{"_id":"597792994f1c1b1f698b4843","slug":"111501008537-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"टीकाकरण में लापरवाही से बढ़ रहे डिप्थीरिया के मरीज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टीकाकरण में लापरवाही से बढ़ रहे डिप्थीरिया के मरीज
Updated Wed, 26 Jul 2017 12:18 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
टीकाकरण में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से बढ़ रहे डिप्थीरिया के मरीज
बिजनौर।
टीकाकरण में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आ रही है। जिले में अब तक सात बच्चों में डिप्थीरिया के लक्षण मिल चुके हैं। एक बच्चे की मौत हो चुकी है। इसे लेकर छोटे बच्चों के परिजनों में भय है।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से जिले में डिप्थीरिया पैर पसारने लगा है। अब तक जिले के सात बच्चों में डिप्थीरिया के लक्षण मिल चुके है। एक मासूम की जान भी जा चुकी है। जानकारों का कहना है कि यह स्वास्थ्य विभाग के टीकाकरण कार्यक्रम में दिलचस्पी नहीं लेने के कारण है। इसके कारण जिले में लगातार डिप्थीरिया के केस बढ़ते जा रहे हैं। मंडावर के गांव रामजीवाला निवासी राजकुमार (12) पुत्र धर्मपाल सिंह में डिप्थीरिया के लक्षण मिले हैं। राजकुमार को कुछ दिन पहले बुखार होने पर निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्राइवेट चिकित्सक ने बच्चे के मुंह में झिल्ली बनने के बाद स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी।
सीएमओ ने डॉ. जितेंद्र को निजी अस्पताल में ही बच्चे के राल का नमूना लेने के लिए भेजा। बच्चों को सीएमओ के निर्देश पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। डॉ. केके सिंह ने बताया कि सही समय पर बच्चों का टीकाकरण नहीं होता है तो यह बीमारी जकड़ लेती है। सीएमओ डॉ. राकेश मित्तल का कहना है कि जिले में 76 प्रतिशत टीकाकरण हुआ है, जो कि औसत से ज्यादा है। जो 24 प्रतिशत बच्चे टीकाकरण से रह जाते हैं, उनमें जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, उन्हें बीमारी जकड़ लेती है। जहां भी बच्चों में डिप्थीरिया के लक्षण मिल रहे हैं, वहीं टीम भेजकर जांच कराई जा रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बिजनौर।
टीकाकरण में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आ रही है। जिले में अब तक सात बच्चों में डिप्थीरिया के लक्षण मिल चुके हैं। एक बच्चे की मौत हो चुकी है। इसे लेकर छोटे बच्चों के परिजनों में भय है।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से जिले में डिप्थीरिया पैर पसारने लगा है। अब तक जिले के सात बच्चों में डिप्थीरिया के लक्षण मिल चुके है। एक मासूम की जान भी जा चुकी है। जानकारों का कहना है कि यह स्वास्थ्य विभाग के टीकाकरण कार्यक्रम में दिलचस्पी नहीं लेने के कारण है। इसके कारण जिले में लगातार डिप्थीरिया के केस बढ़ते जा रहे हैं। मंडावर के गांव रामजीवाला निवासी राजकुमार (12) पुत्र धर्मपाल सिंह में डिप्थीरिया के लक्षण मिले हैं। राजकुमार को कुछ दिन पहले बुखार होने पर निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। प्राइवेट चिकित्सक ने बच्चे के मुंह में झिल्ली बनने के बाद स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी।
विज्ञापन
सीएमओ ने डॉ. जितेंद्र को निजी अस्पताल में ही बच्चे के राल का नमूना लेने के लिए भेजा। बच्चों को सीएमओ के निर्देश पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया है। डॉ. केके सिंह ने बताया कि सही समय पर बच्चों का टीकाकरण नहीं होता है तो यह बीमारी जकड़ लेती है। सीएमओ डॉ. राकेश मित्तल का कहना है कि जिले में 76 प्रतिशत टीकाकरण हुआ है, जो कि औसत से ज्यादा है। जो 24 प्रतिशत बच्चे टीकाकरण से रह जाते हैं, उनमें जिनकी प्रतिरोधक क्षमता कम होती है, उन्हें बीमारी जकड़ लेती है। जहां भी बच्चों में डिप्थीरिया के लक्षण मिल रहे हैं, वहीं टीम भेजकर जांच कराई जा रही है।
विज्ञापन