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आईआईटी रूड़की करेगी
Updated Fri, 13 Apr 2018 11:56 PM IST
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बिजनौर। राष्ट्रीय हरित अधिकरण की शुगर मिलों द्वारा मिल में प्रयोग होने वाले पानी की जांच शुरू कर दी है। इस पानी की शुद्धता की जांच करने के लिए आईआईटी रुड़की की टीम बिजनौर पहुंच गई है। टीम ने जिले के शुगर मिलों में प्रयोग के बाद बचने वाले पानी की जांच भी शुरू कर दी है। अगर जांच में पानी मानक के अनुरूप नहीं मिला तो मिल प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
प्रदूषण से जुड़े हर मुद्दे पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण की ओर से विशेष निगरानी रखी जा रही है। जिले में छोईया नदी के पानी की जांच के लिए कुछ दिन पहले भी दिल्ली से टीम आई थी। अब आईआईटी रुड़की की टीम ने जिले में डेरा डाला है। आईटीआई रुड़की के एसोसिएट प्रोफेसर प्रसन्नजीत मंडल ने अपनी टीम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एई अजय कुमार कुशवाहा, प्रयोगशाला सहायक अंजलि शुक्ल के साथ शुगर मिलों में ईटीपी में डालने से पहले और बाद के पानी के नमूने लिए।
टीम ने उत्तम शुगर मिल और नजीबाबाद सहकारी मिल में जांच की तो वहां पानी शोधित करके फसलों की सिंचाई में प्रयोग किया जा रहा था। द्वारिकेश शुगर मिल में पानी शोधित करने के बाद नाले के जरिए गांगन नदी और बिजनौर शुगर मिल में शोधित करने के बाद मिल के पास एक जमीन में डाला जा रहा है। पानी के नमूनों की जांच आईआईटी रुड़की में ही की जाएगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि अगर शोधित होने के बाद के पानी के सैंपल में हानिकारक केमिकल मिले तो शुगर मिलों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि मिलों में अनेक कार्यों में पानी का इस्तेमाल होता है। इस्तेमाल हुए इस पानी को ईटीपी/इंफ्लुऐंट ट्रीटमेंट प्लांट से शोधित किया जाता है। इस पानी का प्रयोग खेतों में या वाटर लेबिल को बढ़ाने में किया जा सकता है। अगर यह पानी दूषित होता है तो भूगर्भ जल भी दूषित होगा।
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प्रदूषण से जुड़े हर मुद्दे पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण की ओर से विशेष निगरानी रखी जा रही है। जिले में छोईया नदी के पानी की जांच के लिए कुछ दिन पहले भी दिल्ली से टीम आई थी। अब आईआईटी रुड़की की टीम ने जिले में डेरा डाला है। आईटीआई रुड़की के एसोसिएट प्रोफेसर प्रसन्नजीत मंडल ने अपनी टीम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एई अजय कुमार कुशवाहा, प्रयोगशाला सहायक अंजलि शुक्ल के साथ शुगर मिलों में ईटीपी में डालने से पहले और बाद के पानी के नमूने लिए।
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टीम ने उत्तम शुगर मिल और नजीबाबाद सहकारी मिल में जांच की तो वहां पानी शोधित करके फसलों की सिंचाई में प्रयोग किया जा रहा था। द्वारिकेश शुगर मिल में पानी शोधित करने के बाद नाले के जरिए गांगन नदी और बिजनौर शुगर मिल में शोधित करने के बाद मिल के पास एक जमीन में डाला जा रहा है। पानी के नमूनों की जांच आईआईटी रुड़की में ही की जाएगी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि अगर शोधित होने के बाद के पानी के सैंपल में हानिकारक केमिकल मिले तो शुगर मिलों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि मिलों में अनेक कार्यों में पानी का इस्तेमाल होता है। इस्तेमाल हुए इस पानी को ईटीपी/इंफ्लुऐंट ट्रीटमेंट प्लांट से शोधित किया जाता है। इस पानी का प्रयोग खेतों में या वाटर लेबिल को बढ़ाने में किया जा सकता है। अगर यह पानी दूषित होता है तो भूगर्भ जल भी दूषित होगा।
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