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Bhadohi News: परियोजना में कहां रही कमी, डीएम ने जेई से मांगा जवाब
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ज्ञानपुर। जिले में गंगा के तटवर्ती बाढ़ और कटानग्रस्त इलाके छेछुआ और भुर्रा में कटान रोकने के लिए लागू की गई तीन करोड़ की परियोजना का कोई सकारात्मक परिणाम न निकलने पर जिलाधिकारी विशाल सिंह ने सोमवार को सिंचाई विभाग बंधी प्रखंड वाराणसी के जेई की जमकर क्लास लगाई। जिलाधिकारी ने जेई से तत्काल इसकी रिपोर्ट मांगी। जवाब मांगा कि परियोजना में कहां कमी रही। जिससे कटान घटने की बजाय बढ़ गया।
जिले के डीघ ब्लॉक के छेछुआ और भुर्रा गांव हर साल बाढ़ और कटान की चपेट में आते हैं। गंगा में पानी बढ़ते ही इन गांवों के लोग सहम जाते हैं। इन दोनों गांवों की हजारों बीघा जमीन गंगा में समा चुकी है। तीन साल पहले 2021 में यहां सिंचाई विभाग बंधी प्रखंड वाराणसी की ओर से जियो टेक्सटाइल ट्यूब कटर परियोजना लागू कर कटान रोकने का इंतजाम किया गया।
इंजीनियरों ने तब इसे लेटेस्ट टेक्नोलॉजी बताते हुए कटान रोकने की बात कही थी। तीन करोड़ के इस प्रोजेक्ट को गंगा में छेछुआ और भुर्रा गांव के किनारे तीन किमी दायरे में बालू के बड़े-बड़े बैग डाले गए थे। बताया गया था कि इसे गंगा में कटान रूक सकेगा। परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद कटान की समस्या घटने की बजाय बढ़ गई। बालू के बड़े-बड़े बैग से टकराकर गंगा की धाराएं कटान को और तेज कर रही हैं। इसी समस्या को लेकर अमर उजाला ने बृहस्पवितार के अंक में ''कटान रोकने के लिए तीन करोड़ से बना प्रोजेक्ट ही गंगा में डूबा'' शीर्षक के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसको संज्ञान में लेकर जिलाधिकारी विशाल सिंह ने सिंचाई विभाग बंधी प्रखंड वाराणसी के जेई की जमकर क्लास लगाई और परियोजना की जानकारी मिली। जिलाधिकारी जल्द से जल्द रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि परियोजना में कहां कमी रही। इसको लेकर जेई से जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।
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जिले के डीघ ब्लॉक के छेछुआ और भुर्रा गांव हर साल बाढ़ और कटान की चपेट में आते हैं। गंगा में पानी बढ़ते ही इन गांवों के लोग सहम जाते हैं। इन दोनों गांवों की हजारों बीघा जमीन गंगा में समा चुकी है। तीन साल पहले 2021 में यहां सिंचाई विभाग बंधी प्रखंड वाराणसी की ओर से जियो टेक्सटाइल ट्यूब कटर परियोजना लागू कर कटान रोकने का इंतजाम किया गया।
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इंजीनियरों ने तब इसे लेटेस्ट टेक्नोलॉजी बताते हुए कटान रोकने की बात कही थी। तीन करोड़ के इस प्रोजेक्ट को गंगा में छेछुआ और भुर्रा गांव के किनारे तीन किमी दायरे में बालू के बड़े-बड़े बैग डाले गए थे। बताया गया था कि इसे गंगा में कटान रूक सकेगा। परियोजना के धरातल पर उतरने के बाद कटान की समस्या घटने की बजाय बढ़ गई। बालू के बड़े-बड़े बैग से टकराकर गंगा की धाराएं कटान को और तेज कर रही हैं। इसी समस्या को लेकर अमर उजाला ने बृहस्पवितार के अंक में ''कटान रोकने के लिए तीन करोड़ से बना प्रोजेक्ट ही गंगा में डूबा'' शीर्षक के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसको संज्ञान में लेकर जिलाधिकारी विशाल सिंह ने सिंचाई विभाग बंधी प्रखंड वाराणसी के जेई की जमकर क्लास लगाई और परियोजना की जानकारी मिली। जिलाधिकारी जल्द से जल्द रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। जिलाधिकारी विशाल सिंह ने बताया कि परियोजना में कहां कमी रही। इसको लेकर जेई से जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।
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