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सिपाही को ब्लैकमैल करने पर राष्ट्रीय विकलांग पार्टी की महिला जिलाध्यक्ष निलंबित
Updated Sun, 23 Jul 2017 12:43 AM IST
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राष्ट्रीय विकलांग पार्टी की जिलाध्यक्ष निष्कासित
धामपुर (बिजनौर)।
राष्ट्रीय विकलांग पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष केके दीक्षित ने महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष पार्टी से निष्कासित कर दिया है। आरोप है कि जिलाध्यक्ष ने पार्टी के सदस्यों के साथ मिलकर एसपी पर अनावश्यक दबाव बनाया और सिपाही के विरुद्घ मुकदमा दर्ज कराया। जो जांच में झूठा पाया गया।
महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष रेशू जैन ने कोतवाली के सिपाही सुहेल अब्बास के खिलाफ फोन पर अश्लील बात करने का आरोप लगाते हुए एसपी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सिपाही ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से शिकायत कर आरोप लगाया था कि वह कुछ पहले उसके एक रिश्तेदार को किसी मामले में पकड़कर थाने लाया था। युवक को पकड़ने के कुछ देर बाद ही उसने उसे छोड़ने का दबाव बना शुरू कर दिया था। जब उसने नहीं छोड़ा तो वह उसे झूठे मुकदमे फंसाने की धमकी देने लगी। इसी बात को लेकर उसने उस पर फोन पर अश्लील बातें करने का आरोप लगाया। मुकदमे से बचाने के लिए उसने ब्लैकमेल कर 20 हजार रुपये भी मांगे। उसने रकम देकर उससे पीछा छुड़ाने का भी प्रयास किया। उसने स्टांप पर 20 हजार रुपये लेकर फैसला भी लिखा। आरोप है कि बावजूद इसके उसने उसे झूठे मुकदमे फंसा दिया।
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धामपुर (बिजनौर)।
राष्ट्रीय विकलांग पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष केके दीक्षित ने महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष पार्टी से निष्कासित कर दिया है। आरोप है कि जिलाध्यक्ष ने पार्टी के सदस्यों के साथ मिलकर एसपी पर अनावश्यक दबाव बनाया और सिपाही के विरुद्घ मुकदमा दर्ज कराया। जो जांच में झूठा पाया गया।
महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष रेशू जैन ने कोतवाली के सिपाही सुहेल अब्बास के खिलाफ फोन पर अश्लील बात करने का आरोप लगाते हुए एसपी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सिपाही ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से शिकायत कर आरोप लगाया था कि वह कुछ पहले उसके एक रिश्तेदार को किसी मामले में पकड़कर थाने लाया था। युवक को पकड़ने के कुछ देर बाद ही उसने उसे छोड़ने का दबाव बना शुरू कर दिया था। जब उसने नहीं छोड़ा तो वह उसे झूठे मुकदमे फंसाने की धमकी देने लगी। इसी बात को लेकर उसने उस पर फोन पर अश्लील बातें करने का आरोप लगाया। मुकदमे से बचाने के लिए उसने ब्लैकमेल कर 20 हजार रुपये भी मांगे। उसने रकम देकर उससे पीछा छुड़ाने का भी प्रयास किया। उसने स्टांप पर 20 हजार रुपये लेकर फैसला भी लिखा। आरोप है कि बावजूद इसके उसने उसे झूठे मुकदमे फंसा दिया।
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