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बसंत पंचमी:ट्रेनों में कम पड़ी जगह,ओवरलोड होकर दौड़ीं बसें

Wed, 29 Jan 2020 07:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 29 Jan 2020 07:57 PM IST
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Vasant Panchami today in bhadohi
ज्ञानपुर। वसंत पंचमी बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी। माघ महीने का महत्वपूर्ण स्नान पर्व होने के कारण इस दिन बड़ी तादाद में श्रद्धालु गंगा स्नान करते हैं। इससे गंगा घाटों पर स्नान करने वालों की भीड़ जुटेगी। तमाम लोग संगम पर डुबकी लगाने के लिए बुधवार को ही प्रयागराज रवाना हो गए। इसके चलते स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ रही। वसंत पंचमी पर स्कूल-कॉलेजों में सरस्वती पूजन का आयोजन भी किया जाता है।
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माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी पर मनाया जाना वाला वसंत पंचमी पर्व बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। इस दिन ज्ञानदायिनी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना भी की जाएगी। स्नान के इस पर्व पर प्रमुख स्नान पर्व के भी नाम से जानते हैं। पर्व के एक दिन पूर्व से ही भारी भीड़ प्रयागराज में संगम स्नान के लिए रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों पर पहुंच कर यात्रा करते रहे। सुबह से शाम तक संगम पहुंचने के लिए स्नानार्थियों का जमघट लगा रहा। तमाम लोग रात में निजी साधनों से भी पहुंचेंगे। बुधवार को पूर्वोत्तर रेलवे के ज्ञानपुर रोड, जंगीगंज, अहिमनपुर, कटका, माधोसिंह, सरायजगदीश, अलमऊ हाल्ट पर ट्रेनों से यात्रा करने वालों की भारी भीड़ रही। जबकि पूर्वोत्तर प्रशासन प्रमुख स्नान पर्वों को देखते हुए एक दर्जन से अधिक मेला स्पेशल ट्रेन भी चलाया है। बावजूद इसके ट्रेनों में जगह नहीं मिल पा रही थी। यही स्थिति रोडवेज और निजी बसों के साथ देखी गई, जो सुबह से ही ओवरलोड होकर राजमार्ग पर दौड़ती नजर आई। स्टेशनों पर सुरक्षा और संरक्षा का अभाव बने रहने के कारण यात्री असुरक्षित ढंग से यात्रा करने को मजबूर हुए। गंगा यात्रा के कारण राजमार्ग पर होमगार्ड और पीआरडी जवानों के ऊपर छोड़ी गई व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई दिखी।
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पुराणों में क्या है मान्यता
ज्ञानपुर। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां सरस्वती के अवतरण के उपलक्ष्य में वसंत पंचमी मनाई जाती है। पुराणों में बताया गया है कि जगत रचियता ब्रह्मा जी एक बार भ्रमण पर निकले तो उन्हें सारा ब्रह्मांड मूक नजर आया। चारों ओर अजीब सी खामोशी थी, जिसे देखकर उन्हें सृष्टि की रचना में कुछ कमी महसूस हुई। भ्रमण करते हुए ब्रह्माजी एक जगह ठहरे और अपने कमंडल से थोड़ा सा जल लेकर छिड़का तो एक महान ज्योति पुंज प्रकट हुआ, जिससे एक देवी निकलीं। वीणा लिए यह देवी थीं मां सरस्वती। चेहरे पर अद्भुत तेज लिए मां सरस्वती ब्रह्मा जी की पुत्री कहलाईं। उनके प्राकट्यतोत्सव को वसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। मां सरस्वती ने ब्रह्मा जी से पूछा कि भगवन मेरे लिए क्या आदेश है तो ब्रह्मा जी ने कहा देवी आपने अपनी वीणा के धुन से इस संसार को ध्वनि प्रदान करें तभी लोग आपस में संवाद कर सकेंगे, एक-दूसरे के कष्ट को डसम झेंगे। ब्रह्मा जी के आज्ञा का पालन कर मां सरस्वती ने समस्त जीवों को आवाज प्रदान की। समस्त संसार को ध्वनि प्रदान करने वाली मां सरस्वती की पूजा देवता और असुर दोनों ही करते हैं। वसंत पंचमी के दिन घरों, स्कूल-कालेजों में मां की विशेष पूजन-अर्चन शुरू हो गया।
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