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Bhadohi News: टोल बचाने की जुगत में संपर्क मार्ग का सहारा, राजस्व का नुकसान, दुर्घटना की आशंका
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टोल टैक्स बचाने के लिए असनाव होकर जाते बड़े वाहन। संवाद
ज्ञानपुर। टोल बचाने की जुगत में लगे भारी वाहन जिले की संपर्क सड़कों को खराब कर रहे हैं। लालानगर टोल से बचने के लिए वे एक तरफ तो औराई चौराहे से ही अंदर का रास्ता अपना लेते हैं। वहीं दूसरी तरफ ऊंज नहर का रास्ता पकड़ कर अंदर जाते हैं। जिले की अंदर की सड़कों पर भारी वाहनों के आने से एक तरफ सड़क खराब हो रही हैं। वहीं दूसरी तरफ दुर्घटना की आशंका भी रहती है। जिले में वाराणसी-प्रयागराज हाईवे पर लालानगर में टोल प्लाजा है। इस हाईवे से हर दिन करीब नौ से 10 हजार छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। इसमें करीब 60 फीसदी भारी वाहन होते हैं। हाईवे से गुजरने वाले तमाम वाहन चालक ऐसे हैं, जो आते-जाते अंदर की सड़कों से भी भलीभांति परिचित हो चुके हैं।
ऐसे में वे टोल बचाने के चक्कर में अंदरूनी सड़कों का सहारा लेते हैं। वाराणसी की तरफ से आने वाले भारी वाहन औराई चौराहे से कट लेकर भदोही-औराई मार्ग पकड़ लेते हैं और असनाव बाजार से ज्ञानपुर हॉस्टल चौराहे का मार्ग अपना लेते हैं और ज्ञानपुर बाजार से होते हुए गोपीगंज या फिर नहर मार्ग पकड़कर चले जाते हैं।
आए दिन इस तरह के वाहनों का आना-जाना होता है। इसी तरह प्रयागराज की तरफ से आने वाले भारी वाहन भी ऐसा करते हैं। इसके अलावा लालानगर, ऊगापुर नहर समेत अन्य मार्गों का भी वाहन चालक इस्तेमाल करते हैं। इससे राजस्व का नुकसान तो होता ही है। भारी वाहनों के बस्तियों में प्रवेश से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। भारी वाहनों को अंदर के मार्ग पर आने से रोकने के लिए कई बार लोहे एंगल इत्यादि संपर्क मार्ग पर लगाए गए, लेकिन वाहन चालक उसे भी तोड़ देते हैं।
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बाजार से होकर अक्सर बड़े वाहन ज्ञानपुर की तरफ जाते हैं या उधर से आते हैं। इससे बाजार में भीड़ वाले बाजार में दुर्घटना की आशंका रहती है। इसे रोकने की जरूरत है। - राजू गौतम, असनाव बाजार।
अंदर की सड़कों पर भारी वाहनों के आने से सड़कें भी खराब होती हैं, क्योंकि इनकी क्षमता भारी वाहनों को सहने की नहीं होती है। इसकी शिकायत के साथ ही सड़क परिवहन केंद्रीय मंत्री को पत्र भी भेजा था। - राहुल सिंह, बभनौटी।
टोल बचाने के चक्कर में कई भारी वाहन असनाव से न आकर उगापुर व लालानगर वाले रोड का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन आगे नो एंट्री रहती है और किसी हाल में आगे नहीं जाने दिया जाता। जिससे वे खड़े रहते हैं। इसको लेकर सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में बताया गया है। वहीं एनएचएआई को हाईगेज लगाने को कहा गया है, क्योंकि यह मूल समस्या एनएचएआई की है। - राकेश सिंह, यातायात प्रभारी।
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ऐसे में वे टोल बचाने के चक्कर में अंदरूनी सड़कों का सहारा लेते हैं। वाराणसी की तरफ से आने वाले भारी वाहन औराई चौराहे से कट लेकर भदोही-औराई मार्ग पकड़ लेते हैं और असनाव बाजार से ज्ञानपुर हॉस्टल चौराहे का मार्ग अपना लेते हैं और ज्ञानपुर बाजार से होते हुए गोपीगंज या फिर नहर मार्ग पकड़कर चले जाते हैं।
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आए दिन इस तरह के वाहनों का आना-जाना होता है। इसी तरह प्रयागराज की तरफ से आने वाले भारी वाहन भी ऐसा करते हैं। इसके अलावा लालानगर, ऊगापुर नहर समेत अन्य मार्गों का भी वाहन चालक इस्तेमाल करते हैं। इससे राजस्व का नुकसान तो होता ही है। भारी वाहनों के बस्तियों में प्रवेश से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। भारी वाहनों को अंदर के मार्ग पर आने से रोकने के लिए कई बार लोहे एंगल इत्यादि संपर्क मार्ग पर लगाए गए, लेकिन वाहन चालक उसे भी तोड़ देते हैं।
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बाजार से होकर अक्सर बड़े वाहन ज्ञानपुर की तरफ जाते हैं या उधर से आते हैं। इससे बाजार में भीड़ वाले बाजार में दुर्घटना की आशंका रहती है। इसे रोकने की जरूरत है। - राजू गौतम, असनाव बाजार।
अंदर की सड़कों पर भारी वाहनों के आने से सड़कें भी खराब होती हैं, क्योंकि इनकी क्षमता भारी वाहनों को सहने की नहीं होती है। इसकी शिकायत के साथ ही सड़क परिवहन केंद्रीय मंत्री को पत्र भी भेजा था। - राहुल सिंह, बभनौटी।
टोल बचाने के चक्कर में कई भारी वाहन असनाव से न आकर उगापुर व लालानगर वाले रोड का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन आगे नो एंट्री रहती है और किसी हाल में आगे नहीं जाने दिया जाता। जिससे वे खड़े रहते हैं। इसको लेकर सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में बताया गया है। वहीं एनएचएआई को हाईगेज लगाने को कहा गया है, क्योंकि यह मूल समस्या एनएचएआई की है। - राकेश सिंह, यातायात प्रभारी।