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खाद पर घटा टैक्स, लेकिन नहीं कम हुए दाम

Thu, 06 Jul 2017 12:23 AM IST
Updated Thu, 06 Jul 2017 12:23 AM IST
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खाद पर घटा टैक्स, लेकिन नहीं कम हुए दाम
बिजनौर। केंद्र सरकार ने जीएसटी पर खाद पर रेट कम कर दिया हो, लेकिन इसका असर देखने को नहीं मिल रहा है। खाद के सरकारी गोदामों पर भी खाद अब भी पुराने रेट पर बेचा जा रहा है। किसानों को खाद पर टैक्स कम होने का अब तक कोई फायदा नहीं मिला है। हालांकि प्राइवेट दुकानदारों को पुराने रेट पर अभी सामान बेचने की मोहलत सरकार ने दे दी है।
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एक जुलाई से जीएसटी पूरे देश में लागू हो गया है। काफी सामान पर जीएसटी में टैक्स घटा दिया गया है तो खाद पर टैक्स कम करके किसानों को राहत दी गई है। खाद पर टैक्स 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया गया है। इससे खाद के दाम कम होने चाहिएं। लेकिन अभी सहकारी समितियों पर मिलने वाले खाद के दाम भी कम नहीं हुए हैं। जिले में हर साल करीब 20 हजार मीट्रिक टन खाद की खपत होती है। दाम कम होने से किसानों को बहुत फायदा होगा। जिले में 96 सहकारी समितियां हैं। इन सब पर अब भी पुराने रेट पर ही खाद बेचा जा रहा है।
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चार लाख किसान परिवारों को मिलना है लाभ
बिजनौर में खेती ही अर्थव्यवस्था का आधार है। चार लाख किसान परिवारों को खाद पर टैक्स कम होने की योजना का लाभ मिलना है। जिले में हर साल अरबों रुपये का खाद बेचा जाता है। इस समय गन्ने व धान की फसल खेतों में खड़ी हैं। इन फसलों में खाद डालने का यही समय होता है। बरसात में गन्ने की फसल में आखिरी बार खाद डाला जाता है तो धान की फसल की शुरूआत भी कई तरह के खाद डालकर होती है।
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ये हैं दाम
यूरिया 330 रुपये
डीएपी 1040
एनपीके 989
नोट:खाद के दाम 50 किलो की बोरी के हैं।
खाद पर दाम 12 के बजाए पांच प्रतिशत होने पर किसानों को फायदा होगा। यूरिया का रेट 23, डीएपी का 72 व एनपीके का दाम 69 रुपये तक कम हो जाएगा। नए रेट में यूरिया 307, डीएपी 968 व एनपीके 920 रुपये में मिलने का अनुमान है।
भाकियू के प्रदेश महासचिव रामौतार सिंह के अनुसार सरकार को खाद पर घटी दरों का लाभ तुरंत किसानों को देना चाहिए। खेती से जुड़ी सभी वस्तुओं को टैक्स फ्री करना चाहिए।

सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता अमित कुमार त्यागी के अनुसार शासन से अभी खाद के नए रेट प्राप्त नहीं हुए हैं। जीएसटी में सभी समितियों के रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन कर दिया है। वर्तमान में शासन द्वारा निर्धारित मूल्यों पर ही किसानों को खाद दिया जा रहा है।
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