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अधर में लटकी करोड़ों की तीन पेयजल योजना
Updated Fri, 15 Dec 2017 12:37 AM IST
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अधर में लटकीं तीन पेयजल योजना
बिजनौर। धन के अभाव में तीन पेयजल योजना अधर में अटकी हुई हैं। दो साल से इन योजनाओं के लिए फूटी कौड़ी नहीं मिली है। पेयजल योजना पर काम तो शुरू हो गया था। धन नहीं मिलने पर ठेकेदार ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।
मोहम्मद पुरदेवमल, तैमूरपुर दीपा, बादशाहपुर में कई सालों से पानी की टंकी की मांग हो रही थी। जनप्रतिनिधि ग्रामीणों को टंकी बनाने का केवल आश्वासन दे रहे थे। दो साल पहले जल निगम की ओर से शासन को इनके प्रस्ताव भेजे गए। शासन ने मोहम्मपुर देवल, तैमूरपुर दीपा में पांच-पांच करोड़, बादशाहपुर में साढ़े तीन करोड़ की पेयजल योजना को मंजूरी दे दी। शासन से इन योजनाओं के लिए 20 प्रतिशत धन दे दिया गया। इनके टेंडर निकालकर ठेके दे दिए गए। योजनाओं पर काम शुरू करा दिया। शासन से आए 20 प्रतिशत धन के अलावा ठेकेदार ने योजनाओं पर शासन से बाकी धन आने की आस में कुछ और ज्यादा काम शुरू करा दिया।
दो साल से शासन से बाकी रुका धन नहीं आया है। धन के अभाव में तीनों पेयजल योजना अधर में लटकी हैं। अधिकारी शासन को कई बार रुके धन को देने के लिए पत्र लिख चुके हैं, लेकिन धन नहीं मिला है। ठेकेदार ने धन नहीं मिलने के कारण पेयजल योजना का काम रोक दिया है। ठेकेदार अपने पास से धन लगाने को तैयार नहीं हैं। सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद पेयजल योजनाओं को धन मिलने की उम्मीद बंधी थी, लेकिन हालात जस के तस हैं। जल निगम के अधिशासी अभियंता अरुण कुमार त्यागी के मुताबिक शासन से धन मिलने के इंतजार में ये योजनाएं अटकी हैं। धन मिलने के बाद बाकी रुके काम को भी पूरा कराया जाएगा।
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बिजनौर। धन के अभाव में तीन पेयजल योजना अधर में अटकी हुई हैं। दो साल से इन योजनाओं के लिए फूटी कौड़ी नहीं मिली है। पेयजल योजना पर काम तो शुरू हो गया था। धन नहीं मिलने पर ठेकेदार ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।
मोहम्मद पुरदेवमल, तैमूरपुर दीपा, बादशाहपुर में कई सालों से पानी की टंकी की मांग हो रही थी। जनप्रतिनिधि ग्रामीणों को टंकी बनाने का केवल आश्वासन दे रहे थे। दो साल पहले जल निगम की ओर से शासन को इनके प्रस्ताव भेजे गए। शासन ने मोहम्मपुर देवल, तैमूरपुर दीपा में पांच-पांच करोड़, बादशाहपुर में साढ़े तीन करोड़ की पेयजल योजना को मंजूरी दे दी। शासन से इन योजनाओं के लिए 20 प्रतिशत धन दे दिया गया। इनके टेंडर निकालकर ठेके दे दिए गए। योजनाओं पर काम शुरू करा दिया। शासन से आए 20 प्रतिशत धन के अलावा ठेकेदार ने योजनाओं पर शासन से बाकी धन आने की आस में कुछ और ज्यादा काम शुरू करा दिया।
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दो साल से शासन से बाकी रुका धन नहीं आया है। धन के अभाव में तीनों पेयजल योजना अधर में लटकी हैं। अधिकारी शासन को कई बार रुके धन को देने के लिए पत्र लिख चुके हैं, लेकिन धन नहीं मिला है। ठेकेदार ने धन नहीं मिलने के कारण पेयजल योजना का काम रोक दिया है। ठेकेदार अपने पास से धन लगाने को तैयार नहीं हैं। सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद पेयजल योजनाओं को धन मिलने की उम्मीद बंधी थी, लेकिन हालात जस के तस हैं। जल निगम के अधिशासी अभियंता अरुण कुमार त्यागी के मुताबिक शासन से धन मिलने के इंतजार में ये योजनाएं अटकी हैं। धन मिलने के बाद बाकी रुके काम को भी पूरा कराया जाएगा।
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