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केहरीपुर वन चौकी पर किसानों ने ढेरा जमाया
Updated Thu, 30 Nov 2017 12:22 AM IST
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रेहड़ । भाकियू ने अमानगढ़ रेंज की केहरीपुर वन चौकी पर पशुओं के साथ आठवें दिन भी ढेरा जमाए रखा। किसानों ने चूल्हा चौकी बिछाकर पूरी रात वन चौकी में काटी। भाकियू के धरने को पूर्व विधायक डॉ. इंद्रदेव सिंह ने भी समर्थन दिया है। पूर्व विधायक ने कहा कि किसानों का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा। प्रशासन की मनमानी नहीं चलनी दी जाएगी। वन विभाग को जमीनों को लेकर नियमानुसार कार्रवाई करनी होगी।
बुधवार को भी भाकियू के बैनर तले किसान पशुओं लेकर वन चौकी पर ही जमे रहे। किसानों का कहना है कि अभी तो आंदोलन की शुरूआत है। जरूरत पड़ने पर जनपद की प्रत्येक वन चौकी पर किसानों को कब्जा होगा। यदि प्रशासन ने हठधर्मिता खत्म नहीं की तो पांच दिसंबर से प्रत्येक वन रेंज कार्यालय पर तालाबंदी कर पशु बांध दिए जाएंगे। एक दिसंबर से किसान राजगढ़, धामपुर, साहनपुर, चांदपुर और नूरपुर वन रेंज में कब्जा जमाना शुरू करेंगे। रेंज के अधिकारियों को दफ्तरों से निकालकर बाहर कर दिया जाएगा। आंदोलन को धार देने के लिए किसानों ने वन चौकी पर पशुओं की संख्या बढ़ानी शुरू कर दी है। अधिकतर किसानों ने पशु बांधकर चौकी पर ही चूल्हा चौका शुरू कर दिया है। महिलाएं भी अपने बच्चों के साथ वहीं डटी हैं। भाकियू के आंदोलन को पूर्व विधायक इंद्रदेव सिंह ने भी अपने समर्थन की घोषणा कर दी है। अपने समर्थकों के साथ पहुंचे पूर्व विधायक ने कहा कि दशकों से किसान जमीनों पर काबिज हैं। कई वर्ष किसानों को भूमि समतल करने में लग गए। इस भूमि पर कुछ पैदा नहीं होता था। किसानों ने जमीन को उपजाऊ बनाया है। जमीन के उपज देने का दौर शुरू हुआ तो वन विभाग भूमि को अपनी बताने लगा है। वन विभाग की मनमानी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। धरने में बलजीत सिंह, दर्शन फौजी, मलकीत सिंह, विरसा सिंह सुखदेव, हरभजन, डालचंद, लियाकत, विद्या, चरनजीत, जाफरी, खातून आदि मौजूद रहे। रेहड़ । उधर, एसडीएम आजाद भगत सिंह का कहना है कि उच्चाधिकारियों के आदेश पर धरना समाप्त कराने को लेकर किसानों से 30 नवंबर को वार्ता की जाएगी।
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बुधवार को भी भाकियू के बैनर तले किसान पशुओं लेकर वन चौकी पर ही जमे रहे। किसानों का कहना है कि अभी तो आंदोलन की शुरूआत है। जरूरत पड़ने पर जनपद की प्रत्येक वन चौकी पर किसानों को कब्जा होगा। यदि प्रशासन ने हठधर्मिता खत्म नहीं की तो पांच दिसंबर से प्रत्येक वन रेंज कार्यालय पर तालाबंदी कर पशु बांध दिए जाएंगे। एक दिसंबर से किसान राजगढ़, धामपुर, साहनपुर, चांदपुर और नूरपुर वन रेंज में कब्जा जमाना शुरू करेंगे। रेंज के अधिकारियों को दफ्तरों से निकालकर बाहर कर दिया जाएगा। आंदोलन को धार देने के लिए किसानों ने वन चौकी पर पशुओं की संख्या बढ़ानी शुरू कर दी है। अधिकतर किसानों ने पशु बांधकर चौकी पर ही चूल्हा चौका शुरू कर दिया है। महिलाएं भी अपने बच्चों के साथ वहीं डटी हैं। भाकियू के आंदोलन को पूर्व विधायक इंद्रदेव सिंह ने भी अपने समर्थन की घोषणा कर दी है। अपने समर्थकों के साथ पहुंचे पूर्व विधायक ने कहा कि दशकों से किसान जमीनों पर काबिज हैं। कई वर्ष किसानों को भूमि समतल करने में लग गए। इस भूमि पर कुछ पैदा नहीं होता था। किसानों ने जमीन को उपजाऊ बनाया है। जमीन के उपज देने का दौर शुरू हुआ तो वन विभाग भूमि को अपनी बताने लगा है। वन विभाग की मनमानी कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। धरने में बलजीत सिंह, दर्शन फौजी, मलकीत सिंह, विरसा सिंह सुखदेव, हरभजन, डालचंद, लियाकत, विद्या, चरनजीत, जाफरी, खातून आदि मौजूद रहे। रेहड़ । उधर, एसडीएम आजाद भगत सिंह का कहना है कि उच्चाधिकारियों के आदेश पर धरना समाप्त कराने को लेकर किसानों से 30 नवंबर को वार्ता की जाएगी।
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