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गांवों, शहरों से निकले खाद से बढ़ेगी खेतों की उर्वरा क्षमता
Updated Mon, 28 Aug 2017 12:32 AM IST
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गन्ना सोसायटी पर मिलेगा जैविक खाद
बिजनौर। गोबर के खाद से रासायनिक खाद और पेस्टीसाइट तक पहुंचे किसान अब फिर से गोबर की ही खाद से खेती करेंगे। फसलों का उत्पादन बढ़ाने और जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिए अब गन्ना सोसायटी पर जैविक खाद मिलेगा। गांवों और शहरों से निकलने वाले कूड़े से यह खाद तैयार किया जाएगा। गन्ना सोसायटी पर यह खाद 200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलेगा। किसानों से जैविक खाद का प्रयोग कराकर पेस्टीसाइट का उपयोग आधा किया जाएगा। गन्ना विभाग ने शुरूआत में दस टन जैविक खाद मंगाया है।
गोबर वाली खाद कम होने से किसान अपने खेतों में रासायनिक खाद और पेस्टीसाइट का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे फसलों खासतौर से गन्ने में आने वाली लागत दोगुनी हो गई है। पेस्टीसाइट के ज्यादा इस्तेमाल से आने वाले समय में खेतों को नुकसान भी तय है। पेस्टीसाइट, रासायनिक खादों का प्रयोग कम करने के लिए गन्ना विभाग किसानों को अब जैविक खाद उपलब्ध कराएगा। जैविक खाद गन्ना विभाग की सहकारी समितियों से मिलेगा। एक बीघा में केवल तीन क्विंटल जैविक खाद ही फसल का उत्पादन बढ़ाने के लिए काफी होगा। जैविक खाद डालने से खेतों में रासायनिक खाद पहले के मुकाबले आधा ही डालना होगा।
किसान खेतों में ऐसे ऐसे पेस्टीसाइट डाल रहे हैं, जो लगातार दो साल खेतों में नहीं डालनी चाहिए। लेकिन किसान खेतों में इनको कई-कई साल तक डाल रहे हैं। इससे खेती की उर्वरक क्षमता जल्दी प्रभावित होने लगेगी। गन्ना विभाग ट्रैंच विधि से बोए गन्ने में ढैंचा बोने के लिए किसानों को जागरूक करेगा। ढैंचे के पौधे को खेत में जोतने से जमीन की उर्वरक क्षमता में जबरदस्त वृद्धि होती है। लगातार तीन साल तक ऐसा करने से खेत में रासायनिक खाद का प्रयोग आधा किया जा सकता है।
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डीसीओ ओपी सिंह के मुताबिक जो किसान लागत आधी कर अधिक उत्पादन लेंगे और जमीन की उर्वरक क्षमता बनाए रखेंगे, वही लंबे समय तक खेती कर सकते हैं। जमीन की उर्वरक क्षमता को बचाना बहुत जरूरी है। जैविक खाद डालने से किसान और जमीन दोनों को फायदा होगा।
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बिजनौर। गोबर के खाद से रासायनिक खाद और पेस्टीसाइट तक पहुंचे किसान अब फिर से गोबर की ही खाद से खेती करेंगे। फसलों का उत्पादन बढ़ाने और जमीन की उर्वरक क्षमता बढ़ाने के लिए अब गन्ना सोसायटी पर जैविक खाद मिलेगा। गांवों और शहरों से निकलने वाले कूड़े से यह खाद तैयार किया जाएगा। गन्ना सोसायटी पर यह खाद 200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से मिलेगा। किसानों से जैविक खाद का प्रयोग कराकर पेस्टीसाइट का उपयोग आधा किया जाएगा। गन्ना विभाग ने शुरूआत में दस टन जैविक खाद मंगाया है।
गोबर वाली खाद कम होने से किसान अपने खेतों में रासायनिक खाद और पेस्टीसाइट का अंधाधुंध इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे फसलों खासतौर से गन्ने में आने वाली लागत दोगुनी हो गई है। पेस्टीसाइट के ज्यादा इस्तेमाल से आने वाले समय में खेतों को नुकसान भी तय है। पेस्टीसाइट, रासायनिक खादों का प्रयोग कम करने के लिए गन्ना विभाग किसानों को अब जैविक खाद उपलब्ध कराएगा। जैविक खाद गन्ना विभाग की सहकारी समितियों से मिलेगा। एक बीघा में केवल तीन क्विंटल जैविक खाद ही फसल का उत्पादन बढ़ाने के लिए काफी होगा। जैविक खाद डालने से खेतों में रासायनिक खाद पहले के मुकाबले आधा ही डालना होगा।
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किसान खेतों में ऐसे ऐसे पेस्टीसाइट डाल रहे हैं, जो लगातार दो साल खेतों में नहीं डालनी चाहिए। लेकिन किसान खेतों में इनको कई-कई साल तक डाल रहे हैं। इससे खेती की उर्वरक क्षमता जल्दी प्रभावित होने लगेगी। गन्ना विभाग ट्रैंच विधि से बोए गन्ने में ढैंचा बोने के लिए किसानों को जागरूक करेगा। ढैंचे के पौधे को खेत में जोतने से जमीन की उर्वरक क्षमता में जबरदस्त वृद्धि होती है। लगातार तीन साल तक ऐसा करने से खेत में रासायनिक खाद का प्रयोग आधा किया जा सकता है।
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डीसीओ ओपी सिंह के मुताबिक जो किसान लागत आधी कर अधिक उत्पादन लेंगे और जमीन की उर्वरक क्षमता बनाए रखेंगे, वही लंबे समय तक खेती कर सकते हैं। जमीन की उर्वरक क्षमता को बचाना बहुत जरूरी है। जैविक खाद डालने से किसान और जमीन दोनों को फायदा होगा।