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कच्चे बदहाल मार्ग को पक्का कराने की मांग को लेकर ग्रामीणों का प्रदर्शन
Updated Tue, 16 Jan 2018 11:49 PM IST
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सड़क की बदहाली पर आक्रोश भड़का
अफजलगढ़ (बिजनौर)। गांव मीरापुर, मोदीवाला के ग्रामीणों का सड़कों की बदहाली पर आक्रोश भड़क गया। मंगलवार को गांव में प्रदर्शनकारियों ने सूबे की भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि देश की आजादी के 70 साल के बाद भी इन गांवों से कालागढ़ जाने वाला मार्ग अभी कच्चा है। अधिकारियों से कई बार मार्ग को पक्का कराने की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
ग्रामीण छोटे अंसारी , मोहम्मद उमर, शमीम अंसारी , हाफिज जाकिर , हाजी मतलूब , रईस अहमद, मोहम्मद शुऐब, वसीम अहमद, खुर्शीद, गजराम सिंह , दलपत, रामकुमार, गनपत सिंह, करतार सिंह, मदन सिंह आदि ने कहा कि गांव मीरापुर मोदीवाला में जाने के लिए कोई भी सीधा मार्ग नहीं है। ग्रामीणों को आठ से 10 किमी की अतिरिक्त दूरी तय कर दूसरे गांवों से घूमकर गांव पहुंचना पड़ता है, जिसमें उन्हें अधिक समय के साथ अधिक धन भी खर्च करना पड़ता है। कालागढ़ मुख्य मार्ग से नहर की पटरी होता हुआ गांव की दूरी सिर्फ तीन किमी के करीब है। आजादी के बाद से 70 वर्ष बीतने के बाद भी यह मार्ग अभी भी कच्चा है। ग्राम प्रधान व ग्रामीणों ने कई बार संबंधित विभाग जनप्रतिनिधियों व शासन प्रशासन से मांग की । किसी ने भी उनकी कोई सुनवाई नही की। ग्रामीणों में असंतोष है। चेताया कि यदि उनकी मांग को जल्द पूरा नहीं हुआ तो आंदोलन तेज होगा। उधर, एक्सईएन राजीव गौतम का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वे जांच कराने के बाद इस मार्ग को पक्का कराने का प्रयास करेंगे।
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अफजलगढ़ (बिजनौर)। गांव मीरापुर, मोदीवाला के ग्रामीणों का सड़कों की बदहाली पर आक्रोश भड़क गया। मंगलवार को गांव में प्रदर्शनकारियों ने सूबे की भाजपा सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि देश की आजादी के 70 साल के बाद भी इन गांवों से कालागढ़ जाने वाला मार्ग अभी कच्चा है। अधिकारियों से कई बार मार्ग को पक्का कराने की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
ग्रामीण छोटे अंसारी , मोहम्मद उमर, शमीम अंसारी , हाफिज जाकिर , हाजी मतलूब , रईस अहमद, मोहम्मद शुऐब, वसीम अहमद, खुर्शीद, गजराम सिंह , दलपत, रामकुमार, गनपत सिंह, करतार सिंह, मदन सिंह आदि ने कहा कि गांव मीरापुर मोदीवाला में जाने के लिए कोई भी सीधा मार्ग नहीं है। ग्रामीणों को आठ से 10 किमी की अतिरिक्त दूरी तय कर दूसरे गांवों से घूमकर गांव पहुंचना पड़ता है, जिसमें उन्हें अधिक समय के साथ अधिक धन भी खर्च करना पड़ता है। कालागढ़ मुख्य मार्ग से नहर की पटरी होता हुआ गांव की दूरी सिर्फ तीन किमी के करीब है। आजादी के बाद से 70 वर्ष बीतने के बाद भी यह मार्ग अभी भी कच्चा है। ग्राम प्रधान व ग्रामीणों ने कई बार संबंधित विभाग जनप्रतिनिधियों व शासन प्रशासन से मांग की । किसी ने भी उनकी कोई सुनवाई नही की। ग्रामीणों में असंतोष है। चेताया कि यदि उनकी मांग को जल्द पूरा नहीं हुआ तो आंदोलन तेज होगा। उधर, एक्सईएन राजीव गौतम का कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वे जांच कराने के बाद इस मार्ग को पक्का कराने का प्रयास करेंगे।
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