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कमर तक ठंडे जल में खड़े होकर किया सूर्यदेव को नमन

Sat, 21 Nov 2020 07:23 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 21 Nov 2020 07:23 PM IST
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Worshiped the sun god by standing in cold water till the waist
रामपुर गंगा घाट पर छठ पूजा के लिए उमड़ी व्रती महिलाओं की भीड़। - फोटो : BHADOHI
ज्ञानपुर। कार्तिक की भोर के बर्फीले जल की तासीर भी मानो गुनगुनी हो गई हो। सचमुच! यह आस्था की ही गरमाहट थी कि नदियों, सरोवरों के ठंडे पानी में कमर तक खड़े होकर भगवान भास्कर के उदित होने का लंबा इंतजार भी श्रद्धा के गहरे मनोभाव के बीच क्षणिक प्रतीत होने लगा। बादलों की ओट से सूर्यदेव ने धरती पर झांका तो महिला श्रद्धालुओं के माथे से लेकर नासिका तक लगे सुहाग के सिंदूर की लालिमा खिल गई और भक्तिभाव में लीन होकर समर्पण का अर्घ्य दिया।
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सूर्योपासना के महापर्व डाला छठ पर शनिवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए गंगा घाटों, सरोवरों और तालाबों के किनारे आस्थावानों का सैलाब उमड़ पड़ा। बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने बाजे-गाजे के साथ सपरिवार घाट पर पहुंचकर भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया। इसके बाद व्रतियों ने कठोर व्रत का पारण किया और छठ के चार दिवसीय अनुष्ठान का समापन हो गया। शुक्रवार को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के बाद पूजा वाले घरों में रात्रि जागरण हुआ। इस दौरान छठी मइया की महिमा का बखान देवी गीतों के जरिए किया गया। उदित होते सूर्यदेव को अर्घ्य देने के लिए रात तीन बजे से ही श्रद्धालुओं का रेला घाटों और सरोवरों के किनारे लगना शुरू हो गया था।
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ज्ञानपुर नगर के ज्ञानसरोवर के अलावा गोपीगंज के रामपुर, सेमराध, सीतामढ़ी, औराई समेत तमाम गंगा घाटों और सरोवरों पर श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पहले कमर तक जल में खड़े होकर भगवान भास्कर का आह्वान किया फिर उदय होने के बाद पूरी श्रद्धा से उन्हें अर्घ्य देकर लोक कल्याण की कामना की। इस दौरान देवी गीतों और आतिशबाजी से घाट गुलजार हो गए थे। उगा हो सुरुज देव, भइलीं अरघिया के बेर..., कांचहिं बांस के बहंगियां...समेत अन्य तमाम छठ के देवी गीत श्रद्धालुओं की जुबान पर तैर रहे थे। सुरियावां में वरुणा नदी के तट पर विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं ने उगते सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। तमाम श्रद्धालुओं ने कोविड-19 के असर को देखते हुए छतों पर ही जलकुंड बना लिया था। वहां सुबह का अर्घ्य भी दिया गया। घाटों और सरोवरों पर नगर निकायों की ओर से प्रकाश व्यवस्था की गई थी। हालांकि कई स्थानों पर कम प्रकाश श्रद्धालुओं के लिए मुश्किलों का सबब भी बना।
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