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उतराखंड की तर्जय पर कम छात् वाले स्कूलों पर कसेगा शिकंजा
Updated Fri, 12 Jan 2018 06:41 PM IST
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बडे़ स्कूलों में मर्ज होंगे कम छात्र संख्या वाले स्कूल
- परिषदीय स्कूलों पर उत्तराखंड की तर्ज पर काम करेगी प्रदेश सरकार
- 20 छात्रों से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का चिह्नित करने का काम शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर।
जिले के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों पर शिकंजा कसने की शासन ने तैयारी शुरू कर दी है। उत्तराखंड की तर्ज पर कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को दूसरे स्कूलों में मर्ज किया जाएगा। इस निर्णय के बाद जिले के ऐसे स्कूल जिनमें छात्र संख्या बीस से कम हैं, उन्हें चिह्नित करने का काम शुरू कर दिया गया है। शासन ने इन स्कूलों की रिपोर्ट तलब की है।
जिले के परिषदीय स्कूलों पर शिकंजा कसने का काम शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री के पोर्टल पर ऐसे स्कूलों जिनमें छात्रों की संख्या 20 से कम है तथा शिक्षक दो या दो से अधिक हैं की शिकायत की गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा इसे गंभीरता से लिया गया है। अब सचिव बेसिक शिक्षा ने बीएसए से जिले के ऐसे स्कूलों की संख्या मांगी है, जिनमें छात्र संख्या कम है। उनकी सूची मांगी गई है। शासन के इस निर्देश से शिक्षकों में हड़कंप मचा है।
शिक्षकों का कहना है कि उत्तराखंड में कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को दूसरे स्कूलों में मर्ज कर दिया गया है। अकेले बिजनौर जिले में ऐसे लगभग 500 स्कूल हैं, जिनमें छात्रों की संख्या 20 से कम है। यदि कम छात्र संख्या वाले स्कूल दूसरे स्कूलों में मर्ज हुए तो इन स्कूलों के शिक्षकों को भी दूसरे स्कूलों में समायोजित कर दिया जाएगा। ऐसे शिक्षकों के लिए नए पदों का सृजन नहीं हो सकेगा। उधर, बीएसए महेश चंद्र ने बताया कि जिले के खंड शिक्षा अधिकारियों से ऐसे स्कूलों की सूची मांगी गई है, जिनमें छात्रों की संख्या 20 से कम है।
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- परिषदीय स्कूलों पर उत्तराखंड की तर्ज पर काम करेगी प्रदेश सरकार
- 20 छात्रों से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का चिह्नित करने का काम शुरू
अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर।
जिले के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों पर शिकंजा कसने की शासन ने तैयारी शुरू कर दी है। उत्तराखंड की तर्ज पर कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को दूसरे स्कूलों में मर्ज किया जाएगा। इस निर्णय के बाद जिले के ऐसे स्कूल जिनमें छात्र संख्या बीस से कम हैं, उन्हें चिह्नित करने का काम शुरू कर दिया गया है। शासन ने इन स्कूलों की रिपोर्ट तलब की है।
जिले के परिषदीय स्कूलों पर शिकंजा कसने का काम शुरू हो गया है। प्रधानमंत्री के पोर्टल पर ऐसे स्कूलों जिनमें छात्रों की संख्या 20 से कम है तथा शिक्षक दो या दो से अधिक हैं की शिकायत की गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा इसे गंभीरता से लिया गया है। अब सचिव बेसिक शिक्षा ने बीएसए से जिले के ऐसे स्कूलों की संख्या मांगी है, जिनमें छात्र संख्या कम है। उनकी सूची मांगी गई है। शासन के इस निर्देश से शिक्षकों में हड़कंप मचा है।
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शिक्षकों का कहना है कि उत्तराखंड में कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को दूसरे स्कूलों में मर्ज कर दिया गया है। अकेले बिजनौर जिले में ऐसे लगभग 500 स्कूल हैं, जिनमें छात्रों की संख्या 20 से कम है। यदि कम छात्र संख्या वाले स्कूल दूसरे स्कूलों में मर्ज हुए तो इन स्कूलों के शिक्षकों को भी दूसरे स्कूलों में समायोजित कर दिया जाएगा। ऐसे शिक्षकों के लिए नए पदों का सृजन नहीं हो सकेगा। उधर, बीएसए महेश चंद्र ने बताया कि जिले के खंड शिक्षा अधिकारियों से ऐसे स्कूलों की सूची मांगी गई है, जिनमें छात्रों की संख्या 20 से कम है।
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