण कराया जाएगा, ताकि वे खेत पर ही नई तकनीकों के परिणाम देख सकें और उन्हें अपने खेतों में अपनाने के लिए प्रेरित हों।
-वर्जन
जिले में 22 धान फार्मर स्कूल और 440 प्रदर्शन प्लॉट तैयार किए जाएंगे। किसानों को सैद्धांतिक के साथ-साथ खेतों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। रोपाई से लेकर फसल पकने तक विभिन्न चरणों में उनका भ्रमण कराया जाएगा, ताकि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। -डॉ. घनश्याम वर्मा उप कृषि निदेशक बिजनौर
-- धान फार्मर स्कूलों से किसानों को होंगे ये फायदे
उन्नत एवं प्रमाणित बीजों की जानकारी
कम लागत में अधिक उत्पादन की तकनीक
वैज्ञानिक ढंग से रोपाई और पोषक तत्व प्रबंधन- कीट एवं रोग नियंत्रण के आधुनिक उपाय
जल संरक्षण और संसाधनों का बेहतर उपयोग
मौसम आधारित खेती की जानकारी
खेत पर व्यावहारिक प्रशिक्षण और प्रदर्शन
उत्पादन बढ़ाकर आय में वृद्धि की संभावना
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- धान की फसल के 440 प्रदर्शन प्लॉटों पर मिलेगा व्यावहारिक प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। धान उत्पादन बढ़ाने और किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए कृषि विभाग इस खरीफ सीजन में जिले में 22 धान फार्मर स्कूल शुरू करेगा। इन स्कूलों में किसान विद्यार्थी होंगे, जबकि कृषि वैज्ञानिक और विभागीय अधिकारी शिक्षक की भूमिका निभाएंगे। प्रशिक्षण के माध्यम से किसानों को उन्नत एवं वैज्ञानिक खेती की ऐसी जानकारी दी जाएगी, जिससे उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत भी कम की जा सके।
जिले के सभी 11 विकास खंडों में दो-दो फार्मर स्कूल स्थापित किए जाएंगे। इन स्कूलों की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि किसानों को केवल कक्षा में बैठाकर जानकारी नहीं दी जाएगी, बल्कि खेतों में ले जाकर खेती की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी कराया जाएगा। बीज चयन से लेकर नर्सरी तैयार करने, रोपाई, पोषक तत्व प्रबंधन, कीट एवं रोग नियंत्रण तथा कटाई तक की सभी तकनीकों को चरणबद्ध तरीके से समझाया जाएगा।
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- 30 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल होगी धान रोपाई
कृषि विभाग के अनुसार बिजनौर गन्ना उत्पादन के लिए प्रदेश के प्रमुख जनपदों में शामिल हैं, जहां करीब 2.55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है। इसके अलावा लगभग 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की जाती है। इस वर्ष धान का रकबा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है और विभाग ने करीब 88 हजार मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
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- 440 प्रदर्शन प्लॉट बनेंगे किसानों के लिए मॉडल
फार्मर स्कूलों के साथ जिले में 440 धान प्रदर्शन प्लॉट भी तैयार किए जाएंगे। प्रत्येक विकास खंड में 44-44 प्लॉट विकसित होंगे। इन प्लॉटों पर वैज्ञानिकों की निगरानी में उन्नत तकनीकों से धान की खेती की जाएगी। आसपास के गांवों के किसानों को नियमित रूप से यहां भ्रमण कराया जाएगा, ताकि वे खेत पर ही नई तकनीकों के परिणाम देख सकें और उन्हें अपने खेतों में अपनाने के लिए प्रेरित हों।
-वर्जन
जिले में 22 धान फार्मर स्कूल और 440 प्रदर्शन प्लॉट तैयार किए जाएंगे। किसानों को सैद्धांतिक के साथ-साथ खेतों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। रोपाई से लेकर फसल पकने तक विभिन्न चरणों में उनका भ्रमण कराया जाएगा, ताकि वे आधुनिक तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। -डॉ. घनश्याम वर्मा उप कृषि निदेशक बिजनौर
उन्नत एवं प्रमाणित बीजों की जानकारी
कम लागत में अधिक उत्पादन की तकनीक
वैज्ञानिक ढंग से रोपाई और पोषक तत्व प्रबंधन- कीट एवं रोग नियंत्रण के आधुनिक उपाय
जल संरक्षण और संसाधनों का बेहतर उपयोग
मौसम आधारित खेती की जानकारी
खेत पर व्यावहारिक प्रशिक्षण और प्रदर्शन
उत्पादन बढ़ाकर आय में वृद्धि की संभावना