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गायत्री शक्तिपीठ का पांच दिवसीय षोडश संस्कार आयोजित
Updated Sun, 19 Aug 2018 11:29 PM IST
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यज्ञ के साथ षोडश संस्कार प्रशिक्षण शुरू
नजीबाबाद । गायत्री शक्तिपीठ में आयोजित षोडश संस्कार प्रशिक्षण में अनेक साधकों ने भाग लिया। यज्ञ में आहुति के साथ विभिन्न संस्कारों के महत्व पर चर्चा हुई।
शांतिकुंज के जोनल कार्यालय गायत्री शक्तिपीठ जयनगर में पांच दिवसीय षोडश संस्कार प्रशिक्षण आयोजित किया। शुभारंभ शांतिकुंज के परिव्राजक गंधर्व सिंह ने गायत्री यज्ञ से किया। यज्ञ में अनेक साधकों ने आहुतियां दीं। डॉ.एस प्रसाद ने मुख्य दीप प्रज्ज्वलित किया। परिव्राजक ने कहा कि यज्ञ चिकित्सा विज्ञान है, यज्ञ से प्राणी मात्र का कल्याण होता है। उन्होंने नामकरण, विद्यारंभ दीक्षा, यज्ञोपवीत विवाह सहित विभिन्न संस्कारों के महत्व की जानकारी दी।
गायत्री शक्तिपीठ के व्यवस्थापक डॉ.दीपक कुमार ने कहा कि आध्यात्मिक उपचार का नाम संस्कार है। भारतीय संस्कृति के अनुसार 16 प्रकार के संस्कार होते हैं। जिन्हें षोडश संस्कार नाम दिया गया है। माता के गर्भ में आने से लेकर मृत्यु तक भारतीय संस्कृति के अनुसार 16 उपचारों द्वारा देवता बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि षोडश संस्कारों के माध्यम से ही मानव महा मानव बनता है।
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व्यवस्थापक ने बताया कि पांच दिन तक चलने वाले षोडश संस्कार प्रशिक्षण में सुबह 7 बजे से 10 बजे तक और शाम 4 बजे से 6 बजे तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम में सारिका अग्रवाल, पुष्पा शर्मा, श्याम कुमारी, महारानी शर्मा, नंदराम, सत्यप्रकाश, राज भटनागर, जानवी, अलका, प्रभा, ऊषा गुप्ता, कमलेश, नीलम बरनवाल, सरोज, सुषमा चौहान ने भाग लिया।
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नजीबाबाद । गायत्री शक्तिपीठ में आयोजित षोडश संस्कार प्रशिक्षण में अनेक साधकों ने भाग लिया। यज्ञ में आहुति के साथ विभिन्न संस्कारों के महत्व पर चर्चा हुई।
शांतिकुंज के जोनल कार्यालय गायत्री शक्तिपीठ जयनगर में पांच दिवसीय षोडश संस्कार प्रशिक्षण आयोजित किया। शुभारंभ शांतिकुंज के परिव्राजक गंधर्व सिंह ने गायत्री यज्ञ से किया। यज्ञ में अनेक साधकों ने आहुतियां दीं। डॉ.एस प्रसाद ने मुख्य दीप प्रज्ज्वलित किया। परिव्राजक ने कहा कि यज्ञ चिकित्सा विज्ञान है, यज्ञ से प्राणी मात्र का कल्याण होता है। उन्होंने नामकरण, विद्यारंभ दीक्षा, यज्ञोपवीत विवाह सहित विभिन्न संस्कारों के महत्व की जानकारी दी।
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गायत्री शक्तिपीठ के व्यवस्थापक डॉ.दीपक कुमार ने कहा कि आध्यात्मिक उपचार का नाम संस्कार है। भारतीय संस्कृति के अनुसार 16 प्रकार के संस्कार होते हैं। जिन्हें षोडश संस्कार नाम दिया गया है। माता के गर्भ में आने से लेकर मृत्यु तक भारतीय संस्कृति के अनुसार 16 उपचारों द्वारा देवता बनाया जाता है। उन्होंने कहा कि षोडश संस्कारों के माध्यम से ही मानव महा मानव बनता है।
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व्यवस्थापक ने बताया कि पांच दिन तक चलने वाले षोडश संस्कार प्रशिक्षण में सुबह 7 बजे से 10 बजे तक और शाम 4 बजे से 6 बजे तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम में सारिका अग्रवाल, पुष्पा शर्मा, श्याम कुमारी, महारानी शर्मा, नंदराम, सत्यप्रकाश, राज भटनागर, जानवी, अलका, प्रभा, ऊषा गुप्ता, कमलेश, नीलम बरनवाल, सरोज, सुषमा चौहान ने भाग लिया।