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Bhadohi News: राजकीय गोदाम में पहुंचा दो सौ क्विंटल फाउंडेशन धान बीज
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ज्ञानपुर। जिले में इस साल खरीफ सीजन में धान की रोपाई के लिए 30 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित होने का अनुमान है। इसको लेकर कृषि विभाग से लेकर किसानों तक ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। जिले के राजकीय कृषि गोदाम घूरीपुर में मंगलवार को 200 क्विंटल फाउंडेशन धान बीज पहुंचा। यहां से इसे ब्लॉक गोदामों तक पहुंचाया जायेगा। ब्लॉक गोदामों पर किसानों को 50 फीसदी के अनुदान पर बीज मिलेगा। जिले में इस साल धान रोपाई को लेकर लक्ष्य निर्धारित नहीं हुआ है। हर साल कृषि विभाग की ओर से 28 से 30 हजार हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित होता है। वहीं अगर बारिश अच्छी होती है तो धान रोपाई का लक्ष्य बढ़ाया भी जाता है। उसी अनुपात में किसानों को फाउंडेशन बीज भी उपलब्ध कराए जाते हैं। इस साल खरीफ सीजन में धान की रोपाई को लेकर किसानों ने तैयारियां शुरू कर दी है। किसान खेतों में नर्सरी डालने के लिए खेतों की गहरी और सामान्य जुताई, वर्मी कंपोस्ट, कीट, नुकसानदायक घासों के उगाव का कार्य शुरू कर दिया है। दूसरी तरफ कृषि विभाग लघु एवं सीमांत किसानों तक फाउंडेशन बीज उपलब्ध कराने की तैयारियां शुरू कर दी है। जिले के राजकीय गोदाम में 200 क्विंटल धान का बीज पहुंच चुका है। जहां से उसे ब्लॉक गोदामों तक पहुंचाया जायेगा। मंगलवार को राजकीय कृषि गोदाम घूरीपुर में लगभग दौ सौ क्विंटल फाउंडेशन धान के बीज को कर्मचारियों ने अनलोड कराया। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि अभी धान रोपाई का लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है। बारिश अच्छी होती है तो इस बार रोपाई का लक्ष्य बढ़ाया जाएगा। बताया कि जल्द ही किसानों को 50 फीसद अनुदान पर चार वेराइटी में ब्लॉक गोदामों से फाउंडेशन धान के बीज मिलना शुरू हो जाएगा। यह भी बताया कि विभाग के बफर गोदाम में छह सौ क्विंटल धान के बीज पहुंचने पर दाम तय होंगे।
ज्ञानपुर। प्रसार विशेषज्ञ केवीके बेजवां आरपी चौधरी ने बताया कि धान फसल की नर्सरी डालने से पहले खेतों की तैयारी कर जुताई कराना लाभदायक होता है। जुताई दो प्रकार की होती है एक गहरी तो दूसरी सामान्य। गहरी जुताई से न सिर्फ खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में मदद मिलती है और खरपतवार मिट्टी के नीचे दबने, खेतों में वायु मंडल के सक्रिय करने में मदद मिलती है। खेतों के तैयार होने पर धान के बीज को शोधन करना न भूलें। बीज शोधन रसायन खुले बाजारों समेत कृषि रक्षा इकाइयों से प्राप्त किया जा सकता है।
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ज्ञानपुर। प्रसार विशेषज्ञ केवीके बेजवां आरपी चौधरी ने बताया कि धान फसल की नर्सरी डालने से पहले खेतों की तैयारी कर जुताई कराना लाभदायक होता है। जुताई दो प्रकार की होती है एक गहरी तो दूसरी सामान्य। गहरी जुताई से न सिर्फ खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में मदद मिलती है और खरपतवार मिट्टी के नीचे दबने, खेतों में वायु मंडल के सक्रिय करने में मदद मिलती है। खेतों के तैयार होने पर धान के बीज को शोधन करना न भूलें। बीज शोधन रसायन खुले बाजारों समेत कृषि रक्षा इकाइयों से प्राप्त किया जा सकता है।
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