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सक्रिय क्षय रोग खोज कार्यक्रम में मिले 101 नए टीबी के रोगी
Updated Tue, 09 Jan 2018 12:21 AM IST
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जिले में टीबी के 101 नए रोगी मिले
बिजनौर।
सक्रिय क्षय रोग खोज कार्यक्रम (एसीएफ) में मात्र 11 दिन में 101 नए टीबी के रोगियों की खोज की गई है। सबसे अधिक 24 मरीज जिला मुख्यालय पर मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी रोगियों का उपचार शुरू कर दिया है।
जिले में टीबी के मरीजों को खोजने के लिए 26 दिसंबर 2017 से सक्रिय क्षय रोग खोज कार्यक्रम शुरू हुआ था। कार्यक्रम पांच जनवरी 2018 तक चला। स्वास्थ्य विभाग ने कार्यक्रम में 205 टीमें लगाई थीं। टीमों ने धामपुर, हल्दौर, किरतपुर, मंडावर, नगीना, नहटौर, नूरपुर, कोतवाली देहात, नजीबाबाद, मंडावली, स्याऊ, जिला मुख्यालय पर टीबी के 101 मरीजों की खोज की। इस दौरान टीमें कुल पांच लाख बीस हजार दो सौ चार लोगों से मिलीं। टीमों ने पांच लाख बीस हजार दो सौ चार लोगों में से टीबी के लक्षण मिलने पर 4,490 लोगों की जांच कराई। जांच के बाद मात्र 101 नए मरीज मिले हैं। कार्यक्रम में टीमों ने रोजाना जिले को रिपोर्ट दी और जिला मुख्यालय से शासन को रिपोर्ट भेजी गई। जिला क्षय अधिकारी डॉ. बीएस रावत ने बताया कि शासन की मंशा है कि पूरे देश को टीबी की बीमारी से मुक्त किया जाए। एसीएफ पूरे पांच साल तक चलेगा और टीबी के मरीजों की खोज की जाएगी।
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बिजनौर।
सक्रिय क्षय रोग खोज कार्यक्रम (एसीएफ) में मात्र 11 दिन में 101 नए टीबी के रोगियों की खोज की गई है। सबसे अधिक 24 मरीज जिला मुख्यालय पर मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने सभी रोगियों का उपचार शुरू कर दिया है।
जिले में टीबी के मरीजों को खोजने के लिए 26 दिसंबर 2017 से सक्रिय क्षय रोग खोज कार्यक्रम शुरू हुआ था। कार्यक्रम पांच जनवरी 2018 तक चला। स्वास्थ्य विभाग ने कार्यक्रम में 205 टीमें लगाई थीं। टीमों ने धामपुर, हल्दौर, किरतपुर, मंडावर, नगीना, नहटौर, नूरपुर, कोतवाली देहात, नजीबाबाद, मंडावली, स्याऊ, जिला मुख्यालय पर टीबी के 101 मरीजों की खोज की। इस दौरान टीमें कुल पांच लाख बीस हजार दो सौ चार लोगों से मिलीं। टीमों ने पांच लाख बीस हजार दो सौ चार लोगों में से टीबी के लक्षण मिलने पर 4,490 लोगों की जांच कराई। जांच के बाद मात्र 101 नए मरीज मिले हैं। कार्यक्रम में टीमों ने रोजाना जिले को रिपोर्ट दी और जिला मुख्यालय से शासन को रिपोर्ट भेजी गई। जिला क्षय अधिकारी डॉ. बीएस रावत ने बताया कि शासन की मंशा है कि पूरे देश को टीबी की बीमारी से मुक्त किया जाए। एसीएफ पूरे पांच साल तक चलेगा और टीबी के मरीजों की खोज की जाएगी।
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