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जिला अस्पताल में फिर कम हुआ एक चिकित्सक
Updated Sun, 19 Nov 2017 12:39 AM IST
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जिला अस्पताल से एक और डॉक्टर का तबादला
बिजनौर। जिला अस्पताल में स्थानांतरण के बाद एक चिकित्सक और कम हो गया। अस्पताल में 27 पदों के सापेक्ष मात्र 15 चिकित्सक ही तैनात हैं। जिला अस्पताल में कॉर्डियोलाजिस्ट, सर्जन और हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती नहीं है।
जिला अस्पताल में तैनात हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल को शासन ने बृहस्पतिवार को इटावा का सीएमओ बना दिया है। कुछ माह पहले ही सर्जन डॉ. वीके शुक्ला को बरेली का सीएमओ बना दिया था। जिला अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का एक, सर्जन, फिजिशियन, हड्डी रोग विशेषज्ञ, नेत्र सर्जन, ऐनेस्थेटिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट के दो-दो, ईएनटी सर्जन, चेस्ट फिजिशयन, स्किन, अधीक्षक एवं प्रभारी अधिकारी, कॉर्डियोलॉजिस्ट के एक-एक, ईएमटी के चार पद हैं। लेकिन यहां मात्र 15 ही चिकित्सक मौजूद हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ रोजना करीब 200 से 250 ओपीडी करते थे। इसके कारण अधिकांश मरीजों को मेरठ रेफर किया जाता है। हड्डी रोग विशेषज्ञ के जाने से विकलांग बोर्ड पर भी फर्क पड़ेगा। इसके कारण जिले भर के दिव्यांगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
विकलांग बोर्ड के लिए होगी चिकित्सक की व्यवस्था
सीएमओ डॉ. राकेश मित्तल ने बताया कि एडी मुरादाबाद, उच्चाधिकारियों को डॉ. अनिल अग्रवाल के स्थानांतरण के बारे में बता दिया गया है। साथ की जिला अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी के चिकित्सकों की स्थिति से भी शासन को अवगत करा दिया है। विकलांग बोर्ड के लिए जल्द की चिकित्सक की व्यवस्था की जाएगी।
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बिजनौर। जिला अस्पताल में स्थानांतरण के बाद एक चिकित्सक और कम हो गया। अस्पताल में 27 पदों के सापेक्ष मात्र 15 चिकित्सक ही तैनात हैं। जिला अस्पताल में कॉर्डियोलाजिस्ट, सर्जन और हड्डी रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती नहीं है।
जिला अस्पताल में तैनात हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल अग्रवाल को शासन ने बृहस्पतिवार को इटावा का सीएमओ बना दिया है। कुछ माह पहले ही सर्जन डॉ. वीके शुक्ला को बरेली का सीएमओ बना दिया था। जिला अस्पताल में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक का एक, सर्जन, फिजिशियन, हड्डी रोग विशेषज्ञ, नेत्र सर्जन, ऐनेस्थेटिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट के दो-दो, ईएनटी सर्जन, चेस्ट फिजिशयन, स्किन, अधीक्षक एवं प्रभारी अधिकारी, कॉर्डियोलॉजिस्ट के एक-एक, ईएमटी के चार पद हैं। लेकिन यहां मात्र 15 ही चिकित्सक मौजूद हैं। हड्डी रोग विशेषज्ञ रोजना करीब 200 से 250 ओपीडी करते थे। इसके कारण अधिकांश मरीजों को मेरठ रेफर किया जाता है। हड्डी रोग विशेषज्ञ के जाने से विकलांग बोर्ड पर भी फर्क पड़ेगा। इसके कारण जिले भर के दिव्यांगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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विकलांग बोर्ड के लिए होगी चिकित्सक की व्यवस्था
सीएमओ डॉ. राकेश मित्तल ने बताया कि एडी मुरादाबाद, उच्चाधिकारियों को डॉ. अनिल अग्रवाल के स्थानांतरण के बारे में बता दिया गया है। साथ की जिला अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी के चिकित्सकों की स्थिति से भी शासन को अवगत करा दिया है। विकलांग बोर्ड के लिए जल्द की चिकित्सक की व्यवस्था की जाएगी।
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