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रसोईयों ने मांगों को लेकर बीएसए कार्यालय पर किया प्रदर्शन
Updated Tue, 20 Jun 2017 12:40 AM IST
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रसोइयाओं ने बीएसए कार्यालय पर किया प्रदर्शन
अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर।
जिलों के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के रसोइयों ने विभिन्न मांगों को लेकर बीएसए कार्यालय पर प्रदर्शन किया। आठ सूत्रीय ज्ञापन बीएसए को सौंपा गया।
राष्ट्रीय मध्याह्न भोजन रसोइयों एकता संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में रसोइयों नारेबाजी करते बीएसए कार्यालय पहुंची। प्रदेशाध्यक्ष काजल कटारिया और जिलाध्यक्ष सुनीत ने आरोप लगाया कि रसोइयों की स्थिति बंधवा मजदूरों से बदतर है। इनके काम की कोई सुरक्षा नहीं है। रसोइयों को जीने लायक भी मानदेय नहीं मिलता है। रसोइयों को मनमाने ढंग से विद्यालय में रखा जाता है और कभी भी निकाल दिया जाता है। यदि कोई रसोइयां अपनी बात अधिकारियों के समक्ष रखती है तो उसे उपेक्षित कर दिया जाता है तथा नौकरी से निकालने की भी धमकी दी जाती है। रसोइयां काफी देर तक बीएसए कार्यालय पर नारेबाजी करती रही।
इसके बाद बीएसए महेश कुमार ने मौके पर जाकर प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लिया। ज्ञापन में कार्यरत रसोइयों की हर वर्ष की प्रक्रिया समाप्त करने, उनके बच्चों को संबंधित विद्यालयों में पढ़ने की अनिवार्यता समाप्त करने, मानदेय पांच हजार रुपये करने और माह के प्रथम सप्ताह में उनके खातों में भेजने तथा बीमा आदि करने की मांग की गई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
बिजनौर।
जिलों के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के रसोइयों ने विभिन्न मांगों को लेकर बीएसए कार्यालय पर प्रदर्शन किया। आठ सूत्रीय ज्ञापन बीएसए को सौंपा गया।
राष्ट्रीय मध्याह्न भोजन रसोइयों एकता संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में रसोइयों नारेबाजी करते बीएसए कार्यालय पहुंची। प्रदेशाध्यक्ष काजल कटारिया और जिलाध्यक्ष सुनीत ने आरोप लगाया कि रसोइयों की स्थिति बंधवा मजदूरों से बदतर है। इनके काम की कोई सुरक्षा नहीं है। रसोइयों को जीने लायक भी मानदेय नहीं मिलता है। रसोइयों को मनमाने ढंग से विद्यालय में रखा जाता है और कभी भी निकाल दिया जाता है। यदि कोई रसोइयां अपनी बात अधिकारियों के समक्ष रखती है तो उसे उपेक्षित कर दिया जाता है तथा नौकरी से निकालने की भी धमकी दी जाती है। रसोइयां काफी देर तक बीएसए कार्यालय पर नारेबाजी करती रही।
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इसके बाद बीएसए महेश कुमार ने मौके पर जाकर प्रदर्शनकारियों से ज्ञापन लिया। ज्ञापन में कार्यरत रसोइयों की हर वर्ष की प्रक्रिया समाप्त करने, उनके बच्चों को संबंधित विद्यालयों में पढ़ने की अनिवार्यता समाप्त करने, मानदेय पांच हजार रुपये करने और माह के प्रथम सप्ताह में उनके खातों में भेजने तथा बीमा आदि करने की मांग की गई है।
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