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Bhadohi News: अल्ट्रासाउंड संचालकों की सजा बरकरार, गए जेल
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विशेष न्यायाधीश एससीएसटी असद अहमद हाशमी की अदालत ने साजिश एवं कुटरचना के दोषी अल्ट्रासाउंड केंद्र के संचालकों की सजा को बरकरार रखा है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से दोनों को पांच-पांच वर्ष कारावास की सजा मिली है। जिसके खिलाफ दोनों ने अधिवक्ता के माध्यम से सजा को माफ करने और कम करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन राहत नहीं मिली।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश महामंत्री राजेश सिंह ने पांच साल पूर्व गोपीगंज के खान कटरा में अवैध ढंग से अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित होने का आरोप लगाते हुए डीएम से शिकायत की थी।
डीएम के निर्देश पर तत्कालीन एसडीएम ने टीम के साथ जीवन रक्षा डायग्नोस्टिक सेंटर की जांच की। जांच में पाया गया कि जिस चिकित्सक की फोटो लगाकर सेंटर संचालित है, वह चार साल पहले ही सेंटर छोड़ चुके हैं।
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उक्त मामले में सेंटर के प्रबंधक विमल कुमार सिंह और शोएब के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सेंटर को सील कर दिया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
साल 2024 में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दोषी संचालकों को पांच-पांच साल कारावास और 10-10 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई।
जमानत पर बाहर आने पर संचालकों ने जिला जज के यहां प्रार्थना पत्र देकर सजा को माफ करने की गुजारिश की थी। जिला जज के यहां से केस विशेष न्यायाधीश के यहां ट्रांसफर कर दिया गया। जहां सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश ने सीजेएम के आदेश को बरकरार रखा।
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत से दोनों को पांच-पांच वर्ष कारावास की सजा मिली है। जिसके खिलाफ दोनों ने अधिवक्ता के माध्यम से सजा को माफ करने और कम करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन राहत नहीं मिली।
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश महामंत्री राजेश सिंह ने पांच साल पूर्व गोपीगंज के खान कटरा में अवैध ढंग से अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित होने का आरोप लगाते हुए डीएम से शिकायत की थी।
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डीएम के निर्देश पर तत्कालीन एसडीएम ने टीम के साथ जीवन रक्षा डायग्नोस्टिक सेंटर की जांच की। जांच में पाया गया कि जिस चिकित्सक की फोटो लगाकर सेंटर संचालित है, वह चार साल पहले ही सेंटर छोड़ चुके हैं।
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उक्त मामले में सेंटर के प्रबंधक विमल कुमार सिंह और शोएब के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सेंटर को सील कर दिया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने आरोपपत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
साल 2024 में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दोषी संचालकों को पांच-पांच साल कारावास और 10-10 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई।
जमानत पर बाहर आने पर संचालकों ने जिला जज के यहां प्रार्थना पत्र देकर सजा को माफ करने की गुजारिश की थी। जिला जज के यहां से केस विशेष न्यायाधीश के यहां ट्रांसफर कर दिया गया। जहां सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश ने सीजेएम के आदेश को बरकरार रखा।