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आज शनिदेव जयंती, सोमवती अमावस्या व वट सावित्री व्रत एक साथ
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आज शनिदेव जयंती, सोमवती अमावस्या व वट सावित्री व्रत एक साथ
बिजनौर। सोमवार को शनिदेव जयंती, सोमवती अमावस्या व वट सावित्री व्रत का योग एकसाथ बन रहा है। यह योग 149 साल बाद बन रहा है। इस दिन गंगा स्नान, पितरों के तर्पण व पूजा पाठ का विशेष फल मिलता है। धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषाचार्य पंडित ललित शर्मा के अनुसार शनिदेव के प्रति पुराणों में अनेक व्याख्यान हैं। शनिदेव को सूर्य पुत्र व कर्मफल दाता माना जाता है। भ्रांतियों के कारण शनिदेव को मारक, अशुभ व दुख का कारक माना जाता है। मगर, वे इतने अशुभ व मारक नहीं हैं। परमपिता परमात्मा ने शनिदेव को तीनों लोकों का न्यायाधीश नियुक्त किया है। शनिदेव जयंती सोमवार को है। सोमवार को ही सोमवती अमावस्या व वट सावित्री व्रत का योग बन रहा है। यह योग 149 साल बाद बन रहा है। इससे पहले यह योग 30 मई 1870 को बना था। कहा कि सोमवार को धार्मिक कार्य करने का विशेष फल मिलेगा। इस दिन गंगा स्नान करने का विशेष महत्व रहेगा। कहा कि शनिदेव पर जिनकी कृपा होती है, उनके सभी कार्य सिद्ध होते हैं।
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बिजनौर। सोमवार को शनिदेव जयंती, सोमवती अमावस्या व वट सावित्री व्रत का योग एकसाथ बन रहा है। यह योग 149 साल बाद बन रहा है। इस दिन गंगा स्नान, पितरों के तर्पण व पूजा पाठ का विशेष फल मिलता है। धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषाचार्य पंडित ललित शर्मा के अनुसार शनिदेव के प्रति पुराणों में अनेक व्याख्यान हैं। शनिदेव को सूर्य पुत्र व कर्मफल दाता माना जाता है। भ्रांतियों के कारण शनिदेव को मारक, अशुभ व दुख का कारक माना जाता है। मगर, वे इतने अशुभ व मारक नहीं हैं। परमपिता परमात्मा ने शनिदेव को तीनों लोकों का न्यायाधीश नियुक्त किया है। शनिदेव जयंती सोमवार को है। सोमवार को ही सोमवती अमावस्या व वट सावित्री व्रत का योग बन रहा है। यह योग 149 साल बाद बन रहा है। इससे पहले यह योग 30 मई 1870 को बना था। कहा कि सोमवार को धार्मिक कार्य करने का विशेष फल मिलेगा। इस दिन गंगा स्नान करने का विशेष महत्व रहेगा। कहा कि शनिदेव पर जिनकी कृपा होती है, उनके सभी कार्य सिद्ध होते हैं।