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गन्ना भुगतान में पूरे सूबे में नंबर वन है बिजनौर
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गन्ना भुगतान में पूरे सूबे में नंबर वन है बिजनौर
बिजनौर। गन्ना भुगतान में बिजनौर जिला सूबे में नंबर वन पर है। जिले में 65 प्रतिशत भुगतान हो चुका है। केवल बिजनौर में ही एक हजार करोड़ का भुगतान हुआ है। गन्ना मंत्री सुरेश राणा का जिला शामली भी भुगतान में बिजनौर से बहुत पीछे है।
गन्ना भुगतान का मुद्दा किसान रोज उठा रहे हैं। हर रोज कोई न कोई संगठन आंदोलन पर रहता है। वेव ग्रुप की बिजनौर व चांदपुर चीनी मिल ने पिछले पेराई सत्र का करीब 62 करोड़ का भुगतान अब तक नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक वेव ग्रुप को सॉफ्ट लोन देने के मामले में हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने ग्रुप को अपने संसाधनों से गन्ना भुगतान करने के लिए कहा है। जिले में नौ चीनी मिलों को करीब सवा तीन लाख किसान गन्ना आपूर्ति करते हैं। चीनी के दाम कम होने के बाद भी जिले की चीनी मिल भुगतान करने में सूबे में नंबर वन हैं। जिले की चीनी मिल खरीदे गए गन्ने का 65 प्रतिशत भुगतान कर चुकी हैं। केवल बिजनौर में ही अब तक एक हजार करोड़ का भुगतान हुआ है। गाजियाबाद और हापुड़ में तो इस साल चीनी मिलों ने किसान को भुगतान में फूटी कौड़ी भी नहीं दी है।
चीनी मिल बकाया भुगतान भुगतान प्रतिशत
बिजनौर 1635 1068 65
गोंडा 514 272 54
सहारनपुर 811 313 38
मुजफ्फरनगर 1525 937 61
शामली 559 65 11
मेरठ 1282 470 37
हापुड़ 351 00 00
गाजियाबाद 144 00 00
बागपत 358 77 21
बुलंदशहर 359 193 53
अमरोहा 443 278 62
मुरादाबाद 534 195 36
रामपुर 328 189 58
बरेली 655 389 59
पीलीभीत 644 383 59
शाहजहांपुर 650 403 60
बदायूं 115 09 08
लखीमपुरखीरी 2098 924 44
नोट:ये आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं। बकाया व भुगतान करोड़ में है।
केंद्रीय राज्यमंत्री के जिले में नहीं मिली फूटी कौड़ी
गन्ना मंत्री सुरेश राणा शामली के रहने वाले हैं। उनके जिले में केवल 11 प्रतिशत भुगतान ही किसानों को मिला है। इसके अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री पूर्व थल सेनाध्यक्ष वीके सिंह गाजियाबाद से सांसद हैं। उनके जिले के किसानों को भुगतान की फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है।
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मिलों के खिलाफ सख्त रुख
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार गन्ना भुगतान के लिए चीनी मिलों के खिलाफ सख्त रुख अपना रखा है। किसानों का बाकी भुगतान करने के लिए भी मिलों पर पूरा दबाव बना रखा है।
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बिजनौर। गन्ना भुगतान में बिजनौर जिला सूबे में नंबर वन पर है। जिले में 65 प्रतिशत भुगतान हो चुका है। केवल बिजनौर में ही एक हजार करोड़ का भुगतान हुआ है। गन्ना मंत्री सुरेश राणा का जिला शामली भी भुगतान में बिजनौर से बहुत पीछे है।
गन्ना भुगतान का मुद्दा किसान रोज उठा रहे हैं। हर रोज कोई न कोई संगठन आंदोलन पर रहता है। वेव ग्रुप की बिजनौर व चांदपुर चीनी मिल ने पिछले पेराई सत्र का करीब 62 करोड़ का भुगतान अब तक नहीं किया है। सूत्रों के मुताबिक वेव ग्रुप को सॉफ्ट लोन देने के मामले में हाईकोर्ट से भी राहत नहीं मिली है। हाईकोर्ट ने ग्रुप को अपने संसाधनों से गन्ना भुगतान करने के लिए कहा है। जिले में नौ चीनी मिलों को करीब सवा तीन लाख किसान गन्ना आपूर्ति करते हैं। चीनी के दाम कम होने के बाद भी जिले की चीनी मिल भुगतान करने में सूबे में नंबर वन हैं। जिले की चीनी मिल खरीदे गए गन्ने का 65 प्रतिशत भुगतान कर चुकी हैं। केवल बिजनौर में ही अब तक एक हजार करोड़ का भुगतान हुआ है। गाजियाबाद और हापुड़ में तो इस साल चीनी मिलों ने किसान को भुगतान में फूटी कौड़ी भी नहीं दी है।
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चीनी मिल बकाया भुगतान भुगतान प्रतिशत
बिजनौर 1635 1068 65
गोंडा 514 272 54
सहारनपुर 811 313 38
मुजफ्फरनगर 1525 937 61
शामली 559 65 11
मेरठ 1282 470 37
हापुड़ 351 00 00
गाजियाबाद 144 00 00
बागपत 358 77 21
बुलंदशहर 359 193 53
अमरोहा 443 278 62
मुरादाबाद 534 195 36
रामपुर 328 189 58
बरेली 655 389 59
पीलीभीत 644 383 59
शाहजहांपुर 650 403 60
बदायूं 115 09 08
लखीमपुरखीरी 2098 924 44
नोट:ये आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं। बकाया व भुगतान करोड़ में है।
केंद्रीय राज्यमंत्री के जिले में नहीं मिली फूटी कौड़ी
गन्ना मंत्री सुरेश राणा शामली के रहने वाले हैं। उनके जिले में केवल 11 प्रतिशत भुगतान ही किसानों को मिला है। इसके अलावा केंद्रीय राज्यमंत्री पूर्व थल सेनाध्यक्ष वीके सिंह गाजियाबाद से सांसद हैं। उनके जिले के किसानों को भुगतान की फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है।
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मिलों के खिलाफ सख्त रुख
जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार गन्ना भुगतान के लिए चीनी मिलों के खिलाफ सख्त रुख अपना रखा है। किसानों का बाकी भुगतान करने के लिए भी मिलों पर पूरा दबाव बना रखा है।