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लोकसभा नगीना
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भाजपा के लिए नगीना लोकसभा सीट चुनौतीपूर्ण
धामपुर। प्रदेश की लोकसभा सीटों में से नगीना लोकसभा सीट आरक्षित है। लोकसभा सीट में करीब 15 लाख 74 हजार 998 वोटर शामिल है। इनमें से 45 प्रतिशत से ज्यादा मुसलिम वोटरों की संख्या है। करीब तीन लाख से ज्यादा एससी वोटर हैं। भाजपा के लिए चुनाव इस बार काफी चुनौतीपूर्ण होगा। भाजपा को फिर से सत्ता में आने से रोकने के लिए गैर भाजपा दलों ने महागठबंधन का गठन किया है। इस महागठबंधन में विशेष कर सपा, बसपा, कांग्रेस रालोद सहित कई दल शामिल हैं। इस बार प्रदेश और देश में भाजपा की संजीवनी के लिए मोदी की भी लहर नहीं मानी जा रही है।
नगीना लोकसभा सीट का इतिहास
नगीना लोकसभा सीट का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है। पहले यह हिस्सा बिजनौर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता था। हालांकि 2008 में हुए परिसीमन के दौरान इसे अलग क्षेत्र बनाने की मांग शुरू हुई और 2009 के लोकसभा चुनाव में इसे अलग कर दिया गया। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा के यशवीर सिंह धोबी ने यहां पर बीएसपी के आरके सिंह को 59688 वोटों से हरा जीत दर्ज की थी। अगले ही चुनाव में उन्हें मुंह की खानी पड़ी। 2014 में बीजेपी की आंधी में यहां पर भी भाजपा को फायदा मिला और भाजपा के डा.यशवंत सिंह ने 92390 वोटों से सपा के यशवीर सिंह को 59688 वोटों से परास्त कर जीत दर्ज कराई थी।
नगीना लोकसभा सीट का समीकरण
नगीना लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट है। यहां करीब 1574998 वोटर शामिल है। राजनीतिक लिहाज से इस सीट को काफी अहम माना जाता है। वर्ष 2009 में यहां पर 53.77 प्रतिशत और 2014 में 63.1 फीसदी वोट डाले गए थे। इनमें से 6,470 वोट नोटा पड़े थे। नगीना लोकसभा क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें नजीबाबाद, नगीना, धामपुर, नहटौर और नूरपुर की सीट शामिल है। वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में तीन सीटें भाजपा और दो सीटें समाजवादी पार्टी के पास गई थीं। हालांकि इनमें से 2018 में भाजपा के विधायक लोकेंद्र की सड़क दुर्घटना में हुई मौत के बाद नूरपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में सपा के नईमुलहसन ने भाजपा की अवनि सिंह ( पत्नी स्व. विधायक लोकेंद्र सिंह ) को हराकर जीत दर्ज की थी।
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धामपुर। प्रदेश की लोकसभा सीटों में से नगीना लोकसभा सीट आरक्षित है। लोकसभा सीट में करीब 15 लाख 74 हजार 998 वोटर शामिल है। इनमें से 45 प्रतिशत से ज्यादा मुसलिम वोटरों की संख्या है। करीब तीन लाख से ज्यादा एससी वोटर हैं। भाजपा के लिए चुनाव इस बार काफी चुनौतीपूर्ण होगा। भाजपा को फिर से सत्ता में आने से रोकने के लिए गैर भाजपा दलों ने महागठबंधन का गठन किया है। इस महागठबंधन में विशेष कर सपा, बसपा, कांग्रेस रालोद सहित कई दल शामिल हैं। इस बार प्रदेश और देश में भाजपा की संजीवनी के लिए मोदी की भी लहर नहीं मानी जा रही है।
नगीना लोकसभा सीट का इतिहास
नगीना लोकसभा सीट का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है। पहले यह हिस्सा बिजनौर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता था। हालांकि 2008 में हुए परिसीमन के दौरान इसे अलग क्षेत्र बनाने की मांग शुरू हुई और 2009 के लोकसभा चुनाव में इसे अलग कर दिया गया। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा के यशवीर सिंह धोबी ने यहां पर बीएसपी के आरके सिंह को 59688 वोटों से हरा जीत दर्ज की थी। अगले ही चुनाव में उन्हें मुंह की खानी पड़ी। 2014 में बीजेपी की आंधी में यहां पर भी भाजपा को फायदा मिला और भाजपा के डा.यशवंत सिंह ने 92390 वोटों से सपा के यशवीर सिंह को 59688 वोटों से परास्त कर जीत दर्ज कराई थी।
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नगीना लोकसभा सीट का समीकरण
नगीना लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट है। यहां करीब 1574998 वोटर शामिल है। राजनीतिक लिहाज से इस सीट को काफी अहम माना जाता है। वर्ष 2009 में यहां पर 53.77 प्रतिशत और 2014 में 63.1 फीसदी वोट डाले गए थे। इनमें से 6,470 वोट नोटा पड़े थे। नगीना लोकसभा क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें नजीबाबाद, नगीना, धामपुर, नहटौर और नूरपुर की सीट शामिल है। वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में तीन सीटें भाजपा और दो सीटें समाजवादी पार्टी के पास गई थीं। हालांकि इनमें से 2018 में भाजपा के विधायक लोकेंद्र की सड़क दुर्घटना में हुई मौत के बाद नूरपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में सपा के नईमुलहसन ने भाजपा की अवनि सिंह ( पत्नी स्व. विधायक लोकेंद्र सिंह ) को हराकर जीत दर्ज की थी।
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