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सौतेले पिता के पास रहने से बच्चों ने किया इंकार
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सौतेले पिता के पास रहने से बच्चों ने किया इंकार
बिजनौर। सौतेले पिता से बचकर किसी तरह घर से भागे दो मासूम बच्चों को बाल कल्याण समिति ने उनको जन्म देने वाले पिता को सौंपा। रात को 12 बजे बच्चों को उनके माता पिता को सौंपा गया। दो साल बाद बच्चों से मिलने के बाद उनका पिता व अन्य परिजन बहुत भावुक हो गए।
बुधवार को आठ साल की दीपा व उसका भाई चार साल का आशीष रोडवेज के पास घूमते मिले थे। पुलिस ने दोनों को बाल कल्याण समिति की सुपुर्दगी में सौंपा था। दोनों बच्चों ने बताया था कि वे मोहल्ला काजीपाड़ा में ईदगाह रोड निवासी सौतेले पिता विनोद कुमार के साथ रहते हैं। उनकी मां की मौत हो चुकी है। उनका सौतेला पिता दोनों को बुरी तरह पीटता है। पिटाई की वजह से दोनों बच्चों के पैर भी सूजे हुए थे। बाल कल्याण समिति सदस्यों ने दोनों बच्चों को खाना खिलाया व उपचार कराया। टीम सदस्य उनके पिता विनोद कुमार से मिलने गए तो बच्चे पिटाई के डर से गाड़ी से भी नीचे नहीं उतरे। विनोद नशे में धुत था। दोनों बच्चों ने विनोद के साथ रहने से साफ इंकार कर दिया। पड़ोसियों ने भी बताया कि विनोद दोनों बच्चों से बहुत मारपीट करता है। दीपा ने बताया कि उनके असली पिता का नाम देव कुमार है। वह ऋषिकेश में रहते हैं। दीपा के बताए पते पर संपर्क किया गया। उन्हें दोनों बच्चों के बारे में बताया गया। देव कुमार अपने परिजनों सहित रात में ही हरिद्वार से आ गए। देव कुमार ने बताया कि उसकी पत्नी दो साल पहले विवाद होने पर बच्चों सहित घर छोड़कर आ गई थी। उन्होंने तीनों को ढूंढने की बहुत कोशिश की, लेकिन उनका पता नहीं चला। परिजनों को देखते ही दोनों बच्चे उनसे लिपट गए। रात को 12 बजे दोनों बच्चों को पिता देव कुमार, दादी जसोदा व बुआ गौरी की सुपुर्दगी में दे दिया गया। इस दौरान बाल संरक्षण अधिकारी रूबी गुप्ता, बाल कल्याण समिति की न्यायाधीश कोकब अख्तर, दीपा तोमर आदि मौजूद रहे।
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बिजनौर। सौतेले पिता से बचकर किसी तरह घर से भागे दो मासूम बच्चों को बाल कल्याण समिति ने उनको जन्म देने वाले पिता को सौंपा। रात को 12 बजे बच्चों को उनके माता पिता को सौंपा गया। दो साल बाद बच्चों से मिलने के बाद उनका पिता व अन्य परिजन बहुत भावुक हो गए।
बुधवार को आठ साल की दीपा व उसका भाई चार साल का आशीष रोडवेज के पास घूमते मिले थे। पुलिस ने दोनों को बाल कल्याण समिति की सुपुर्दगी में सौंपा था। दोनों बच्चों ने बताया था कि वे मोहल्ला काजीपाड़ा में ईदगाह रोड निवासी सौतेले पिता विनोद कुमार के साथ रहते हैं। उनकी मां की मौत हो चुकी है। उनका सौतेला पिता दोनों को बुरी तरह पीटता है। पिटाई की वजह से दोनों बच्चों के पैर भी सूजे हुए थे। बाल कल्याण समिति सदस्यों ने दोनों बच्चों को खाना खिलाया व उपचार कराया। टीम सदस्य उनके पिता विनोद कुमार से मिलने गए तो बच्चे पिटाई के डर से गाड़ी से भी नीचे नहीं उतरे। विनोद नशे में धुत था। दोनों बच्चों ने विनोद के साथ रहने से साफ इंकार कर दिया। पड़ोसियों ने भी बताया कि विनोद दोनों बच्चों से बहुत मारपीट करता है। दीपा ने बताया कि उनके असली पिता का नाम देव कुमार है। वह ऋषिकेश में रहते हैं। दीपा के बताए पते पर संपर्क किया गया। उन्हें दोनों बच्चों के बारे में बताया गया। देव कुमार अपने परिजनों सहित रात में ही हरिद्वार से आ गए। देव कुमार ने बताया कि उसकी पत्नी दो साल पहले विवाद होने पर बच्चों सहित घर छोड़कर आ गई थी। उन्होंने तीनों को ढूंढने की बहुत कोशिश की, लेकिन उनका पता नहीं चला। परिजनों को देखते ही दोनों बच्चे उनसे लिपट गए। रात को 12 बजे दोनों बच्चों को पिता देव कुमार, दादी जसोदा व बुआ गौरी की सुपुर्दगी में दे दिया गया। इस दौरान बाल संरक्षण अधिकारी रूबी गुप्ता, बाल कल्याण समिति की न्यायाधीश कोकब अख्तर, दीपा तोमर आदि मौजूद रहे।
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