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मदरसों के शिक्षकों पर वेतन रूकने की तलवार लटकी
Updated Sat, 09 Dec 2017 12:26 AM IST
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मदरसा शिक्षकों के वेतन पर लटकी तलवार
बिजनौर।
जिले के करीब एक दर्जन मदरसों के शिक्षकों पर वेतन रुकने की तलवार लटकी है। शासन किसी भी समय इन शिक्षकों का वेतन रोक सकता है। मदरसों के संचालकों पर अल्पसंख्यक विभाग से मान्यता नहीं लेने का आरोप है। इसे लेकर मदरसों के शिक्षकों में खलबली मची है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रवीण कुमार मिश्र के अनुसार जिले में 640 मदरसे हैं। इनमें 240 मदरसे आधुनिकीकरण योजना की श्रेणी के हैं। तीन मिनी आईटीआई संचालित हैं। आधुनिकीकरण योजना के मदरसों को आर्थिक मदद के रूप में केंद्र, राज्य से अलग-अलग अंशदान आता है। दोनों अंशदान से मदरसों के शिक्षकों को वेतन मिलता है। मिश्र के अनुसार जिले में करीब एक दर्जन मदरसे ऐसे हैं जो 1998 से पूर्व के संचालित हैं। इन मदरसों ने बीएसए या एडी बेसिक से मान्यता ले रखी है। 1998 में अलग से राज्य अल्पसंख्यक विभाग की स्थापना हुई थी। इसके बाद शासन ने स्थापना से पहले चल रहे मदरसों को हिदायत दी थी कि वे अल्पसंख्यक विभाग से मान्यता प्राप्त कर लें। मान्यता लेने के बाद ही उनके मदरसों के शिक्षकों को अल्पसंख्यक विभाग से वेतन मिल सकता है। विभाग ने मांगी गई सूचना अल्पसंख्यक विभाग के पोर्टल पर अल्पसंख्यक विभाग से मान्यता लेने के विवरण समेत अन्य जानकारी अपलोड करने के निर्देश दिए थे। परंतु मदरसों ने शासन के आदेशों का पालन तय तारीख तक नहीं किया है। अब वेबसाइट बंद हो गई है। इन मदरसों के शिक्षकों का वेतन किसी भी समय रोका जा सकता है। इस बारे में शासन से दिशा निर्देश मांगा गया है।
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बिजनौर।
जिले के करीब एक दर्जन मदरसों के शिक्षकों पर वेतन रुकने की तलवार लटकी है। शासन किसी भी समय इन शिक्षकों का वेतन रोक सकता है। मदरसों के संचालकों पर अल्पसंख्यक विभाग से मान्यता नहीं लेने का आरोप है। इसे लेकर मदरसों के शिक्षकों में खलबली मची है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रवीण कुमार मिश्र के अनुसार जिले में 640 मदरसे हैं। इनमें 240 मदरसे आधुनिकीकरण योजना की श्रेणी के हैं। तीन मिनी आईटीआई संचालित हैं। आधुनिकीकरण योजना के मदरसों को आर्थिक मदद के रूप में केंद्र, राज्य से अलग-अलग अंशदान आता है। दोनों अंशदान से मदरसों के शिक्षकों को वेतन मिलता है। मिश्र के अनुसार जिले में करीब एक दर्जन मदरसे ऐसे हैं जो 1998 से पूर्व के संचालित हैं। इन मदरसों ने बीएसए या एडी बेसिक से मान्यता ले रखी है। 1998 में अलग से राज्य अल्पसंख्यक विभाग की स्थापना हुई थी। इसके बाद शासन ने स्थापना से पहले चल रहे मदरसों को हिदायत दी थी कि वे अल्पसंख्यक विभाग से मान्यता प्राप्त कर लें। मान्यता लेने के बाद ही उनके मदरसों के शिक्षकों को अल्पसंख्यक विभाग से वेतन मिल सकता है। विभाग ने मांगी गई सूचना अल्पसंख्यक विभाग के पोर्टल पर अल्पसंख्यक विभाग से मान्यता लेने के विवरण समेत अन्य जानकारी अपलोड करने के निर्देश दिए थे। परंतु मदरसों ने शासन के आदेशों का पालन तय तारीख तक नहीं किया है। अब वेबसाइट बंद हो गई है। इन मदरसों के शिक्षकों का वेतन किसी भी समय रोका जा सकता है। इस बारे में शासन से दिशा निर्देश मांगा गया है।
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