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स्वयं सहायता समूहों की महिला
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स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं परोसेंगी भोजन
बिजनौर। कुपोषण को खत्म करने के साथ-साथ रोजगार भी मुहैया कराने के लिए शासन ने पहल की है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर अब स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं नौनिहालों को भोजन परोसेंगी। शासन ने 21 जिलों में इसकी व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। इससे महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा और हॉट की गुणवत्ता भी सुधरेगी।
कुपोषण के खिलाफ शासन द्वारा बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। अतिकुपोषित नौनिहालों, किशोरियों व गर्भवती महिलाओं को चिह्नित किया जा रहा है। तीन से छह साल तक के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर हॉट कुक दिया जाता था। केंद्रों पर पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका भोजन बनाती थीं, लेकिन बाद में केंद्रों को परिषदीय स्कूलों के मिड-डे मील से जोड़ दिया गया। शासन द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों में मिड-डे मील बनाने की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को दी जा रही है। शासन का मानना है कि केंद्रों पर आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों की माता भी किसी न किसी स्वयं सहायता समूह की सदस्य जरूर होंगी। उनके केंद्रों से जुड़ने से भोजन की गुणवत्ता सुधरेगी। इसके अलावा हर गांव में एक दो महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग निदेशक शत्रुघ्न सिंह ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। शुरुआत में 21 जिलों को इस योजना में शामिल किया गया है। जिले में भी करीब 2800 आंगनबाड़ी केंद्र गांवों में ही हैं।
ये जिले हुए शामिल
योजना में आगरा, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, मऊ, प्रयागराज, कानपुर नगर, बरेली, मुरादाबाद, अमरोहा, रामपुर, बिजनौर, संभल, मेरठ, गौतमबुद्धनगर, बागपत, लखनऊ, लखीमपुर खीरी, चंदौली, सहारनपुर व शामली को शामिल किया गया है। इन जिलों में 24 हजार 710 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं।
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पहले ये थी व्यवस्था
पहले आंगनबाड़ी केंद्र पर आने वाले हर बच्चे की एक दिन की खुराक के लिए साढ़े चार रुपये निर्धारित थे। इनमें खाद्यान्न के लिए सवा दो रुपये, रसोइया व आंगनबाड़ी सहायिका का पारिश्रमिक 75-75 पैसे, खाद्यान्न की ढुलाई पर 25 पैसे तथा ईंधन, बर्तन आदि पर 50 पैसे प्रति बच्चे की दर से निर्धारित हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी दीप्ति भार्र्गव के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से भोजन बंटवाने का आदेश मिल गया है। इसकी प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
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बिजनौर। कुपोषण को खत्म करने के साथ-साथ रोजगार भी मुहैया कराने के लिए शासन ने पहल की है। आंगनबाड़ी केंद्रों पर अब स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं नौनिहालों को भोजन परोसेंगी। शासन ने 21 जिलों में इसकी व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। इससे महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा और हॉट की गुणवत्ता भी सुधरेगी।
कुपोषण के खिलाफ शासन द्वारा बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। अतिकुपोषित नौनिहालों, किशोरियों व गर्भवती महिलाओं को चिह्नित किया जा रहा है। तीन से छह साल तक के बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों पर हॉट कुक दिया जाता था। केंद्रों पर पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका भोजन बनाती थीं, लेकिन बाद में केंद्रों को परिषदीय स्कूलों के मिड-डे मील से जोड़ दिया गया। शासन द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों में मिड-डे मील बनाने की जिम्मेदारी स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को दी जा रही है। शासन का मानना है कि केंद्रों पर आंगनबाड़ी केंद्रों पर आने वाले बच्चों की माता भी किसी न किसी स्वयं सहायता समूह की सदस्य जरूर होंगी। उनके केंद्रों से जुड़ने से भोजन की गुणवत्ता सुधरेगी। इसके अलावा हर गांव में एक दो महिलाओं को रोजगार भी मिलेगा। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग निदेशक शत्रुघ्न सिंह ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं। शुरुआत में 21 जिलों को इस योजना में शामिल किया गया है। जिले में भी करीब 2800 आंगनबाड़ी केंद्र गांवों में ही हैं।
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ये जिले हुए शामिल
योजना में आगरा, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, मऊ, प्रयागराज, कानपुर नगर, बरेली, मुरादाबाद, अमरोहा, रामपुर, बिजनौर, संभल, मेरठ, गौतमबुद्धनगर, बागपत, लखनऊ, लखीमपुर खीरी, चंदौली, सहारनपुर व शामली को शामिल किया गया है। इन जिलों में 24 हजार 710 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं।
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पहले ये थी व्यवस्था
पहले आंगनबाड़ी केंद्र पर आने वाले हर बच्चे की एक दिन की खुराक के लिए साढ़े चार रुपये निर्धारित थे। इनमें खाद्यान्न के लिए सवा दो रुपये, रसोइया व आंगनबाड़ी सहायिका का पारिश्रमिक 75-75 पैसे, खाद्यान्न की ढुलाई पर 25 पैसे तथा ईंधन, बर्तन आदि पर 50 पैसे प्रति बच्चे की दर से निर्धारित हैं।
जिला कार्यक्रम अधिकारी दीप्ति भार्र्गव के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से भोजन बंटवाने का आदेश मिल गया है। इसकी प्रक्रिया शुरू की जा रही है।