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मानवित होंगे मानवरहित रेलवे क्रासिंग
Updated Mon, 07 May 2018 12:20 AM IST
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बिजनौर। मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर होने वाले हादसों को रोकने के लिए रेलवे विभाग ने सभी मानव रहित फाटकों को मानवित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए बाकायदा सर्वे का काम शुरू भी हो चुका है। उत्तर रेलवे ने इन फाटकों पर होने वाले हादसों को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। दिल्ली और मुरादाबाद से आई टीम ने संयुक्त रूप से सर्वे का कार्य शुरू कर दिया है। गजरौला-मौजमपुर ब्रांच लाइन के सभी करीब 20 फाटक मानवित हो जाएंगे।
मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर बढ़ते हादसों को देखते हुए उत्तर रेलवे द्वारा दो वर्ष पूर्व इन फाटकों पर गेट मित्रों की तैनाती की गई थी। इससे मानव रहित फाटकों पर दुर्घटनाओं में काफी कमी आई थी। ये गेट मित्र ठेके पर तैनात हैं। इनकी 12-12 घंटे की शिफ्टवार ड्यूटी होती है। खास बात ये है कि अधिकतर ये गेट मित्र स्थानीय लोग ही होते हैं। इनका काम मानव रहित क्रासिंग पर ट्रेनों की आवाजाही के समय लोगों और वाहनों को क्रासिंग पार करने से रोकना है।
गजरौला-मौजमपुर ब्रांच लाइन की दूरी करीब 90 किमी है। इस लाइन पर 20 के आसपास मानव रहित रेलवे फाटक हैं। हालांकि इनमें से कुछ फाटक स्थायी रूप से बंद भी किए जा सकते हैं। इन पर गेट मित्र तैनात हैं। ये सभी रेलवे फाटक मानवित हो जाएंगे। दिल्ली और मुरादाबाद से आई टीम ने लाइन का सर्वे शुरू कर दिया है। स्टेशन अधीक्षक अरविंद कुमार राठी ने बताया कि इन फाटकों को मानवित करने में करीब दो माह का समय लगने की संभावना है। ब्रांच लाइन का सर्वे शुरू हो चुका है।
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दिसंबर 2016 में बिजनौर में भी हुआ था हादसा
दिसंबर 2016 में ग्राम नंगला के पास स्थित मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर एक बोलेरो ट्रेन की चपेट में आ गई थी। इससे पांच साल की बालिका अंशिका और उसकी 35 वर्षीय ताई की मौत हो गई थी। हादसे की वजह चालक के कानों में ईयर लीड लगाकर गाने सुनना बताई गई।
कुशीनगर हादसे पर गंभीर हुआ रेलवे विभाग
कुछ दिन पूर्व ही कुशीनगर जनपद में स्थित दुदही रेलवे स्टेशन के पास बहुपुरवा रेलवे क्रासिंग पर पैसेंजर ट्रेन से स्कूली वैन टकरा गई थी। इस दुर्घटना में एक ग्राम प्रधान के तीन बच्चों समेत 13 बच्चों की मौत हो गई थी।
जागरूक नहीं है लोग
मानव रहित रेलवे क्रासिंग पार करने के नियमों की अनदेखी किये जाने से अकसर दुर्घटनाएं होती हैं। कुछ जागरूक व्यक्तियों का कहना है कि लोगों में जागरूकता की कमी है। रेलवे द्वारा समय-समय पर मानव रहित व मानव सहित फाटक पार करने के नियमों की जानकारी दी जाती है। जागरूकता की कमी शहरी और ग्रामीणों दोनों ही क्षेत्र में है।
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मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर बढ़ते हादसों को देखते हुए उत्तर रेलवे द्वारा दो वर्ष पूर्व इन फाटकों पर गेट मित्रों की तैनाती की गई थी। इससे मानव रहित फाटकों पर दुर्घटनाओं में काफी कमी आई थी। ये गेट मित्र ठेके पर तैनात हैं। इनकी 12-12 घंटे की शिफ्टवार ड्यूटी होती है। खास बात ये है कि अधिकतर ये गेट मित्र स्थानीय लोग ही होते हैं। इनका काम मानव रहित क्रासिंग पर ट्रेनों की आवाजाही के समय लोगों और वाहनों को क्रासिंग पार करने से रोकना है।
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गजरौला-मौजमपुर ब्रांच लाइन की दूरी करीब 90 किमी है। इस लाइन पर 20 के आसपास मानव रहित रेलवे फाटक हैं। हालांकि इनमें से कुछ फाटक स्थायी रूप से बंद भी किए जा सकते हैं। इन पर गेट मित्र तैनात हैं। ये सभी रेलवे फाटक मानवित हो जाएंगे। दिल्ली और मुरादाबाद से आई टीम ने लाइन का सर्वे शुरू कर दिया है। स्टेशन अधीक्षक अरविंद कुमार राठी ने बताया कि इन फाटकों को मानवित करने में करीब दो माह का समय लगने की संभावना है। ब्रांच लाइन का सर्वे शुरू हो चुका है।
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दिसंबर 2016 में बिजनौर में भी हुआ था हादसा
दिसंबर 2016 में ग्राम नंगला के पास स्थित मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर एक बोलेरो ट्रेन की चपेट में आ गई थी। इससे पांच साल की बालिका अंशिका और उसकी 35 वर्षीय ताई की मौत हो गई थी। हादसे की वजह चालक के कानों में ईयर लीड लगाकर गाने सुनना बताई गई।
कुशीनगर हादसे पर गंभीर हुआ रेलवे विभाग
कुछ दिन पूर्व ही कुशीनगर जनपद में स्थित दुदही रेलवे स्टेशन के पास बहुपुरवा रेलवे क्रासिंग पर पैसेंजर ट्रेन से स्कूली वैन टकरा गई थी। इस दुर्घटना में एक ग्राम प्रधान के तीन बच्चों समेत 13 बच्चों की मौत हो गई थी।
जागरूक नहीं है लोग
मानव रहित रेलवे क्रासिंग पार करने के नियमों की अनदेखी किये जाने से अकसर दुर्घटनाएं होती हैं। कुछ जागरूक व्यक्तियों का कहना है कि लोगों में जागरूकता की कमी है। रेलवे द्वारा समय-समय पर मानव रहित व मानव सहित फाटक पार करने के नियमों की जानकारी दी जाती है। जागरूकता की कमी शहरी और ग्रामीणों दोनों ही क्षेत्र में है।