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सहकारी समितियों में बकाया वसूली का ग्राफ गिरा
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बिजनौर। जिले की सहकारी समितियों की बकाया वसूली का ग्राफ गिर रहा है। बकाएदार किसान पैसा जमा नहीं कर रहे हैं। कम वसूली का असर समितियों के व्यवसाय पर पड़ रहा है। इस साल की वसूली की आखिरी तारीख समाप्त होने में तीन दिन बचे हैं। अवधि में वसूली लक्ष्य पूरा होने के आसार नहीं हैं।
जिले में 96 सहकारी समितियां हैं। एक लाख 46 हजार किसान सदस्य हैं। समितियां किसानों को कम ब्याज दर पर बीज, खाद उधार देती है। समितियों के मिनी बैंक नकद पैसा कर्ज देते हैं। किसान को 30 जून तक कर्ज लौटाना होता है। वित्तीय वर्ष 2014-15 के बाद वसूली लगातार कम हुई है। इससे समितियों में नए व्यवसाय शुरू नहीं हुए। वित्तीय वर्ष 2018-19 में सहकारी समितियों नें किसानों को 681 करोड़ को लोन दिया। 26 जून तक 641 करोड़ की वसूली हुई है। एआर अमित त्यागी के अनुसार बकाया का 95 प्रतिशत वसूलने का लक्ष्य है। एक दर्जन समिति वसूलयाबी में फिसड्डी हैं। उन्हें फोकस करके काम हो रहा है।
डिफाल्टरों को नहीं मिलेगा खाद व बीज
बिजनौर। कर्ज जमा नहीं करने वाले किसानों को 30 जून के बाद समितियों से बीज खाद मिलना बंद हो जाएगा। ऐसे किसानों की संख्या करीब 25 हजार बताई गई है। इससे किसान पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। ब्याज अधिक देना होगा। एआर अमित त्यागी ने बकाएदारों से 30 जून तक पैसा जमा करने की अपील की है। भाकियू के जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि शासन किसानों के गन्ने का पैसा दिलवाएं। समितियों का बकाया जमा करने की समय सीमा बढ़ाई जाएं।
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बकाया वसूली में फिसड्डी समितियां
बिजनौर। कासमपुर गढ़ी, काजमपुर, किवाड़, बसेड़ा नया, स्योहारा, महमूदपुर, मिलक जहांगीराबाद, कुशलपुर मडैरी, काजीपुर इम्मा, नंगला बकाया वसूलयाबी बेहद पिछड़ी है। एआर के अनुसार डिफॉल्टर समितियों पर कार्रवाई होगी।
एक दर्जन ने की शत प्रतिशत वसूली
बिजनौर। जिले में शत प्रतिशत वसूलयाबी करने वाली एक दर्जन से अधिक समिति हो गई है। फरीदपुर भोगी, बरुकी, उमरपुर जमालपुर, भरैरा, गजरौला अचपल, गंज, हल्दौर, सिसौना, किरतपुर, जसवंतपुर, बनी गणेश, चांदपुर व मोरना शत प्रतिशत वसूलकर टॉप पर हैं।
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जिले में 96 सहकारी समितियां हैं। एक लाख 46 हजार किसान सदस्य हैं। समितियां किसानों को कम ब्याज दर पर बीज, खाद उधार देती है। समितियों के मिनी बैंक नकद पैसा कर्ज देते हैं। किसान को 30 जून तक कर्ज लौटाना होता है। वित्तीय वर्ष 2014-15 के बाद वसूली लगातार कम हुई है। इससे समितियों में नए व्यवसाय शुरू नहीं हुए। वित्तीय वर्ष 2018-19 में सहकारी समितियों नें किसानों को 681 करोड़ को लोन दिया। 26 जून तक 641 करोड़ की वसूली हुई है। एआर अमित त्यागी के अनुसार बकाया का 95 प्रतिशत वसूलने का लक्ष्य है। एक दर्जन समिति वसूलयाबी में फिसड्डी हैं। उन्हें फोकस करके काम हो रहा है।
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डिफाल्टरों को नहीं मिलेगा खाद व बीज
बिजनौर। कर्ज जमा नहीं करने वाले किसानों को 30 जून के बाद समितियों से बीज खाद मिलना बंद हो जाएगा। ऐसे किसानों की संख्या करीब 25 हजार बताई गई है। इससे किसान पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। ब्याज अधिक देना होगा। एआर अमित त्यागी ने बकाएदारों से 30 जून तक पैसा जमा करने की अपील की है। भाकियू के जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि शासन किसानों के गन्ने का पैसा दिलवाएं। समितियों का बकाया जमा करने की समय सीमा बढ़ाई जाएं।
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बकाया वसूली में फिसड्डी समितियां
बिजनौर। कासमपुर गढ़ी, काजमपुर, किवाड़, बसेड़ा नया, स्योहारा, महमूदपुर, मिलक जहांगीराबाद, कुशलपुर मडैरी, काजीपुर इम्मा, नंगला बकाया वसूलयाबी बेहद पिछड़ी है। एआर के अनुसार डिफॉल्टर समितियों पर कार्रवाई होगी।
एक दर्जन ने की शत प्रतिशत वसूली
बिजनौर। जिले में शत प्रतिशत वसूलयाबी करने वाली एक दर्जन से अधिक समिति हो गई है। फरीदपुर भोगी, बरुकी, उमरपुर जमालपुर, भरैरा, गजरौला अचपल, गंज, हल्दौर, सिसौना, किरतपुर, जसवंतपुर, बनी गणेश, चांदपुर व मोरना शत प्रतिशत वसूलकर टॉप पर हैं।