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लाखों की लागत से पंचायतों में बने मिनी सचिवालय रखरखाब न होने से खंडहर में तब्दील
Updated Tue, 16 Jan 2018 11:57 PM IST
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धामपुर/कासमपुरगढ़ी (बिजनौर)। ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये की लागत से बने मिनी सचिवालय रख रखाव नहीं होने की वजह से खंडहर में तब्दील हो गए हैं। मिनी सचिवालयों की सुध नहीं तो पंचायत लेती है, न ही ब्लॉक अधिकारी ही कोई संज्ञान ले रहे हैं। तहसील क्षेत्र के अधिकांश मिनी सचिवालयों पर असामाजिक तत्वों का कब्जा हैं। तो कहीं पर कूड़ी के ढेर लगे हुए हैं।
शासन ने अधिकांश पंचायतों में एक दशक पहले लाखों रुपये की लागत से मिनी सचिवालयों का निर्माण कराया था। सरकार का मिनी सचिवालयों के निर्माण का उद्देश्य ग्राम पंचायत सचिव और प्रधान को उसमें बैठकर जनता की समस्या का निराकरण करना था, लेकिन पंचायत और ब्लॉक अधिकारियों की उदासीनता के चलते अधिकांश पंचायत घर खंडहर में तब्दील हो गए हैं। सालों से इनकी मरम्मत तक नहीं हो सकी है। ग्राम पंचायत सचिव भी इन सचिवालयों में नहीं बैठते हैं। पंचायत घरों की बदहाल दुर्दशा होने की वजह से ग्राम पंचायत सचिव और प्रधान को प्राथमिक विद्यालयों में ग्राम सभा की बैठकों का आयोजन करना पड़ता है। ऐसे में स्कूल में पढ़ाई लिखाई का कार्य प्रभावित होता है। कई बार स्कूल के शिक्षकों को बच्चों की छुट्टी तक करनी पड़ जाती है। जबकि योगी सरकार ने गत दिनों पंचायतों को मिनी सचिवालयों की मरम्मत के आदेश दिए थे। साथ ही यह भी आदेश दिया था कि पंचायत सचिव मिनी सचिवालयों में बैठक जनता की समस्या का समाधान करेंगे, लेकिन ग्राम पंचायत सचिवों ने मिनी सचिवालयों में बैठना तो दूर, ठीक कराने भी गवारा नहीं किया। अधिकांश मिनी सचिवालयों के पास गंदगी के अंबार लगे हैं। उधर, अफजलगढ़ एडीओ रविकांत वर्मा का कहना है कि जल्द ही सचिवों का निर्देशित कर पंचायत घरों को खाली कराया जाएगा। पंचायत घरों पर कब्जा और कूड़ी का ढेर लगाने वाले शरारती तत्वों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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शासन ने अधिकांश पंचायतों में एक दशक पहले लाखों रुपये की लागत से मिनी सचिवालयों का निर्माण कराया था। सरकार का मिनी सचिवालयों के निर्माण का उद्देश्य ग्राम पंचायत सचिव और प्रधान को उसमें बैठकर जनता की समस्या का निराकरण करना था, लेकिन पंचायत और ब्लॉक अधिकारियों की उदासीनता के चलते अधिकांश पंचायत घर खंडहर में तब्दील हो गए हैं। सालों से इनकी मरम्मत तक नहीं हो सकी है। ग्राम पंचायत सचिव भी इन सचिवालयों में नहीं बैठते हैं। पंचायत घरों की बदहाल दुर्दशा होने की वजह से ग्राम पंचायत सचिव और प्रधान को प्राथमिक विद्यालयों में ग्राम सभा की बैठकों का आयोजन करना पड़ता है। ऐसे में स्कूल में पढ़ाई लिखाई का कार्य प्रभावित होता है। कई बार स्कूल के शिक्षकों को बच्चों की छुट्टी तक करनी पड़ जाती है। जबकि योगी सरकार ने गत दिनों पंचायतों को मिनी सचिवालयों की मरम्मत के आदेश दिए थे। साथ ही यह भी आदेश दिया था कि पंचायत सचिव मिनी सचिवालयों में बैठक जनता की समस्या का समाधान करेंगे, लेकिन ग्राम पंचायत सचिवों ने मिनी सचिवालयों में बैठना तो दूर, ठीक कराने भी गवारा नहीं किया। अधिकांश मिनी सचिवालयों के पास गंदगी के अंबार लगे हैं। उधर, अफजलगढ़ एडीओ रविकांत वर्मा का कहना है कि जल्द ही सचिवों का निर्देशित कर पंचायत घरों को खाली कराया जाएगा। पंचायत घरों पर कब्जा और कूड़ी का ढेर लगाने वाले शरारती तत्वों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
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