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ड्रिप और स्प्रिंकलर विधि से सिंचाई को मिलेगा बढ़ावा
Updated Wed, 02 Aug 2017 11:50 PM IST
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बिजनौर। पानी की बचत और बंजर जमीन में खेती को बढ़ावा देने के लिए सिंचाई की ड्रिप और स्प्रिंकलर विधि की सब्सिडी में बढ़ोतरी की गई है। दोनों विधियों पर अब 90 प्रतिशत तक सब्सिडी मिलेगी। इसके अलावा इन दोनों विधियों की राशि में भी बढ़ोतरी की गई है।
ड्रिप विधि में खेतों में पाइप बिछाकर सिंचाई की जाती है। इस विधि में पाइप के पास छिद्र होते हैं, जिनसे बूंद बूंद में रिसकर पानी फसलों की जड़ों में पहुंचता है। इन पाइपों में नलकूप के कनेक्शन से पानी जाता है। केवल आधे घंटे की बिजली आने पर भी एक हेक्टेअर जमीन की सिंचाई की जा सकती है। इसके अलावा स्प्रिंकलर विधि में खेतों में पाइप बिछाकर एक पाइप जमीन से ऊंचा उठाकर पानी की बौछार की तरह फसलों की सिंचाई की जाती है। इस विधि से फसल की पत्तियां भी धुलने से पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया अधिक करते हैं, जिससे उत्पादन में भी 50 प्रतिशत की वृद्धि होती है। सब्जी, फूलों और फलों की फसल में इस विधि से सिंचाई करने पर अलग अलग लागत आती है। पिछले साल दो हेक्टेअर से कम जमीन वाले किसान को 67 प्रतिशत और अधिक जमीन वाले किसान को 56 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती थी। इस साल दो हेक्टेअर जमीन वाले किसान को 90 प्रतिशत और इससे अधिक जमीन वाले किसान को 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा पिछले साल इन विधियों के सेट की कीमत एक लाख रुपये तक थी, जो अब बढ़ाकर एक लाख 15 हजार रुपये कर दी गई है। हालांकि सेट की कीमत बढ़ने से किसानों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
जिला उद्यान निरीक्षक नरपाल मलिक के अनुसार दोनों विधियों से सिंचाई करने में पानी की बचत होती है। ऊंचे-नीचे खेत में सिंचाई करने में भी यह दोनों विधि बहुत कारगर हैं।
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ड्रिप विधि में खेतों में पाइप बिछाकर सिंचाई की जाती है। इस विधि में पाइप के पास छिद्र होते हैं, जिनसे बूंद बूंद में रिसकर पानी फसलों की जड़ों में पहुंचता है। इन पाइपों में नलकूप के कनेक्शन से पानी जाता है। केवल आधे घंटे की बिजली आने पर भी एक हेक्टेअर जमीन की सिंचाई की जा सकती है। इसके अलावा स्प्रिंकलर विधि में खेतों में पाइप बिछाकर एक पाइप जमीन से ऊंचा उठाकर पानी की बौछार की तरह फसलों की सिंचाई की जाती है। इस विधि से फसल की पत्तियां भी धुलने से पौधे प्रकाश संश्लेषण की क्रिया अधिक करते हैं, जिससे उत्पादन में भी 50 प्रतिशत की वृद्धि होती है। सब्जी, फूलों और फलों की फसल में इस विधि से सिंचाई करने पर अलग अलग लागत आती है। पिछले साल दो हेक्टेअर से कम जमीन वाले किसान को 67 प्रतिशत और अधिक जमीन वाले किसान को 56 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती थी। इस साल दो हेक्टेअर जमीन वाले किसान को 90 प्रतिशत और इससे अधिक जमीन वाले किसान को 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा पिछले साल इन विधियों के सेट की कीमत एक लाख रुपये तक थी, जो अब बढ़ाकर एक लाख 15 हजार रुपये कर दी गई है। हालांकि सेट की कीमत बढ़ने से किसानों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।
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जिला उद्यान निरीक्षक नरपाल मलिक के अनुसार दोनों विधियों से सिंचाई करने में पानी की बचत होती है। ऊंचे-नीचे खेत में सिंचाई करने में भी यह दोनों विधि बहुत कारगर हैं।
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