कालीन नगरी में हरितालिका तीज की तैयारी शुरू हो गई है। महिलाएं अपने सुहाग की रक्षा एवं अविवाहित युवतियां मनपसंद वर पाने के लिए बृहस्पतिवार को व्रत रहेंगी। कई मंदिरों में विशेष पूजा की भी तैयारी की गई है, जहां महिलाएं एक साथ पूजा-अर्चना करेंगी। व्रती महिलाएं जरूरी सामानों की खरीदारी में जुट गई हैं। मंगलवार को पर्व के लिए साड़ी से लेकर सुहाग की सामग्री और सौंदर्य प्रसाधन सहित अन्य सामानों की खरीदारी की जा रही है। बाजारों में सभी सामान के दाम में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसके बावजूद सुहागिनों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। साड़ी की मैचिंग ब्लाउज, लहंगे की चुन्नी और दुपट्टे की मैचिंग, चूड़ियों के साथ कंगन का जोड़ा, साड़ियों के हिसाब से ज्वैलरी की डिजाइन तक महिलाएं बाजारों में अपनी पसंद के दुकानों पर खरीददारी कर रही हैं। पूजा के लिए शिव-पार्वती के साथ भगवान गणेश की मूर्ति एवं चढ़ाने के लिए जरूरी सामानों की खरीदारी की जा रही है। डुहिया भावसिंहपुर के आचार्य पं. दीनानाथ शुक्ल ने बताया कि हरितालिका तीज स्त्रियों के सौभाग्य का व्रत है। यह काफी कठिन होता है। अविवाहित कन्या सुयोग्य वर के लिए भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करती हैं। पुराणों के अनुसार इस दिन देवी पार्वती को सखियां हर ले गई थीं, उसी के कारण से इस व्रत को हरितालिका तीज रखा गया है। पव के लिए गुरुवार को दो घंटे 30 मिनट का समय मिलेगा। शाम को छह बजकर 33 मिनट से रात आठ बजकर 51 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त है।