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अधिकारियों के चक्कर लगा रहे रामपुर ठकरा के गांव वाले
Updated Wed, 20 Sep 2017 01:03 AM IST
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ग्रामीणों ने कब्जा हटाने की कार्रवाई को गलत बताया
बिजनौर। गांव रामपुर ठकरा में वन विभाग की जमीन को कब्जामुक्त कराने की कवायद शुरू करने के बाद गांव वालों में हड़कंप मचा हुआ है। गांव वाले अपने कागज लेकर अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं और वन विभाग की कार्रवाई को गलत बता रहे हैं।
हाईकोर्ट ने वन विभाग की 70 हेक्टेअर जमीन को कब्जामुक्त कराने का आदेश दिसंबर 2016 में दिया था। सोमवार को भारी पुलिस बल के बीच वन विभाग ने गांव से करीब 15 हेक्टेअर जमीन कब्जामुक्त कराई थी। गांव वाले इस कार्रवाई को गलत बता रहे हैं। गांव के पवन कुमार का कहना है कि इस मामले में हाईकोर्ट को धोखे में रखकर कागज पेश किए गए हैं। उनका कहना है कि वन विभाग को यह जमीन 1968 में दी गई थी, जबकि जिले में वन विभाग का सृजन 1982 में हुआ है। गांव की जमीन वन विभाग को स्थानांतरित होने के संबंध में भी कोई पत्र नहीं है। उनके अनुसार वन बंदोबस्त अधिकारी के रिकॉर्ड में भी रामपुर ठकरा में वन विभाग को जमीन आवंटित किए जाने का कोई उल्लेख नहीं है। पवन कुमार का कहना है कि उनका गांव आजादी के समय से भी पहले का बसा हुआ है। उनका कहना है कि गांव वालों को इंसाफ नहीं मिल रहा है। लेकिन वे इंसाफ पाने के लिए पूरा जी जान लड़ा देंगे।
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बिजनौर। गांव रामपुर ठकरा में वन विभाग की जमीन को कब्जामुक्त कराने की कवायद शुरू करने के बाद गांव वालों में हड़कंप मचा हुआ है। गांव वाले अपने कागज लेकर अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं और वन विभाग की कार्रवाई को गलत बता रहे हैं।
हाईकोर्ट ने वन विभाग की 70 हेक्टेअर जमीन को कब्जामुक्त कराने का आदेश दिसंबर 2016 में दिया था। सोमवार को भारी पुलिस बल के बीच वन विभाग ने गांव से करीब 15 हेक्टेअर जमीन कब्जामुक्त कराई थी। गांव वाले इस कार्रवाई को गलत बता रहे हैं। गांव के पवन कुमार का कहना है कि इस मामले में हाईकोर्ट को धोखे में रखकर कागज पेश किए गए हैं। उनका कहना है कि वन विभाग को यह जमीन 1968 में दी गई थी, जबकि जिले में वन विभाग का सृजन 1982 में हुआ है। गांव की जमीन वन विभाग को स्थानांतरित होने के संबंध में भी कोई पत्र नहीं है। उनके अनुसार वन बंदोबस्त अधिकारी के रिकॉर्ड में भी रामपुर ठकरा में वन विभाग को जमीन आवंटित किए जाने का कोई उल्लेख नहीं है। पवन कुमार का कहना है कि उनका गांव आजादी के समय से भी पहले का बसा हुआ है। उनका कहना है कि गांव वालों को इंसाफ नहीं मिल रहा है। लेकिन वे इंसाफ पाने के लिए पूरा जी जान लड़ा देंगे।
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