घर घर जाकर टीबी मरीज खोजेगा स्वास्थ्य विभाग, चलाया जाएगा डोर-टू-डोर सक्रिय टीबी क्षय रोग कार्यक्रम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर Updated Sun, 06 Jan 2019 12:08 AM IST
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भारत में टीबी
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बिजनौर। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में सात से 17 जनवरी तक डोर-टू-डोर सक्रिय टीबी क्षय रोग कार्यक्रम चलाया जाएगा। इसके लिए जिले भर में कुल 202 टीम लगाई गई हैं। कार्यक्रम को सफल बनाने में 13 नोडल अधिकरी, 39 सुपरवाइजर समेत 606 कर्मचारी अहम भूमिका निभाएंगे। जिले की सभी 12 टीबी यूनिट पर आधुनिक मशीनों द्वारा बलगम की जांच की जाएगी।
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जिले में सात से 17 जनवरी तक डोर-टू-डोर अभियान चलाया जाएगा। राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की टीम घर-घर जाकर टीबी रोगियों की खोज करेगी। जिले के एक लाख चार हजार 288 घरों को आच्छादित करने का लक्ष्य रखा गया है। चिह्नित क्षेत्रों में इस अभियान के अंतर्गत चयनित कुल चार लाख 17 हजार 149 जनसंख्या पर अभियान चलाया जाना है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस कार्य के लिए 202 टीम का गठन किया गया है। इसके अंतर्गत 606 कर्मचारी एवं स्वयंसेवी कार्यकर्ता शामिल रहेंगे।
टीमों की निगरानी के लिए 39 पर्यवेक्षकों के साथ 13 नोडल अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिले की सभी 12 टीबी यूनिट पर बलगम की जांच की जाएगी। जिला क्षय रोग अधिकारी बीएस रावत के अनुसार राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत भारत में क्षय रोग नियंत्रण के लिए पहले वर्ष 2035 का लक्ष्य था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे घटाकर 2025 कर दिया है। सरकार की मंशा है कि इस अवधि तक भारत को टीबी मुक्त कर दिया जाए। उन्होंने जनपदवासियों से अपील की है कि जिले के सभी लोग स्वास्थ्य टीम का सहयोग करें।
अभियान के अलावा टीबी मरीजों के लिए जिले में कुल 12 क्षय रोग यूनिट व 33 लैब विभिन्न सीएचसी व पीएचसी पर स्थापित हैं। इन स्थानों पर टीबी रोगियों की नि:शुल्क जांच होती है व दवाइयों का वितरण होता है। साथ ही रोगी को 500 रुपये प्रतिमाह पोषण भत्ता के रूप में दिया जाता है। सीएमओ राकेश मित्तल ने बताया कि सभी लोगों से सहयोग की अपील करते हुए निजी चिकित्सकों को भी सूचित करने के लिए कहा गया है, ताकि स्वास्थ्य विभाग ऐसे मरीजों पर निगरानी रख सके, जिनका उपचार प्राइवेट चिकित्सकों के यहां पर चल रहा है। सीएमओ ने बताया कि क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम में प्राइवेट चिकित्सकों के सहयोग के बिना अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं हो सकते।
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