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नये भवन में नहीं शिफ्ट हो पाया महिला अस्पताल
Updated Wed, 25 Apr 2018 12:09 AM IST
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बिजनौर। जिला अस्पताल में बना महिला विंग का 100 बेड का हॉस्पिटल चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की बाट जोह रहा है। एक वर्ष बीतने के बाद भी नए अस्पताल में महिला चिकित्सालय को शिफ्ट नहीं किया गया है। यहां केवल पर्चियां, दवाइयां और सिर्फ ओपीडी का कार्य चल रहा है।
शासन की मंशा है कि लोगों को मुफ्त में चिकित्सा सुविधाएं दी जाएं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए एक वर्ष पूर्व जिला अस्पताल में स्थित वर्तमान महिला अस्पताल के पीछे महिला विंग के लिए 100 बेड का हॉस्पिटल बनाया गया था। राजकीय निर्माण निगम बरेली ने इसे बनवाकर तैयार कराया था। इस अस्पताल को करीब साढ़े तीन करोड़ की लागत से बनवाया गया था। चार मंजिला इस इमारत में बिजली, पानी आदि मूलभूत सुविधाएं फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। यह मार्च 2017 में बनकर तैयार हो चुका है। इसमें फिलहाल मरीजों का रजिस्ट्रेशन, डिस्पेंसरी, टीकाकरण कक्ष, परिवार नियोजन से संबंधित कार्य होते हैं।
महिला और बाल रोग विशेषज्ञ यहां पर नहीं बैठते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ की यहां पर नियुक्ति नहीं है, जबकि महिला रोगों के लिए केवल ओपीडी की जाती है। सीएमएस आभा वर्मा ने बताया कि नए अस्पताल में अभी काफी सुविधाओं का अभाव है। जेनरेटर, ट्रांसफार्मर, फर्नीचर, चिकित्सकीय स्टाफ आदि की कमी के चलते अभी शिफ्टिंग नहीं हो पाई है। कई बार शासन को अवगत कराया गया है, लेकिन अभी तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
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शासन की मंशा है कि लोगों को मुफ्त में चिकित्सा सुविधाएं दी जाएं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए एक वर्ष पूर्व जिला अस्पताल में स्थित वर्तमान महिला अस्पताल के पीछे महिला विंग के लिए 100 बेड का हॉस्पिटल बनाया गया था। राजकीय निर्माण निगम बरेली ने इसे बनवाकर तैयार कराया था। इस अस्पताल को करीब साढ़े तीन करोड़ की लागत से बनवाया गया था। चार मंजिला इस इमारत में बिजली, पानी आदि मूलभूत सुविधाएं फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। यह मार्च 2017 में बनकर तैयार हो चुका है। इसमें फिलहाल मरीजों का रजिस्ट्रेशन, डिस्पेंसरी, टीकाकरण कक्ष, परिवार नियोजन से संबंधित कार्य होते हैं।
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महिला और बाल रोग विशेषज्ञ यहां पर नहीं बैठते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ की यहां पर नियुक्ति नहीं है, जबकि महिला रोगों के लिए केवल ओपीडी की जाती है। सीएमएस आभा वर्मा ने बताया कि नए अस्पताल में अभी काफी सुविधाओं का अभाव है। जेनरेटर, ट्रांसफार्मर, फर्नीचर, चिकित्सकीय स्टाफ आदि की कमी के चलते अभी शिफ्टिंग नहीं हो पाई है। कई बार शासन को अवगत कराया गया है, लेकिन अभी तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
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