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150 साल पुरानी डीएम की कोठी बनेगी हैरिटेज संग्रहालय
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150 साल पुरानी डीएम की कोठी बनेगी हैरिटेज संग्रहालय
रजनीश त्यागी
बिजनौर। अंग्रेजी शासनकाल की गवाह रही 150 साल पुरानी डीएम की कोठी को हैरिटेज संग्रहालय में तब्दील किया जाएगा। इसकी कवायद तेज हो गई है। भारतीय पुरातत्व विभाग के अधिकारी निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सौंप चुके हैं। सब कुछ ठीक रहा तो इसी साल पुराने डीएम आवास को संग्रहालय में बदल दिया जाएगा। इसका पूरा प्रस्ताव डीएम को सौंप दिया गया है।
साल 1817 में ब्रिटिश हुकूमत ने बिजनौर को जिला बनाया था। साल 1824 तक नगीना से जिला मुख्यालय का कामकाज देखा गया। इसके बाद झालू को जिला बनाने की कवायद हुई, लेकिन अंग्रेज कमिश्नर की पत्नी की मौत मधुमक्खी के हमले में हो गई थी। झालू दौरे के दौरान ही कमिश्नर की पत्नी पर मधुमिक्खयों ने हमला बोला था। इसके बाद बिजनौर को जिला बनाते हुए अंग्रेजों ने सरकारी भवनों का निर्माण कराया। सबसे पहले डीएम आवास की कोठी बनाई गई। लगभग 150 साल पुरानी कोठी को साल 2016 में रिटायर कर दिया गया।
अब डीएम नए आवास में रहते हैं। पुरानी कोठी की भव्यता और ऐतिहासिकता को देख जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने हैरिटेज बनाने की कवायद शुरू की। भारतीय पुरातत्व विभाग से संपर्क किया गया। पिछले दिनों ही पुरातत्व विभाग के चार अधिकारियों की टीम ने कोठी का निरीक्षण किया। दीवार, छत, दरवाजे और खिड़कियों का बारीकी से निरीक्षण किया गया। जिसके बाद उन्होंने रिपोर्ट डीएम को भेज दी। अब बिजनौर जिलाधिकारी की अनुमति मिलने का इंतजार है।
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संग्रहालय में रखी जाएंगी ऐतिहासिक यादें
कोठी को संग्रहालय में तब्दील करने के बाद जिले से जुड़ी एतिहासिक चीजों को यहां सजों कर रखा जाएगा। अभी तक इधर उधर बिखरे पड़े पुरातत्व संबंधी वस्तुओं को भी डीएम की कोठी में जगह मिलेगी। जिसके बाद बिजनौर के बारे में जानने की कोशिश करने वाले जिज्ञासुओं को एक स्थान पर सब कुछ मिल जाएगा।
चल रहा है विचार : डीएम
डीएम उमेश मिश्रा ने बताया कि पुराने आवास पर पुरातत्व विभाग से हमने ही प्रस्ताव मांगा था। यहां क्या हो सकता है और क्या संभावनाएं हैं। इस साल बारिश ज्यादा होने से भवन का कुछ हिस्सा खराब हुआ है। इसलिए अभी थोड़ा इंतजार किया जा रहा है। पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट आ चुकी है। इस पर विचार किया जा रहा है।
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। अंग्रेजी शासनकाल की गवाह रही 150 साल पुरानी डीएम की कोठी को हैरिटेज संग्रहालय में तब्दील किया जाएगा। इसकी कवायद तेज हो गई है। भारतीय पुरातत्व विभाग के अधिकारी निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सौंप चुके हैं। सब कुछ ठीक रहा तो इसी साल पुराने डीएम आवास को संग्रहालय में बदल दिया जाएगा। इसका पूरा प्रस्ताव डीएम को सौंप दिया गया है।
साल 1817 में ब्रिटिश हुकूमत ने बिजनौर को जिला बनाया था। साल 1824 तक नगीना से जिला मुख्यालय का कामकाज देखा गया। इसके बाद झालू को जिला बनाने की कवायद हुई, लेकिन अंग्रेज कमिश्नर की पत्नी की मौत मधुमक्खी के हमले में हो गई थी। झालू दौरे के दौरान ही कमिश्नर की पत्नी पर मधुमिक्खयों ने हमला बोला था। इसके बाद बिजनौर को जिला बनाते हुए अंग्रेजों ने सरकारी भवनों का निर्माण कराया। सबसे पहले डीएम आवास की कोठी बनाई गई। लगभग 150 साल पुरानी कोठी को साल 2016 में रिटायर कर दिया गया।
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अब डीएम नए आवास में रहते हैं। पुरानी कोठी की भव्यता और ऐतिहासिकता को देख जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने हैरिटेज बनाने की कवायद शुरू की। भारतीय पुरातत्व विभाग से संपर्क किया गया। पिछले दिनों ही पुरातत्व विभाग के चार अधिकारियों की टीम ने कोठी का निरीक्षण किया। दीवार, छत, दरवाजे और खिड़कियों का बारीकी से निरीक्षण किया गया। जिसके बाद उन्होंने रिपोर्ट डीएम को भेज दी। अब बिजनौर जिलाधिकारी की अनुमति मिलने का इंतजार है।
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संग्रहालय में रखी जाएंगी ऐतिहासिक यादें
कोठी को संग्रहालय में तब्दील करने के बाद जिले से जुड़ी एतिहासिक चीजों को यहां सजों कर रखा जाएगा। अभी तक इधर उधर बिखरे पड़े पुरातत्व संबंधी वस्तुओं को भी डीएम की कोठी में जगह मिलेगी। जिसके बाद बिजनौर के बारे में जानने की कोशिश करने वाले जिज्ञासुओं को एक स्थान पर सब कुछ मिल जाएगा।
चल रहा है विचार : डीएम
डीएम उमेश मिश्रा ने बताया कि पुराने आवास पर पुरातत्व विभाग से हमने ही प्रस्ताव मांगा था। यहां क्या हो सकता है और क्या संभावनाएं हैं। इस साल बारिश ज्यादा होने से भवन का कुछ हिस्सा खराब हुआ है। इसलिए अभी थोड़ा इंतजार किया जा रहा है। पुरातत्व विभाग की रिपोर्ट आ चुकी है। इस पर विचार किया जा रहा है।