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Bijnor News: बिजनौर के धर्मेंद्र त्यागी की देन है परिवार कल्याण का लाल तिकोन

Tue, 29 Sep 2026 12:58 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 29 Sep 2026 12:58 AM IST
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The 'Red Triangle' symbol for family welfare is the brainchild of Bijnor's Dharmendra Tyagi.
धर्मेंद्र देव त्यागी फाइल फोटो (बोल बिजनौर के साथ)
बिजनौर। जनपद के ऐतिहासिक गांव रतनगढ़ ने देश को कई प्रतिभाएं दी हैं। इन्हीं में से एक धर्मेंद्र त्यागी हैं, जिन्हें देव त्यागी या डीके त्यागी के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने भारत के परिवार कल्याण कार्यक्रम को लाल तिकोन का प्रतीक दिया। यह आज दुनिया भर में परिवार नियोजन का अंतरराष्ट्रीय निशान बन गया है।
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नूरपुर निवासी धर्मेंद्र त्यागी 1950 के आसपास भारत के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में निदेशक बने थे। 1950 और 1960 के दशक में परिवार नियोजन के प्रति लोगों को जागरूक करना एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने अपने नारों, योजना और प्रतीक के माध्यम से देशभर में विशेष जागरूकता पैदा की। उन्होंने लाल रंग का उल्टा त्रिभुज परिवार नियोजन के निशान के रूप में बनाया। यह लाल उल्टा त्रिभुज धीरे-धीरे पूरी दुनिया में लोकप्रिय हुआ। इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिवार नियोजन का प्रतीक माना जाने लगा। उल्टा लाल त्रिभुज दिखते ही परिवार नियोजन की बात स्पष्ट हो जाती है। विकिपीडिया के अनुसार, भारत ने इस उल्टे लाल त्रिभुज को 1960 के दशक में अपनाया था।
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-प्रतीक का जन्म और वैश्विक पहचान
धर्मेंद्र त्यागी ने 50 और 60 के दशक में जनसंख्या नियंत्रण के लिए कई नारे गढ़े। उन्होंने यह प्रतीक भी बनाया, जो आज भी प्रासंगिक है। वे 1969 तक भारतीय परिवार नियोजन कार्यक्रम के सहायक आयुक्त थे। लाल रंग सतर्कता और ध्यान आकर्षित करने का प्रतीक है। उल्टा त्रिकोण परिवार नियोजन स्वास्थ्य सेवाओं का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी की सरकारों के दौरान दो या तीन बच्चे, बस के नारे के साथ पत्थरों, होर्डिंगों और इमारतों पर लाल त्रिकोण को चित्रित करवाया था।
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-रतनगढ़ का ऐतिहासिक जुड़ाव
रतनगढ़ गांव की स्थापना उन्नीसवीं शताब्दी के आरंभ में राव जोखा सिंह त्यागी ने की थी। वे मराठा संघ सेना की उत्तरी शाखा के पूर्व सेनापति थे, जिनका नियंत्रण हिमालय की तराई घाटियों तक फैला था। दिल्ली के युद्ध में मराठों के पतन के बाद, वे एक भाड़े के सैनिक बन गए। उन्होंने कुछ समय तक मेरठ के पास सरधना रियासत के सेनापति के रूप में भी कार्य किया। परिवार के सदस्यों के अनुसार, बेगम समरू के नाराज होने पर उन्होंने सरधना छोड़ दिया और बाद में रतनगढ़ की स्थापना की।

-विरासत की उपेक्षा
लगभग 30-40 साल पहले, एक लेखक रतनगढ़ गए थे। उन्होंने धर्मेंद्र त्यागी के एक मंजिले मकान के छज्जे पर उल्टा लाल तिकोन बना देखा था। हालांकि, पिछले साल जब लेखक दोबारा रतनगढ़ गए, तो यह लाल तिकोन ढह चुका था। देखरेख के अभाव में धर्मेंद्र त्यागी का मकान भी खस्ता हाल में था। बताया गया कि उनका परिवार दिल्ली में रहता है। उनके पास यहां आने का समय नहीं है।

प्रस्तुति-अशोक मधुप
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