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ऋण की वसूली के लिए पीएनबी की गांधीगिरी
Updated Sat, 24 Jun 2017 12:43 AM IST
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ऋण वसूली के लिए पीएनबी की गांधीगीरी
बिजनौर। ऋण वसूली के लिए पीएनबी ने अब गांधीगिरी शुरू कर दी है। बैंक कर्मचारियों ने लंबे समय से ऋण जमा न करने वाले उपभोक्ताओं के आवास या प्रतिष्ठानों के बाहर कुछ देर के लिए धरना देना शुरू कर दिया है। इस दौरान कर्मचारियों के हाथ में नारे लिखे बैनर भी होते हैं। अधिकारियों को गांधीगीरी से ऋण वसूली में तेजी आने की उम्मीद है।
जिले के बैंक उपभोक्ताओं पर करीब सात हजार करोड़ का ऋण है। इनमें से किसानों पर करीब सवा चार हजार करोड़ का ऋण है। बाकी ऋण हाउस लोन, व्यापार, व्हीकल लोन आदि के लिए दिया जाता है। जिले के 85 प्रतिशत से अधिक किसान समय से अपना ऋण जमा कर देते हैं। बैंकों का ज्यादातर फोकस भी किसानों पर ही रहता है। हाउस लोन व व्यापार के लिए लिया गया ऋण जिले के काफी उपभोक्ता समय से जमा नहीं कर रहे हैं। पीएनबी का भी ऐसा 50 करोड़ से अधिक का ऋण उपभोक्ताओं पर है। बैंक द्वारा काफी प्रयास के बाद भी उपभोक्ता ऋण जमा नहीं कर रहे हैं। ऐसे उपभोक्ताओं से ऋण वसूली के लिए पीएनबी ने गांधीगीरी शुरू की है। बैंक कर्मचारी ऋण जमा न करने वाले उपभोक्ताओं के घर या प्रतिष्ठान के बाहर कुछ देर के लिए खड़े होते हैं। इस दौरान कर्मचारियों के हाथ में बैंक के रुपये जमा करने संबंधी नारे लिखी तख्ती भी होती है। बैंक अधिकारियों का मानना है कि ऋण का मामला इस तरह से सार्वजनिक होने पर उपभोक्ताओं पर ऋण जमा करने के लिए दबाव बनेगा। जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक अजय कुमार के अनुसार ऋण वसूली के लिए गांधीगीरी का फार्मूला निकाला है। उपभोक्ता समय से ऋण जमा करेंगे तो बैंकों को भी और ऋण देने में आसानी होगी।
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बिजनौर। ऋण वसूली के लिए पीएनबी ने अब गांधीगिरी शुरू कर दी है। बैंक कर्मचारियों ने लंबे समय से ऋण जमा न करने वाले उपभोक्ताओं के आवास या प्रतिष्ठानों के बाहर कुछ देर के लिए धरना देना शुरू कर दिया है। इस दौरान कर्मचारियों के हाथ में नारे लिखे बैनर भी होते हैं। अधिकारियों को गांधीगीरी से ऋण वसूली में तेजी आने की उम्मीद है।
जिले के बैंक उपभोक्ताओं पर करीब सात हजार करोड़ का ऋण है। इनमें से किसानों पर करीब सवा चार हजार करोड़ का ऋण है। बाकी ऋण हाउस लोन, व्यापार, व्हीकल लोन आदि के लिए दिया जाता है। जिले के 85 प्रतिशत से अधिक किसान समय से अपना ऋण जमा कर देते हैं। बैंकों का ज्यादातर फोकस भी किसानों पर ही रहता है। हाउस लोन व व्यापार के लिए लिया गया ऋण जिले के काफी उपभोक्ता समय से जमा नहीं कर रहे हैं। पीएनबी का भी ऐसा 50 करोड़ से अधिक का ऋण उपभोक्ताओं पर है। बैंक द्वारा काफी प्रयास के बाद भी उपभोक्ता ऋण जमा नहीं कर रहे हैं। ऐसे उपभोक्ताओं से ऋण वसूली के लिए पीएनबी ने गांधीगीरी शुरू की है। बैंक कर्मचारी ऋण जमा न करने वाले उपभोक्ताओं के घर या प्रतिष्ठान के बाहर कुछ देर के लिए खड़े होते हैं। इस दौरान कर्मचारियों के हाथ में बैंक के रुपये जमा करने संबंधी नारे लिखी तख्ती भी होती है। बैंक अधिकारियों का मानना है कि ऋण का मामला इस तरह से सार्वजनिक होने पर उपभोक्ताओं पर ऋण जमा करने के लिए दबाव बनेगा। जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक अजय कुमार के अनुसार ऋण वसूली के लिए गांधीगीरी का फार्मूला निकाला है। उपभोक्ता समय से ऋण जमा करेंगे तो बैंकों को भी और ऋण देने में आसानी होगी।
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