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सात फार्मेसिस्टों की मतगणना में लगाई ड्यूटी, मरीजों को झेलनी पड़ेगी पर1ेशानी
Updated Sun, 26 Nov 2017 11:46 PM IST
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सात फार्मेसिस्टों की मतगणना में लगी ड्यूटी
बिजनौर। प्रशासन की लापरवाही मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती है। इमरजेंसी सेवा देने वाले सात फार्मेसिस्टों की ड्यूटी मतगणना में लगा दी है। इसके लिए फार्मेसिस्टों ने रविवार को प्रशिक्षण भी लिया है।
जिला अस्पताल में कुल दस फार्मेसिस्ट तैनात हैं। इनमें से दो फार्मेसिस्ट दवाइयों का वितरण, दो इमरजेंसी ड्यूटी, एक फार्मेसिस्ट दवाइयों के स्टोर, एक अन्य जगह प्रत्येक दिन तैनात रहता है। इमरजेंसी सेवा में फार्मेसिस्ट की ड्यूटी लगातार 12 घंटे की होती है। फार्मेसिस्टों में से नरेशचंद्र रूडोला, आनंद प्रकाश, जेडी सकलानी, अशोक भंडारी, पुष्पेंद्र सिंह, राजेश रवि, राम सिंह चौहान की ड्यूटी एक दिसंबर को होनी वाली मतगणना में लगा दी है। इस दौरान अगर कोई बड़ा हादसा होता है तो मरीज को इमरजेंसी उपचार नहीं मिल पाएगा। क्योंकि बड़ा हादसा होने पर चार से पांच फार्मेसिस्ट एक साथ मरीजों का प्राथमिक उपचार करते हैं।
फार्मेसिस्टों की ड्यूटी मतगणना में लगने से दवाई वितरण का कार्य भी प्रभावित हो सकता है। हालांकि चुनाव आयोग के साफ निर्देश हैं कि अस्पतालों के इमरजेंसी स्टाफ को चुनाव संबंधी किसी भी कार्य में नहीं लगाना चाहिए। इसके लिए जिला अस्पताल को ड्यूटी पत्र भी प्राप्त हो गए है और रविवार को सातों फार्मेसिस्टों ने मतगणना ड्यूटी का प्रशिक्षण भी लिया। सीएमएस डॉ. राकेश दुबे ने बताया कि जिला अस्पताल में दस फार्मेसिस्ट है उसमें से सात की ड्यूटी मतगणना में लगा दी गई है। उधर, सीडीओ डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि साफ्टवेयर की गलती से फार्मेसिस्ट की ड्यूटी लग गई है। चिकित्सका सेवाओं को पहले से ही आपातकालीन सेवाओं की श्रेणी में माना गया है। फार्मेसिस्टों की ड्यूटी हटा दी गई है।
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बिजनौर। प्रशासन की लापरवाही मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती है। इमरजेंसी सेवा देने वाले सात फार्मेसिस्टों की ड्यूटी मतगणना में लगा दी है। इसके लिए फार्मेसिस्टों ने रविवार को प्रशिक्षण भी लिया है।
जिला अस्पताल में कुल दस फार्मेसिस्ट तैनात हैं। इनमें से दो फार्मेसिस्ट दवाइयों का वितरण, दो इमरजेंसी ड्यूटी, एक फार्मेसिस्ट दवाइयों के स्टोर, एक अन्य जगह प्रत्येक दिन तैनात रहता है। इमरजेंसी सेवा में फार्मेसिस्ट की ड्यूटी लगातार 12 घंटे की होती है। फार्मेसिस्टों में से नरेशचंद्र रूडोला, आनंद प्रकाश, जेडी सकलानी, अशोक भंडारी, पुष्पेंद्र सिंह, राजेश रवि, राम सिंह चौहान की ड्यूटी एक दिसंबर को होनी वाली मतगणना में लगा दी है। इस दौरान अगर कोई बड़ा हादसा होता है तो मरीज को इमरजेंसी उपचार नहीं मिल पाएगा। क्योंकि बड़ा हादसा होने पर चार से पांच फार्मेसिस्ट एक साथ मरीजों का प्राथमिक उपचार करते हैं।
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फार्मेसिस्टों की ड्यूटी मतगणना में लगने से दवाई वितरण का कार्य भी प्रभावित हो सकता है। हालांकि चुनाव आयोग के साफ निर्देश हैं कि अस्पतालों के इमरजेंसी स्टाफ को चुनाव संबंधी किसी भी कार्य में नहीं लगाना चाहिए। इसके लिए जिला अस्पताल को ड्यूटी पत्र भी प्राप्त हो गए है और रविवार को सातों फार्मेसिस्टों ने मतगणना ड्यूटी का प्रशिक्षण भी लिया। सीएमएस डॉ. राकेश दुबे ने बताया कि जिला अस्पताल में दस फार्मेसिस्ट है उसमें से सात की ड्यूटी मतगणना में लगा दी गई है। उधर, सीडीओ डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने बताया कि साफ्टवेयर की गलती से फार्मेसिस्ट की ड्यूटी लग गई है। चिकित्सका सेवाओं को पहले से ही आपातकालीन सेवाओं की श्रेणी में माना गया है। फार्मेसिस्टों की ड्यूटी हटा दी गई है।
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