{"_id":"5963e9394f1c1b21788b4573","slug":"101499719993-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"खतरे में लाइनमैनों की जान, नहीं मिलते लाइन जोड़ने के साजो सामान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खतरे में लाइनमैनों की जान, नहीं मिलते लाइन जोड़ने के साजो सामान
Updated Tue, 11 Jul 2017 02:23 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ठेकेदार उपलब्ध नहीं कराते सामान, एक प्लास के सहारे जुड़ती लाइनें
हाथों में पहनने को दस्ताने भी नहीं मिलते, कई बार लाइनमैन उठा चुके हैं मांग
अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
लाइनमैन खतरे में काम को अंजाम देते हैं। ठेकेदारों द्वारा उनको लाइन जोड़ने के लिए साजो सामान उपलब्ध नहीं कराया जाता है, जिसकी वजह से हर रोज करंट से लाइनमैन के झुलसने या फिर मौत की घटना हो रही है। बेहद जरूरी हाथों में पहनने के दस्ताने तक कर्मियों के पास नहीं है। मसले को कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने उच्चाधिकारियों के सामने रखने की बात कही है। साथ ही सामान दिलवाने की मांग को जोरदार ढंग से रखने को कहा है।
जनपद में अक्सर ठेकेदारों के नीचे काम कर रहे संविदा लाइनमैनों के साथ दुर्घटनाएं होती हैं। कभी तार में करंट उतरने से कोई झुलस जाता है तो कभी काल के गाल में समा जाता है। यदि घटनाओं पर नजर दौड़ाएं तो रिकार्ड गवाह है कि करंट से मरने वाले कर्मियों की संख्या पांच है, जबकि झुलसने वालों की 11 है। मौत का सबसे बड़े कारण पर गौर करें तो लाइनमैनों को करंट से बचने का सामान नहीं मिलना है। केवल एक प्लास व झूले के जरिए ही कर्मचारी रात का अंधेरा हो या फिर दिन का उजियारा, कार्य करते हैं।
ठेकेदारों की हरकत और अफसरों की नजरंदाजी के चलते ही लाइनमैनों के साथ घटनाएं बढ़ रही हैं। जान पर खेलकर लाइनमैन तारों को जोड़ने व फाल्ट सही करने की कार्रवाई करते हैं। लेकिन अब उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी विद्युत कर्मचारी संघ शांत बैठने के मूड में नहीं है। उसने स्पष्ट कहा है कि लाइनमैनों को बिजली के सामान की पूरी किट ठेकेदारों द्वारा दी जानी चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो लाइनमैन अपनी जान जोखिम में नहीं डालेंगे।
विज्ञापन
लाइनमैन को एक झूला, एक प्लास, हाथों के दस्ताने व अर्थिंग की चेन मिलनी चाहिए, लेकिन कोई ठेकेदार ये सामान प्राप्त नहीं कराता है। खुद लाइनमैन ही थोड़ा सामान धनराशि खर्च कर खरीदते हैं। इस बार फिर लेबर के टेंडर हैं। अधिकारियों के सामने पूरा सामान ठेकेदार से लेने की बात को उठाया जाएगा।
- अभय कुमार, जिलाध्यक्ष उप्र चतुर्थ श्रेणी विद्युत कर्मचारी संघ।
विज्ञापन
हाथों में पहनने को दस्ताने भी नहीं मिलते, कई बार लाइनमैन उठा चुके हैं मांग
अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
लाइनमैन खतरे में काम को अंजाम देते हैं। ठेकेदारों द्वारा उनको लाइन जोड़ने के लिए साजो सामान उपलब्ध नहीं कराया जाता है, जिसकी वजह से हर रोज करंट से लाइनमैन के झुलसने या फिर मौत की घटना हो रही है। बेहद जरूरी हाथों में पहनने के दस्ताने तक कर्मियों के पास नहीं है। मसले को कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने उच्चाधिकारियों के सामने रखने की बात कही है। साथ ही सामान दिलवाने की मांग को जोरदार ढंग से रखने को कहा है।
जनपद में अक्सर ठेकेदारों के नीचे काम कर रहे संविदा लाइनमैनों के साथ दुर्घटनाएं होती हैं। कभी तार में करंट उतरने से कोई झुलस जाता है तो कभी काल के गाल में समा जाता है। यदि घटनाओं पर नजर दौड़ाएं तो रिकार्ड गवाह है कि करंट से मरने वाले कर्मियों की संख्या पांच है, जबकि झुलसने वालों की 11 है। मौत का सबसे बड़े कारण पर गौर करें तो लाइनमैनों को करंट से बचने का सामान नहीं मिलना है। केवल एक प्लास व झूले के जरिए ही कर्मचारी रात का अंधेरा हो या फिर दिन का उजियारा, कार्य करते हैं।
विज्ञापन
ठेकेदारों की हरकत और अफसरों की नजरंदाजी के चलते ही लाइनमैनों के साथ घटनाएं बढ़ रही हैं। जान पर खेलकर लाइनमैन तारों को जोड़ने व फाल्ट सही करने की कार्रवाई करते हैं। लेकिन अब उत्तर प्रदेश चतुर्थ श्रेणी विद्युत कर्मचारी संघ शांत बैठने के मूड में नहीं है। उसने स्पष्ट कहा है कि लाइनमैनों को बिजली के सामान की पूरी किट ठेकेदारों द्वारा दी जानी चाहिए। यदि ऐसा नहीं किया गया तो लाइनमैन अपनी जान जोखिम में नहीं डालेंगे।
विज्ञापन
लाइनमैन को एक झूला, एक प्लास, हाथों के दस्ताने व अर्थिंग की चेन मिलनी चाहिए, लेकिन कोई ठेकेदार ये सामान प्राप्त नहीं कराता है। खुद लाइनमैन ही थोड़ा सामान धनराशि खर्च कर खरीदते हैं। इस बार फिर लेबर के टेंडर हैं। अधिकारियों के सामने पूरा सामान ठेकेदार से लेने की बात को उठाया जाएगा।
- अभय कुमार, जिलाध्यक्ष उप्र चतुर्थ श्रेणी विद्युत कर्मचारी संघ।