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बंदी को मनरेगा कार्य पर दिखाकर कर दिया भुगतान
Updated Mon, 26 Feb 2018 11:36 PM IST
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बिजनौर।
गांव चक उदयचंद में एक मनरेगा मजदूर को उसके जेल में रहने के दौरान भी कार्य पर दिखाकर भुगतान कर दिया गया। जांच में भी इस मामले का सत्यापन हुआ है। पूर्व पालिकाध्यक्ष शराफत हुसैन ने यह मामला डीएम अटल कुमार राय के सामने उठाते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम पंचायत चक उदयचंद के पंचायत सदस्य मोहम्मद अख्तर ने गांव में विकास कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाते हुए अधिकारियों से शिकायत की थी। इस मामले की जांच जेई को सौंपी गई। मनरेगा जॉब कार्ड धारक गुलशेर के जेल में होने के बाद भी उसे मनरेगा कार्य में दिखाकर भुगतान करने का आरोप लगाया था। जेई की जांच में खुलासा हुआ कि गुलशेर को 12 अप्रैल 2016 से 25 अप्रैल 2016 तक कुल 12 दिन मनरेगा कार्य पर दिखाया गया। इस कार्य का उसे भुगतान भी दिया गया। जांच अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि के दौरान गुलशेर जेल में था। फिर भी उसे कार्य पर दिखाकर भुगतान कर दिया गया। इस भुगतान हेतु ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम प्रधान दोषी हैं। शराफत हुसैन के मुताबिक जांच में घोटाला पकड़ में आने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने मामले की शिकायत डीएम से की। डीएम ने इस मामले में बीडीओ को पुन: जांच कर आठ दिन में रिपोर्ट उनके सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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गांव चक उदयचंद में एक मनरेगा मजदूर को उसके जेल में रहने के दौरान भी कार्य पर दिखाकर भुगतान कर दिया गया। जांच में भी इस मामले का सत्यापन हुआ है। पूर्व पालिकाध्यक्ष शराफत हुसैन ने यह मामला डीएम अटल कुमार राय के सामने उठाते हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम पंचायत चक उदयचंद के पंचायत सदस्य मोहम्मद अख्तर ने गांव में विकास कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाते हुए अधिकारियों से शिकायत की थी। इस मामले की जांच जेई को सौंपी गई। मनरेगा जॉब कार्ड धारक गुलशेर के जेल में होने के बाद भी उसे मनरेगा कार्य में दिखाकर भुगतान करने का आरोप लगाया था। जेई की जांच में खुलासा हुआ कि गुलशेर को 12 अप्रैल 2016 से 25 अप्रैल 2016 तक कुल 12 दिन मनरेगा कार्य पर दिखाया गया। इस कार्य का उसे भुगतान भी दिया गया। जांच अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि के दौरान गुलशेर जेल में था। फिर भी उसे कार्य पर दिखाकर भुगतान कर दिया गया। इस भुगतान हेतु ग्राम पंचायत सचिव, ग्राम प्रधान दोषी हैं। शराफत हुसैन के मुताबिक जांच में घोटाला पकड़ में आने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने मामले की शिकायत डीएम से की। डीएम ने इस मामले में बीडीओ को पुन: जांच कर आठ दिन में रिपोर्ट उनके सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
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