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जैविक खेती का मॉडल बनेंगे जिले के पांच गांव
Updated Sat, 26 May 2018 01:04 AM IST
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बिजनौर। जिले के पांच गांवों को जैविक खेती का मॉडल बनाया जाएगा। इन गांवों में दस-दस किसानों का चयन जैविक खेती के लिए किया गया है। कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की देखरेख में ये किसान जैविक विधि से फसल तैयार करेंगे। इन किसानों को जैविक खेती का ट्रेड मार्क भी कृषि विभाग द्वारा ही दिया जाएगा। जिले के किसान जैविक खेती की ओर जागरूक हो रहे हैं। शासन प्रशासन द्वारा भी किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसे 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का फॉर्मूला माना गया है। जैविक खेती करने से किसानों को खेत में रासायनिक खाद नहीं डालना होगा। जैविक विधि से पैदा हुई फसल का मूल्य भी बाजार में ज्यादा मिलेगा। कृषि विभाग किसानों को जैविक खेती से जोड़ने के लिए जिले में पांच मॉडल गांव बना रहा है। इन गांव के दस-दस किसानों की एक-एक एकड़ जमीन में जैविक खेती कराई जाएगी। यानि इन गांवों में करीब 50 बीघा जमीन में जैविक खेती होगी।
जैविक खेती के लिए इन गांवों का हुआ चयन
जैविक खेती के लिए जलीलपुर ब्लाक के गांव रामपुर नजराना, नजीबाबाद ब्लाक के गांव वीरूवाला, मोहम्मदपुर देवमल के गांव अगरी, स्योहारा ब्लाक के गांव आबिदनगर दूधली, अफजलगढ़ ब्लाक के गांव शेरगढ़ को चुना गया है। जैविक खेती के लिए चयनित किसानों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।
जैविक खेती के लिए यह होगा काम
किसानों के चयनित खेत की डौल ऊंची की जाएगी। मिट्टी की जांच होगी और जो भी पोषक तत्व कम होगा उसे पूरा किया जाएगा। ढैंचा और हरी खाद बोने के लिए अनुदान मिलेगा। बर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए अनुदान दिया जाएगा। अगर किसान घर के ही बीज को बोएगा तो उसका भी पैसा मिलेगा। इन खेतों में जैविक उर्वरकों के स्प्रे के लिए स्प्रे मशीन पर अलग से अनुदान मिलेगा। किसान रासायनिक स्प्रे वाली मशीन से इन खेतों में स्प्रे नहीं करेंगे।
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तीन साल खेती करने पर होगा रजिस्ट्रेशन
लगातार तीन साल तक जैविक खेती करने पर किसान के खेत का रजिस्ट्रेशन होता है और उसे ट्रेड मार्क दे दिया जाता है। इसमें किसान के 20 से 25 हजार रुपये लगते हैं। इन पांच गांवों के किसानों का रजिस्ट्रेशन भी कृषि विभाग अपने खर्च पर कराएगा। कृषि उपनिदेशक जेपी चौधरी के अनुसार पांच गांवों के किसानों को जैविक खेती के लिए चुना गया है। इन किसानों को देखकर बाकी गांवों के किसान भी जैविक खेती करेंगे।
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जैविक खेती के लिए इन गांवों का हुआ चयन
जैविक खेती के लिए जलीलपुर ब्लाक के गांव रामपुर नजराना, नजीबाबाद ब्लाक के गांव वीरूवाला, मोहम्मदपुर देवमल के गांव अगरी, स्योहारा ब्लाक के गांव आबिदनगर दूधली, अफजलगढ़ ब्लाक के गांव शेरगढ़ को चुना गया है। जैविक खेती के लिए चयनित किसानों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।
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जैविक खेती के लिए यह होगा काम
किसानों के चयनित खेत की डौल ऊंची की जाएगी। मिट्टी की जांच होगी और जो भी पोषक तत्व कम होगा उसे पूरा किया जाएगा। ढैंचा और हरी खाद बोने के लिए अनुदान मिलेगा। बर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए अनुदान दिया जाएगा। अगर किसान घर के ही बीज को बोएगा तो उसका भी पैसा मिलेगा। इन खेतों में जैविक उर्वरकों के स्प्रे के लिए स्प्रे मशीन पर अलग से अनुदान मिलेगा। किसान रासायनिक स्प्रे वाली मशीन से इन खेतों में स्प्रे नहीं करेंगे।
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तीन साल खेती करने पर होगा रजिस्ट्रेशन
लगातार तीन साल तक जैविक खेती करने पर किसान के खेत का रजिस्ट्रेशन होता है और उसे ट्रेड मार्क दे दिया जाता है। इसमें किसान के 20 से 25 हजार रुपये लगते हैं। इन पांच गांवों के किसानों का रजिस्ट्रेशन भी कृषि विभाग अपने खर्च पर कराएगा। कृषि उपनिदेशक जेपी चौधरी के अनुसार पांच गांवों के किसानों को जैविक खेती के लिए चुना गया है। इन किसानों को देखकर बाकी गांवों के किसान भी जैविक खेती करेंगे।